प्रीमियम कॉम्पैक्ट लैपटॉप की रेस में नया डेल एक्सपीएस 13 अपनी पहली झलक में ही काफी आकर्षित करता है। इसके प्रोसेसर के चुनाव, डिस्प्ले स्क्रीन की क्वालिटी और मेमोरी की बनावट को देखकर यह साफ समझ आता है कि यह बाजार में सीधे मैकबुक नियो को टक्कर देने के लिए उतारा गया है। हालांकि, डेल ने कुछ मामलों में एप्पल से अलग और बेहतर रास्ते चुने हैं, जबकि एक-दो जगहों पर कुछ समझौते भी देखने को मिलते हैं। यदि आप 1,000 डॉलर से कम बजट में एक पोर्टेबल विंडोज मशीन की तलाश कर रहे हैं, तो खरीदारी का अंतिम फैसला लेने से पहले इसके बेस मॉडल और अपग्रैडेड वेरिएंट के बीच के अंतर को समझना बेहद जरूरी है।
कनेक्टिविटी और पोर्ट्स की बेहतरीन व्यवस्था
जब आप डेल एक्सपीएस 13 को मैकबुक नियो के साथ रखते हैं, तो सबसे पहला बड़ा फायदा इसके पोर्ट्स में नजर आता है। इस नए लैपटॉप में दो आधुनिक 10-Gbps क्षमता वाले USB-C पोर्ट दिए गए हैं। सबसे अच्छी बात यह है कि डेल ने एक पोर्ट बाईं तरफ और दूसरा पोर्ट दाईं तरफ लगाया है, जिससे चार्जर या अन्य एक्सेसरीज को कनेक्ट करना काफी सुविधाजनक हो जाता है। ये दोनों पोर्ट 60 Hz पर एक साथ दो 4K डिस्प्ले को आसानी से ड्राइव कर सकते हैं। अगर आप लैपटॉप की स्क्रीन यानी लिड को बंद रखते हैं, तो यह तीन 4K मॉनिटर्स तक को सपोर्ट करने में सक्षम है। इसके अलावा, इन्हीं पोर्ट्स के जरिए 10 Gbps की तेज रफ्तार से डेटा ट्रांसफर और डिवाइस चार्जिंग भी की जा सकती है।
हालांकि, इस कनेक्टिविटी सेटअप में एक बड़ी कमी 3.5mm हेडफोन जैक का गायब होना है। मैकबुक नियो में हेडफोन जैक दिया गया है, इसलिए ऑडियो केबल इस्तेमाल करने वाले यूजर्स के लिए डेल का यह कदम थोड़ा निराशाजनक हो सकता है। इसके बावजूद, दोनों तरफ उच्च गुणवत्ता वाले पोर्ट्स देकर कंपनी ने केबल मैनेजमेंट को बहुत आसान बना दिया है।
स्पीकर साउंड, 1080p वेबकैम और बायोमेट्रिक सुरक्षा
ऑडियो क्वालिटी की बात करें तो डेल एक्सपीएस 13 के स्पीकर्स को बहुत शानदार तो नहीं कहा जा सकता, लेकिन कंपनी ने इसमें 8 वॉट के कुल आउटपुट के साथ दो ट्विटर्स शामिल किए हैं। इनकी आवाज की गुणवत्ता और लाउडनेस मैकबुक नियो के बराबर ही ठहरती है। दैनिक वीडियो कॉलिंग और ऑनलाइन मीटिंग्स के लिए यह साउंड आउटपुट काफी रहता है।
वेबकैम के मोर्चे पर भी स्थिति कुछ ऐसी ही है। इसमें 1080p रेजोल्यूशन वाला फ्रंट कैमरा दिया गया है, जो साफ और स्पष्ट वीडियो क्वालिटी प्रदान करता है। इसके साथ ही, डेल ने विंडोज हेलो लॉगिन के लिए एक अलग इंफ्रारेड (IR) कैमरा भी जोड़ा है। इसकी मदद से यूजर्स बिना पासवर्ड टाइप किए चेहरा दिखाकर तुरंत सिस्टम में लॉगिन कर सकते हैं। सुरक्षा और सुविधा के लिहाज से यह आईआर कैमरा एक बहुत ही उपयोगी फीचर साबित होता है।
प्रोसेसर की परफॉर्मेंस और ऑल-डे बैटरी लाइफ
डेल एक्सपीएस 13 में इंटेल कोर 5 320 प्रोसेसर का इस्तेमाल किया गया है। अगर इसके प्रदर्शन की तुलना मैकबुक नियो में मिलने वाले A18 Pro चिप से की जाए, तो कोर 5 320 की सिंगल-कोर परफॉर्मेंस और ग्राफिक्स पावर थोड़ी कम बैठती है। लेकिन जब बात मल्टी-कोर टास्किंग की आती है, तो यह प्रोसेसर मैकबुक नियो के चिपसेट के मुकाबले काफी ज्यादा ताकतवर साबित होता है। भारी एप्लीकेशन चलाने और बैकग्राउंड प्रोसेस संभालने में मल्टी-कोर क्षमता साफ महसूस होती है।
लैपटॉप की बैटरी लाइफ भी रोजमर्रा के इस्तेमाल के लिए पूरी तरह व्यावहारिक है। हालांकि यह मैकबुक नियो के बराबर लंबी बैटरी लाइफ नहीं दे पाता, लेकिन फिर भी चार्जर से दूर रहकर पूरा दिन आसानी से काम निकाला जा सकता है। लोकल वीडियो प्लेबैक टेस्ट में इस डिवाइस ने लगातार 15 घंटे तक का रनटाइम दिया, जो ट्रैवल करने वाले पेशेवरों और छात्रों के लिए एक बहुत ही संतोषजनक आंकड़ा है।
700 डॉलर की बेस प्राइस और 8 GB रैम की गंभीर समस्या
डेल इस प्रीमियम डिजाइन वाले लैपटॉप को 700 डॉलर (लगभग $699) की शुरुआती कीमत पर बेच रहा है। लेकिन इस कम कीमत के पीछे एक बड़ा पेंच छिपा है, जो इसकी मेमोरी से जुड़ा है। टेस्ट किए गए 700 डॉलर वाले बेस वेरिएंट में कंपनी केवल 8 GB की RAM दे रही है। आजकल 500 डॉलर से कम कीमत वाले बजट विंडोज लैपटॉप्स में भी 16 GB रैम मिलने लगी है, ऐसे में 700 डॉलर की श्रेणी में 8 GB रैम मिलना काफी अजीब और चिंताजनक लगता है। बिल्ड क्वालिटी, कीबोर्ड, ट्रैकपैड और डिस्प्ले के मामले में तो यह लैपटॉप 700 डॉलर में बहुत प्रीमियम लगता है, लेकिन रैम के लिहाज से यह सौदा महंगा साबित होता है।
स्टोरेज की बात करें तो डेल ने अच्छी बात यह रखी है कि सभी मॉडल्स में 512 GB की इनबिल्ट स्टोरेज दी गई है। हालांकि शुरुआत में कंपनी ने दावा किया था कि इसे 1 TB तक के स्टोरेज विकल्प के साथ कॉन्फ़िगर किया जा सकेगा, लेकिन फिलहाल बाजार में यह अधिकतम 512 GB स्टोरेज तक ही सीमित है।
विंडोज 11 के बैकग्राउंड टास्क और रैम की सीमाएं
कुछ लोगों का मानना हो सकता है कि साधारण काम के लिए 8 GB रैम पर्याप्त है, क्योंकि पांच साल पहले तक इस बजट में 8 GB ही स्टैंडर्ड हुआ करता था। परंतु आज की तारीख में विंडोज 11 ऑपरेटिंग सिस्टम बहुत अधिक मेमोरी की मांग करता है। जब डेल एक्सपीएस 13 के 8 GB वेरिएंट को बिना कोई ऐप खोले बिल्कुल खाली यानी आइडल स्थिति में रखा जाता है, तब भी बैकग्राउंड में चल रही विंडोज प्रोसेस कुल उपलब्ध मेमोरी का 80 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा खुद ही इस्तेमाल कर लेती हैं।
यदि माइक्रोसॉफ्ट एज के बैकग्राउंड टास्क्स को जबरन बंद किया जाए, तब भी रैम की खपत घटकर केवल 70 से 75 प्रतिशत तक ही नीचे आती है। अकेले विंडोज सर्च प्रोसेस ही हर समय 150 से 190 मेगाबाइट रैम घेरे रहती है। आजकल ऑपरेटिंग सिस्टम में कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी AI से जुड़े नए फीचर्स लगातार जोड़े जा रहे हैं। ये एआई फीचर्स बैकग्राउंड में लगातार एक्टिव रहते हैं, जिससे रैम की भारी खपत होती है। यही वजह है कि माइक्रोसॉफ्ट खुद नए लैपटॉप्स में 16 GB रैम को न्यूनतम मानक बनाने पर जोर दे रहा है।
क्रोम ब्राउज़िंग और मल्टीटास्किंग में लैग का अनुभव
व्यावहारिक इस्तेमाल के दौरान गूगल क्रोम ब्राउज़र में केवल 10 टैब्स खोलते ही इस 8 GB वाले लैपटॉप की रैम यूसेज 95 प्रतिशत से ऊपर स्पाइक करने लगती है। अगर आप बैकग्राउंड में एक यूट्यूब वीडियो प्ले कर दें और साथ में 4-5 वेब पेज खुले रखें, तो सिस्टम 100 प्रतिशत रैम कंजप्शन तक पहुंच जाता है। इसके नतीजे के तौर पर स्क्रीन पर साफ तौर पर रुकावट और लैग दिखाई देने लगता है।
यदि 300 डॉलर की कीमत वाला कोई बजट लैपटॉप कुछ ब्राउज़र टैब्स खोलने पर धीमा पड़े, तो समझ में आता है। लेकिन 700 डॉलर खर्च करने के बाद अगर कोई लैपटॉप हल्का काम करने में भी अटकने लगे, तो उसकी सिफारिश करना मुश्किल है। चाहे इसका डिजाइन कितना भी स्लिम और खूबसूरत क्यों न हो, यह 8 GB वाला मॉडल सिर्फ उन लोगों के लिए ही सही है जिन्हें इंटरनेट सर्फिंग या डॉक्यूमेंट देखने जैसे बहुत ही मामूली काम करने होते हैं। पूरे दिन के मुख्य कंप्यूटर के रूप में इसे खरीदना एक गलत फैसला होगा।
एप्पल मैकबुक नियो से रैम मैनेजमेंट की तुलना
जब इसी तरह के मल्टीटास्किंग टेस्ट मैकबुक नियो के 8 GB मॉडल पर किए गए, तो परिणाम काफी अलग रहे। यद्यपि एप्पल का यह दावा अतिशयोक्ति भरा लगता है कि मेक का 8 GB रैम विंडोज के 16 GB के बराबर होता है, लेकिन वास्तविकता यह जरूर है कि मैकओएस का मेमोरी मैनेजमेंट विंडोज 11 की तुलना में ज्यादा कुशल है। समान क्रोम टैब्स और यूट्यूब वीडियो चलाने पर मैकबुक नियो में डेल एक्सपीएस 13 के मुकाबले काफी कम लैग और झटके देखने को मिलते हैं। डेल सीधे तौर पर अपने इस लैपटॉप से मैकबुक नियो को चुनौती देना चाहता है, इसलिए रैम के मामले में यह अंतर काफी मायने रखता है।
16 GB रैम वाला अपग्रैडेड वेरिएंट: 1,000 डॉलर से कम में सबसे बेहतरीन चुनाव
डेल एक्सपीएस 13 की सबसे बड़ी ताकत इसकी अपग्रेड करने की सुविधा में छिपी है। एप्पल के विपरीत, डेल 16 GB रैम वाला मॉडल भी ऑफर करता है। बेस मॉडल से 200 डॉलर ज्यादा देकर 899 डॉलर (लगभग $900) में 16 GB रैम वेरिएंट खरीदा जा सकता है। यह 200 डॉलर का इजाफा इस लैपटॉप के पूरे अनुभव को निराशाजनक से बदलकर बेहद शानदार और टिकाऊ बना देता है।
संक्षेप में कहा जाए तो 699 डॉलर वाले 8 GB रैम वेरिएंट को खरीदना पैसे की बर्बादी साबित हो सकता है। लेकिन अगर आप अपना बजट बढ़ाकर 900 डॉलर करते हैं और 16 GB रैम वाला डेल एक्सपीएस 13 चुनते हैं, तो आपको 1,000 डॉलर से कम बजट में मिलने वाला शायद सबसे बेहतरीन लैपटॉप मिल जाता है। यह मैकबुक नियो के 512 GB स्टोरेज मॉडल से लगभग 100 डॉलर महंगा जरूर है, लेकिन लगभग हर मापने योग्य पैमाने पर यह मैकबुक से कहीं ज्यादा ताकतवर और बेहतर लैपटॉप साबित होता है।



















