देश भर में चर्चित ऑनलाइन गेमिंग और मनी लॉन्ड्रिंग के एक बड़े मामले में केंद्रीय जांच एजेंसी ने शिकंजा कस दिया है। प्रवर्तन निदेशालय के बेंगलुरु जोनल कार्यालय ने रमीकल्चर ऐप और उससे जुड़े अन्य मामलों में धनशोधन निवारण अधिनियम के तहत बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। इस कार्रवाई के तहत कुल 442.35 करोड़ रुपये मूल्य की चल और अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क किया गया है। अटैच की गई इन संपत्तियों में फिक्स्ड डिपॉजिट में जमा बड़ी रकम, कई कमर्शियल दुकानें, एक लग्जरी विला और कई रिहायशी अचल संपत्तियां शामिल हैं। जांच में सामने आया है कि ये सारी संपत्तियां गेम्सक्राफ्ट टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड के शेयरधारकों के परिवार के सदस्यों, निजी फैमिली ट्रस्ट और उनसे जुड़ी अन्य संस्थाओं के नाम पर दर्ज थीं।
छापेमारी और पूर्व की गिरफ्तारियों का सिलसिला
केंद्रीय एजेंसी द्वारा यह पूरी जांच तेलंगाना राज्य में कानून प्रवर्तन एजेंसियों की तरफ से दर्ज की गई कई एफआईआर के आधार पर शुरू की गई है। इन मामलों में भारतीय न्याय संहिता, 2023 के तहत धोखाधड़ी से जुड़े गंभीर आरोप लगाए गए हैं, जो धनशोधन निवारण अधिनियम के दायरे में आते हैं। इस जांच को आगे बढ़ाते हुए एजेंसी ने इस साल 7 मई से 14 मई और फिर 20 जून से 21 जून के बीच गेम्सक्राफ्ट टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड के मुख्य कार्यालयों के साथ-साथ इसके निर्देशकों और प्रमुख कर्मचारियों के आवासों पर बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान चलाया था। इन छापों के दौरान कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, डिजिटल उपकरण और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड बरामद किए गए थे, जो जांच में अहम सबूत बने हैं। इसी मामले की कड़ियों को जोड़ते हुए एजेंसी ने मई के महीने में ही गेम्सक्राफ्ट के तीन संस्थापकों को गिरफ्तार भी किया था।
कई लोकप्रिय ब्रांड्स के जरिए संचालित हो रहे थे गेम
जांच के दौरान यह बात भी सामने आई है कि गेम्सक्राफ्ट टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड और रमीटाइम टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड जैसी कंपनियां विभिन्न मोबाइल एप्लीकेशन के माध्यम से ऑनलाइन रियल मनी गेम्स और टूर्नामेंट का संचालन कर रही थीं। इन गतिविधियों को अंजाम देने के लिए रमीकल्चर, रमीप्राइम, प्लेशिप और रमीटाइम जैसे कई प्रसिद्ध ब्रांड्स का इस्तेमाल किया जा रहा था। इन सभी प्लेटफार्मों के माध्यम से देश भर के विभिन्न हिस्सों में बड़े पैमाने पर ऑनलाइन गेमिंग का कारोबार फैलाया गया था, जिसके जरिए करोड़ों लोगों को अपने जाल में फंसाया जा रहा था।
करोड़ों यूजर्स और प्रतिबंधित राज्यों में पहुंच
जाउन एजेंसियों की पड़ताल में खुलासा हुआ है कि इन सभी गेमिंग प्लेटफॉर्म्स के देश भर में लगभग तीन करोड़ उपयोगकर्ता जुड़ चुके थे। खास बात यह है कि इनमें से एक बड़ी संख्या उन राज्यों के यूजर्स की थी जहां ऑनलाइन रियल-मनी गेमिंग पर कानूनी रूप से प्रतिबंध लगा हुआ है, जैसे कि तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु। ये कंपनियां उपयोगकर्ताओं द्वारा गेम में लगाए जाने वाले दांव की कुल राशि पर 10 प्रतिशत से लेकर 15 प्रतिशत तक भारी-भरकम प्लेटफॉर्म कमीशन वसूलती थीं, जिससे उन्होंने अकूत अवैध कमाई की है।
बॉट्स के जरिए उपयोगकर्ताओं के साथ धोखाधड़ी
इस पूरे मामले का सबसे गंभीर पहलू यह सामने आया है कि गेमिंग प्लेटफॉर्म्स की ओर से हमेशा यह दावा किया जाता था कि उनके सिस्टम पूरी तरह से पारदर्शी, निष्पक्ष और ऑटोमेटेड खिलाड़ियों यानी बॉट्स से मुक्त हैं। इसके बावजूद इन कंपनियों ने भोले-भाले उपयोगकर्ताओं की जानकारी या उनकी सहमति के बिना चुपचाप उनके खिलाफ बॉट्स यानी स्वचालित प्रोग्राम और एल्गोरिदम का इस्तेमाल किया। इन बॉट्स के प्रयोग के कारण गेम खेलने वाले आम लोगों को अपनी मेहनत की कमाई का भारी नुकसान उठाना पड़ा, जबकि कंपनियों ने इसके जरिए अवैध रूप से भारी मुनाफा कमाया।















