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गाय रोज देगी 8-12 लीटर दूध, सरगुजा में डॉ. सलमा मिंज ने बताया सही तरीकाव्यापार
6 सित॰ 2026, 12:22 am (7 दिन पहले)· 2

गाय रोज देगी 8-12 लीटर दूध, सरगुजा में डॉ. सलमा मिंज ने बताया सही तरीका

छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में पशुपालन विभाग की डॉ. सलमा मिंज ने पशुपालकों को हरा चारा, मिनरल मिक्सचर, नियमित कृमिनाशक दवा और अच्छी नस्ल के पशुओं के चयन जैसे उपाय सुझाए हैं, जिनसे साहीवाल जैसी गाय रोजाना 8 से 12 लीटर तक दूध दे सकती है।

छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में दूध का कारोबार करने वाले किसानों के लिए राहत भरी खबर है। जिला प्रशासन और पशु चिकित्सा विशेषज्ञों ने मिलकर कुछ ऐसे आसान तरीके सुझाए हैं, जिन्हें अपनाकर पशुपालक अपनी गायों और भैंसों से मिलने वाले दूध की मात्रा काफी हद तक बढ़ा सकते हैं। इससे न सिर्फ उनकी डेयरी का मुनाफा बढ़ेगा, बल्कि वे आर्थिक रूप से भी आत्मनिर्भर बन सकेंगे।

वैज्ञानिक तरीके अपनाना क्यों जरूरी

पशुपालन विभाग की डॉ. सलमा मिंज का कहना है कि सिर्फ पुराने पारंपरिक तरीकों के भरोसे दूध उत्पादन बढ़ाना मुश्किल है। उनके मुताबिक हरा चारा, मिनरल मिक्सचर, समय पर कृमिनाशक दवा और अच्छी नस्ल के पशुओं का चुनाव, ये चार बातें मिलकर ही असली फर्क ला सकती हैं। इसके अलावा कुछ खास कीटनाशकों के इस्तेमाल की सलाह भी दी गई है, जिनसे दूध की मात्रा बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

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सिर्फ हरा चारा काफी नहीं, मिनरल मिक्सचर भी जरूरी

डॉ. मिंज बताती हैं कि दूध बढ़ाने में हरे चारे का बहुत बड़ा हाथ होता है, लेकिन अकेले हरा चारा खिलाने से वह फायदा नहीं मिलता जिसकी उम्मीद पशुपालक करते हैं। पशुओं को हरे चारे के साथ-साथ मिनरल मिक्सचर भी नियमित रूप से देना चाहिए। जब पशु को यह संतुलित आहार मिलता है, तो उसका स्वास्थ्य बेहतर होता है और इसका सीधा असर दूध उत्पादन में तेज बढ़ोतरी के तौर पर दिखता है।

डी-वॉर्मिंग यानी कृमिनाशक दवा को नजरअंदाज न करें

पशुओं को बीमारियों से बचाने और उनका पाचन तंत्र दुरुस्त रखने के लिए समय-समय पर कृमिनाशक दवा देना जरूरी है, जिसे डी-वॉर्मिंग कहा जाता है। डॉ. सलमा के मुताबिक सामान्य तौर पर हर तीन महीने में यह दवा दी जानी चाहिए। हालांकि गर्भवती पशुओं के मामले में खास सावधानी बरतनी होगी। गर्भवती पशु को कोई भी दवा देने से पहले किसी योग्य पशु चिकित्सक की सलाह जरूर लेनी चाहिए, वरना नुकसान हो सकता है।

नस्ल तय करती है दूध की मात्रा

डेयरी व्यवसाय में सफलता की सबसे बड़ी कुंजी पशु की नस्ल ही है। डॉ. सलमा के अनुसार गाय या भैंस कितना दूध देगी, यह उसकी नस्ल के साथ-साथ देखभाल और आहार पर भी काफी हद तक निर्भर करता है। स्थानीय नस्ल के पशुओं से बहुत ज्यादा दूध की उम्मीद रखना ठीक नहीं है, इसलिए पशुपालकों को अच्छी नस्ल के पशु ही चुनने चाहिए।

कौन सी नस्ल दिलाएगी ज्यादा दूध

भैंसों में मुर्रा नस्ल को अच्छी दूध क्षमता के लिए जाना जाता है। वहीं गायों में गिर, साहीवाल, जर्सी और रेड सिंधी जैसी नस्लें भी पशुपालक अपनी जरूरत और इलाके की परिस्थितियों के हिसाब से चुन सकते हैं। डॉ. सलमा के मुताबिक साहीवाल जैसी अच्छी नस्ल की गाय अगर उसे सही रखरखाव और आहार मिले तो वह रोजाना 8-12 लीटर तक दूध दे सकती है। हालांकि असली उत्पादन पशु की देखभाल और बाकी परिस्थितियों पर भी निर्भर करता है।

सवाल-जवाब

सरगुजा में पशुपालकों को यह सलाह किसने दी है?
पशुपालन विभाग की डॉ. सलमा मिंज ने जिला प्रशासन के साथ मिलकर पशुपालकों को यह सलाह दी है।
दूध बढ़ाने के लिए किन चीजों की जरूरत बताई गई है?
हरा चारा, मिनरल मिक्सचर, नियमित कृमिनाशक दवा और अच्छी नस्ल के पशुओं का चयन जरूरी बताया गया है।
कृमिनाशक दवा कितने-कितने समय पर देनी चाहिए?
आमतौर पर हर तीन महीने में पशुओं को कृमिनाशक दवा दी जानी चाहिए।
गर्भवती पशु को दवा देने से पहले क्या सावधानी बरतनी चाहिए?
गर्भवती पशु को कोई भी दवा देने से पहले किसी योग्य पशु चिकित्सक की सलाह जरूर लेनी चाहिए।
कौन सी नस्ल की गाय सबसे ज्यादा दूध दे सकती है?
साहीवाल नस्ल की गाय को सही रखरखाव और आहार मिलने पर वह रोजाना 8 से 12 लीटर तक दूध दे सकती है।
भैंसों में कौन सी नस्ल दूध उत्पादन के लिए अच्छी मानी जाती है?
भैंसों में मुर्रा नस्ल को अच्छी दूध उत्पादन क्षमता के लिए जाना जाता है।
गायों में कौन-कौन सी अन्य नस्लें अच्छी मानी जाती हैं?
गिर, साहीवाल, जर्सी और रेड सिंधी जैसी नस्लें भी अच्छी दूध उत्पादन क्षमता के लिए जानी जाती हैं।
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