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गन्ने की खेती से प्रति बीघा 25 हजार का शुद्ध मुनाफा, बहराइच के किसान दुर्गेश कुमार सिंह का हिट फॉर्मूलाव्यापार
13 घंटे पहले· 1

गन्ने की खेती से प्रति बीघा 25 हजार का शुद्ध मुनाफा, बहराइच के किसान दुर्गेश कुमार सिंह का हिट फॉर्मूला

बहराइच के टिकुरी गांव के किसान दुर्गेश कुमार सिंह ने गन्ने की फसल से भारी मुनाफा कमाने के वैज्ञानिक तरीके साझा किए हैं। सही समय पर सिंचाई, निराई-गुड़ाई और बीमारियों से बचाव करके किसान आसानी से प्रति बीघा 25,000 रुपये तक की शुद्ध कमाई कर सकते हैं।

उत्तर प्रदेश का बहराइच जिला कृषि के लिहाज से एक महत्वपूर्ण क्षेत्र है, और यहां के टिकुरी गांव के रहने वाले दुर्गेश कुमार सिंह पिछले एक दशक से गन्ने की सफल खेती कर रहे हैं। गन्ने को एक प्रमुख नकदी फसल माना जाता है, जो किसानों की आर्थिक स्थिति को पूरी तरह से बदल सकती है। दस सालों के अपने लंबे और व्यावहारिक अनुभव के आधार पर दुर्गेश कुमार सिंह ने उन तमाम बारीकियों को साझा किया है, जो एक साधारण गन्ने की फसल को बंपर मुनाफे के सौदे में बदल सकती हैं। बुवाई के शुरुआती दिनों से लेकर कटाई तक की सही देखभाल, लागत को नियंत्रित करने के तरीके और भयानक बीमारियों से फसल को बचाने के उनके उपाय उन सभी किसानों के लिए एक गाइड की तरह हैं जो कृषि से अपनी आमदनी बढ़ाना चाहते हैं।

बुवाई के बाद नमी और निराई-गुड़ाई का महत्व

गन्ने की बुवाई कर देना ही काफी नहीं है, बल्कि उसके बाद की देखभाल सबसे ज्यादा मायने रखती है। कृषि विशेषज्ञों और अनुभवी किसानों का स्पष्ट मानना है कि खेत में गन्ने की बुवाई के ठीक बाद पर्याप्त नमी का होना एक सफल फसल की पहली शर्त है। जब गन्ने की पोरियों से अंकुरण शुरू होता है, तो उस नाजुक समय में खेत को सूखने नहीं देना चाहिए। पौधों के तेजी से विकास के लिए समय-समय पर हल्की सिंचाई करते रहना बहुत जरूरी है। पानी के साथ-साथ खेत को खरपतवार से मुक्त रखना भी एक बड़ी चुनौती होती है। अगर खेत में घास और जंगली पौधे उग आते हैं, तो वे मिट्टी में मौजूद उन पोषक तत्वों को सोख लेते हैं जो असल में गन्ने के पौधों को मिलने चाहिए। इससे मिट्टी की ताकत बंट जाती है और मुख्य फसल कमजोर रह जाती है। इस समस्या से निपटने के लिए समय पर निराई-गुड़ाई करना अनिवार्य है। निराई-गुड़ाई करने से न सिर्फ अवांछित पौधे खत्म होते हैं, बल्कि मिट्टी भुरभुरी हो जाती है, जिससे जड़ों तक पर्याप्त हवा पहुंचती है और गन्ने की पकड़ मजबूत होती है।

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लागत से लेकर शुद्ध मुनाफे तक का पूरा गणित

अगर व्यावसायिक नजरिए से देखा जाए तो गन्ने की खेती बहुत ही फायदे का काम है, बशर्ते इसे सही तरीके से किया जाए। दुर्गेश कुमार सिंह के अनुसार एक बीघा गन्ने की खेती में बीज की खरीद, खाद का उपयोग, खेत की जुताई, सिंचाई की व्यवस्था और अंत में कटाई तक के सभी खर्चों को मिला लिया जाए, तो किसान को लगभग 10,000 रुपये से लेकर 12,000 रुपये तक का कुल निवेश करना पड़ता है। यदि किसान ने वैज्ञानिक तरीके से देखभाल की है और मौसम ने साथ दिया है, तो एक बीघे के खेत से औसतन 80 क्विंटल से लेकर 100 क्विंटल तक गन्ने की शानदार पैदावार हासिल की जा सकती है। बाजार के मौजूदा भाव या चीनी मिलों द्वारा तय किए गए रेट के अनुसार जब इस गन्ने को बेचा जाता है, तो किसान को आसानी से 30,000 रुपये से लेकर 35,000 रुपये तक की कुल आमदनी प्राप्त होती है। जब हम इस कुल आमदनी में से 10,000 से 12,000 रुपये की शुरुआती लागत को निकाल देते हैं, तो प्रति बीघा 20,000 रुपये से लेकर 25,000 रुपये तक का शुद्ध मुनाफा किसान की जेब में आता है। जो किसान बड़े पैमाने पर खेती करते हैं, उनका मुनाफा और भी अधिक हो जाता है।

लाल सड़न रोग और तना छेदक सूंडी से बचाव

फसल की अच्छी बढ़त के साथ-साथ उसे बीमारियों से बचाना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। गन्ने की खेती में सबसे बड़ा खतरा दो प्रमुख बीमारियों से होता है जिसमें लाल सड़न रोग और तना छेदक सूंडी का हमला शामिल है। लाल सड़न रोग गन्ने के लिए कैंसर के समान है; इसमें गन्ने का तना अंदर से पूरी तरह लाल हो जाता है और हरा-भरा पौधा धीरे-धीरे सूखकर बर्बाद होने लगता है। इस जानलेवा बीमारी से बचने का सबसे पहला उपाय यह है कि किसान हमेशा बीमारी-रहित और स्वस्थ बीजों का ही चुनाव करें। इसके अलावा बुवाई करने से पहले बीज का शोधन करना कभी नहीं भूलना चाहिए। वहीं दूसरी तरफ जब फसल अपनी शुरुआती अवस्था में होती है, तो उस पर तना छेदक सूंडी और अन्य कीटों का हमला होने की आशंका बनी रहती है। इस हमले को रोकने के लिए कृषि विशेषज्ञों की सलाह से सही कीटनाशक दवाओं का छिड़काव समय-समय पर करते रहना चाहिए। इसके लिए किसान स्थानीय कृषि विज्ञान केंद्र से भी मदद ले सकते हैं।

जलभराव की समस्या और फसल की रिकवरी

मानसून के सीजन में लगातार होने वाली बारिश गन्ने के किसानों के लिए जलभराव की मुसीबत लेकर आती है। खेत में पानी भर जाना एक आम बात है, लेकिन अगर यह पानी कई दिनों तक रुका रह जाए, तो यह फसल के लिए खतरनाक हो सकता है। ज्यादा समय तक पानी जमा रहने की वजह से गन्ने की जड़ें गलने लगती हैं और पूरी फसल बेहद कमजोर पड़ जाती है। जलभराव होने पर किसान को सबसे पहले खेत से तुरंत पानी निकालने की व्यवस्था करनी चाहिए। इसके बाद जब बारिश रुक जाए और धूप निकल आए, तो फसल को वापस पुरानी स्थिति में लाने के लिए एक रिकवरी प्रक्रिया अपनानी चाहिए। खेत से पानी बाहर हो जाने के बाद गन्ने की जड़ों के पास हल्की मात्रा में यूरिया या जिंक का छिड़काव करना चाहिए। यह खाद पौधों को तुरंत पोषण प्रदान करती है, जिससे कमजोर फसल में एक बार फिर से हरियाली लौट आती है और पौधे तेजी से बढ़ने लगते हैं।

सवाल-जवाब

एक बीघा गन्ने की खेती में कितनी लागत आती है?
एक बीघा गन्ने की खेती में बीज, खाद, जुताई, सिंचाई और कटाई को मिलाकर कुल 10,000 से 12,000 रुपये तक का खर्च आता है।
गन्ने की खेती से प्रति बीघा कितना मुनाफा कमाया जा सकता है?
लागत निकालने के बाद किसान एक बीघे से आसानी से 20,000 रुपये से लेकर 25,000 रुपये तक का शुद्ध मुनाफा कमा सकते हैं।
गन्ने की फसल के लिए सबसे खतरनाक बीमारियां कौन सी हैं?
गन्ने की फसल में मुख्य रूप से लाल सड़न रोग (रेड रॉट) और तना छेदक सूंडी का हमला सबसे ज्यादा विनाशकारी होता है।
बारिश के मौसम में गन्ने के खेत में जलभराव होने पर क्या करना चाहिए?
जलभराव होने पर तुरंत जल निकासी की व्यवस्था करनी चाहिए और धूप निकलने पर जड़ों के पास हल्की यूरिया या जिंक का छिड़काव करना चाहिए।
लाल सड़न रोग से बचाव का क्या तरीका है?
इससे बचने के लिए हमेशा स्वस्थ और प्रमाणित बीज बोने चाहिए और बुवाई से पहले बीज का शोधन जरूर करना चाहिए।
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