आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दुनिया में इंसानों की जगह काम निपटाने वाले एजेंट्स की चर्चा चरम पर है, लेकिन वास्तविक उपयोग के स्तर पर उपभोक्ता अभी भी पारंपरिक तरीकों पर ही भरोसा कर रहे हैं। राइड शेयरिंग और फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म उबर के तीसरी तिमाही के वित्तीय नतीजों के दौरान सामने आए आंकड़ों ने यह साफ कर दिया है कि स्वायत्त सॉफ्टवेयर की मदद से टैक्सी मंगाना फिलहाल आम जनता की आदत का हिस्सा नहीं बन सका है। कंपनी के सबसे व्यस्त कामकाजी दिनों में भी एआई के जरिए होने वाली बुकिंग्स की संख्या चौंकाने वाली हद तक मामूली दर्ज की गई।
हैलोवीन के व्यस्त सप्ताह में केवल चार राइड्स
अक्टूबर के सबसे व्यस्त समय यानी हैलोवीन वाले सप्ताह के दौरान प्लेटफॉर्म पर भारी भीड़ देखी गई थी। इस पूरे हफ्ते के दौरान उबर और उबर ईट्स दोनों सेवाओं को मिलाकर कुल 320 मिलियन यानी 32 करोड़ ट्रिप्स और फूड ऑर्डर्स पूरे किए गए। इसके बावजूद, इतने बड़े पैमाने पर हुए कामकाज के बीच महज चार राइड्स ऐसी रहीं जिन्हें किसी एआई एजेंट के जरिए बुक किया गया था। इस भारी अंतर ने यह स्पष्ट कर दिया कि रोजमर्रा की यात्रा के लिए लोग अब भी स्मार्टफोन ऐप पर खुद ही विकल्प चुनना पसंद कर रहे हैं।
उबर ईट्स पर फूड ऑर्डरिंग का हाल
सवारी बुक करने की तुलना में खाने का ऑर्डर देने के मामले में एआई एजेंट्स का इस्तेमाल थोड़ा बेहतर जरूर रहा, लेकिन कुल कारोबार के सामने वह भी नगण्य साबित हुआ। उबर के मुख्य वित्तीय अधिकारी बालाजी कृष्णमूर्ति ने वित्तीय विश्लेषकों को जानकारी दी कि उसी हैलोवीन वाले सप्ताह के दौरान उबर ईट्स पर एआई एजेंट के जरिए सिर्फ 500 फूड ऑर्डर्स दर्ज किए गए। कंपनी के कुल 32 करोड़ ऑर्डर्स और ट्रिप्स के आकार को देखते हुए 500 का यह आंकड़ा तकनीकी बदलाव की धीमी गति को दर्शाता है।
कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी दारा खोसरोशाही ने इस सुस्त शुरुआत पर टिप्पणी करते हुए कहा, "यह बहुत शुरुआती चरण है और हमें अब तक बेहद सीमित रुझान देखने को मिला है।" उन्होंने आगे यह भी जोड़ा कि आने वाले समय में वे इस तरह के ऑर्डर्स में बढ़ोतरी की उम्मीद करते हैं।
उद्योग में बढ़ता निवेश और वास्तविक अपनाने की रफ्तार
उपभोक्ताओं की यह उदासीनता ऐसे समय सामने आई है जब स्वायत्त टूल्स विकसित करने वाली कंपनियों में भारी पूंजी लगाई जा रही है। व्यक्तिगत एआई के क्षेत्र में काम करने वाले स्टार्टअप्स की बाढ़ आ गई है, जिसमें पिछले साल स्थापित हुआ इंस्टिंक्ट शामिल है। इस स्टार्टअप ने हाल ही में 10 अरब डॉलर के वैल्यूएशन पर फंडिंग जुटाई है। इसके अलावा, मेटा का म्यूज ऐप पिछले महीने एप्पल के अमेरिकी ऐप स्टोर में पहले पायदान पर पहुंच गया था और उसके उपयोगकर्ताओं की तादाद 10 मिलियन यानी 1 करोड़ के पार चली गई। उस ऐप के संबंध में यह कहा गया था कि कई लोग कारोबारी लेनदेन और खरीदारी के लिए उसका सहारा ले रहे हैं। ओपनएआई, एंथ्रोपिक, गूगल और स्पेसएक्सएआई (ग्रोक) जैसी प्रमुख फर्में भी अपने-अपने एजेंट्स पेश कर चुकी हैं, जबकि कई छोटे स्टार्टअप्स भी इस होड़ में शामिल हैं।
हालांकि, सार्वजनिक शेयर बाजार में सूचीबद्ध कंपनियों के आंकड़े बताते हैं कि इस तकनीक को सामान्य व्यवहार में तब्दील होने में लंबा सफर तय करना बाकी है। फूड डिलीवरी फर्म डोरडैश ने भी अपनी अर्निंग्स कॉल में कुछ इसी तरह की स्थिति बयां की थी। डोरडैश के मुताबिक, अब तक उसे एआई एजेंट्स से कुछ सौ ऑर्डर्स ही प्राप्त हुए हैं, क्योंकि अधिकांश उपभोक्ता सीधे उसके मोबाइल एप्लिकेशन से ही खरीदारी कर रहे हैं।
ऐप की रफ्तार और भविष्य की संभावनाएं
इस धीमी रफ्तार के पीछे एक बड़ा कारण मौजूदा ऐप्स की सरलता और गति भी है। दारा खोसरोशाही ने रेखांकित किया कि उबर ऐप से राइड बुक करने में औसतन महज 50 सेकंड का समय लगता है। वहीं, अपनी पसंद का खाना दोबारा मंगाने के लिए केवल 90 सेकंड की जरूरत होती है। जब कोई व्यक्ति डेढ़ मिनट से भी कम समय में अपना काम खुद कर सकता है, तो किसी बाहरी एआई टूल को निर्देश देने में कोई खास समय नहीं बचता।
कम लेन-देन के बावजूद, कंपनी प्रबंधन लंबी अवधि के लिए इस दिशा में सकारात्मक रुख बनाए हुए है। खोसरोशाही ने कहा, "हमें लगता है कि यह हमारे प्लेटफॉर्म तक पहुंचने का एक और अवसर है।" उनका मानना है कि यह पूरे इकोसिस्टम में मांग बढ़ाने के लिए सकारात्मक साबित होगा। मौजूदा समय में बाजार में लगभग आठ बड़े एआई असिस्टेंट्स सक्रिय हैं और खोसरोशाही को उम्मीद है कि वक्त के साथ यह संख्या बढ़कर 10 से ज्यादा हो जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि एआई सिस्टम बनाने वाली हर बड़ी कंपनी उनके साथ संवाद कर रही है।
















