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ग्लोबल मार्केट में क्रूड गिरने के बाद भी देश में क्यों नहीं कम हो रहे ईंधन के दाम? हरदीप सिंह पुरी ने दिया सीधा जवाबव्यापार
2 घंटे पहले· 2

ग्लोबल मार्केट में क्रूड गिरने के बाद भी देश में क्यों नहीं कम हो रहे ईंधन के दाम? हरदीप सिंह पुरी ने दिया सीधा जवाब

केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने स्पष्ट किया है कि सरकारी तेल कंपनियां अभी भी पश्चिम एशिया संकट के दौरान महंगे दाम पर खरीदे गए कच्चे तेल को प्रोसेस कर रही हैं, जिसके कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में मंदी के बावजूद पेट्रोल-डीजल की कीमतें तुरंत नहीं घटाई जा सकतीं।

अमित पटेलअमित पटेलबिज़नेस संवाददाता 3 मिनट पढ़ें AI के लिए
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अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई हालिया गिरावट के बाद से ही भारतीय उपभोक्ता पेट्रोल और डीजल के दामों में कटौती का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। इस मुद्दे पर जनता की उत्सुकता और उठते सवालों के बीच केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने स्थिति को पूरी तरह स्पष्ट किया है। उन्होंने बताया कि भले ही वैश्विक बाजार में क्रूड की कीमतें नीचे आ गई हैं, लेकिन हमारी सरकारी तेल विपणन कंपनियां (OMCs) अभी भी उस कच्चे तेल के स्टॉक को प्रोसेस करने में जुटी हैं जिसे पश्चिम एशिया में बढ़े भू-राजनीतिक तनाव और संकट के समय बहुत ऊंचे दामों पर खरीदा गया था।

तेल कंपनियों का भारी घाटा और वित्तीय स्थिति

देश के सामने वस्तुस्थिति रखते हुए केंद्रीय मंत्री ने तेल कंपनियों के वित्तीय आंकड़ों का एक बड़ा ब्योरा साझा किया। उन्होंने खुलासा किया कि जब पश्चिम एशिया में संकट गहराया हुआ था, तब आम भारतीय नागरिकों को वैश्विक महंगाई की मार से बचाना सरकार की प्राथमिकता थी। इस जिम्मेदारी को निभाते हुए सरकारी तेल कंपनियों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतों के बावजूद घरेलू बाजार में ईंधन को उसकी वास्तविक लागत से बहुत कम दामों पर बेचा।

इस राहतकारी नीति के कारण तेल कंपनियों के खातों पर भारी दबाव पड़ा। हरदीप सिंह पुरी द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, लागत से कम कीमत पर पेट्रोल, डीजल और LPG बेचने की वजह से 30 जून तक की अवधि में इन सरकारी कंपनियों को कुल ₹74,781 करोड़ का भारी-भरकम नुकसान झेलना पड़ा है। कंपनियों के इसी संचित घाटे की भरपाई करने और पहले के महंगे क्रूड ऑयल के स्टॉक को खपाने की मजबूरी के कारण तत्काल प्रभाव से खुदरा कीमतों में कटौती करना संभव नहीं हो पा रहा है।

वैश्विक संकट के बीच भारत में ईंधन की निर्बाध आपूर्ति

भारतीय ऊर्जा प्रबंधन की सफलता को रेखांकित करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि साल 2022 से लेकर साल 2026 के बीच भारत में ईंधन की कीमतों में बहुत ही मामूली वृद्धि हुई है। इस दौरान देश में पेट्रोल के दामों में केवल 5.58% और डीजल की कीमतों में सिर्फ 6.23% की ही बढ़ोतरी देखी गई। यह नियंत्रण इस बात का प्रमाण है कि देश के वित्तीय और प्रशासनिक तंत्र ने कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों के झटके को अपने ऊपर झेल लिया और इसका सीधा असर आम उपभोक्ताओं की जेब पर नहीं पड़ने दिया।

इसके साथ ही, उन्होंने इस बात पर भी संतोष जताया कि मार्च, अप्रैल, मई और जून के बेहद संवेदनशील और संकटपूर्ण महीनों में भी देश के किसी भी हिस्से में ईंधन की कोई कमी नहीं होने दी गई। पूरे भारत में पेट्रोल और डीजल की सप्लाई बिना किसी रुकावट के लगातार जारी रही, जिससे किसी भी पेट्रोल पंप पर न तो लंबी लाइनें देखने को मिलीं और न ही तेल का कोई सूखा पड़ा।

क्या भविष्य में सस्ते होंगे पेट्रोल और डीजल?

जब केंद्रीय मंत्री से सीधे तौर पर यह पूछा गया कि क्या निकट भविष्य में पेट्रोल और डीजल के दामों में कोई कटौती की जाएगी, तो उन्होंने सकारात्मक रुख अपनाते हुए उम्मीद की एक किरण दिखाई। हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें आने वाले कुछ हफ्तों तक इसी तरह निचले स्तर पर स्थिर बनी रहती हैं, तो घरेलू बाजार में कीमतों को घटाने पर विचार करना पूरी तरह से एक व्यावहारिक और वाजिब सवाल होगा।

उनके इस बयान से साफ संकेत मिलता है कि सरकार और OMCs वैश्विक बाजार के रुख पर लगातार नजर रख रही हैं। जैसे ही कंपनियां अपने पिछले वित्तीय घाटे से उबर जाएंगी और पुराने महंगे कच्चे तेल का स्टॉक समाप्त हो जाएगा, अंतरराष्ट्रीय बाजार में जारी मंदी का लाभ सीधे तौर पर देश की आम जनता तक पहुंचने का रास्ता साफ हो जाएगा।

इसका आप पर असर

  • वाहन मालिकों और आम उपभोक्ताओं के लिए: सरकारी तेल कंपनियों द्वारा ₹74,781 करोड़ के पिछले घाटे की भरपाई किए जाने के कारण अभी पेट्रोल-डीजल के दामों में तुरंत कमी नहीं होगी, लेकिन यदि वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें कुछ हफ्तों तक और कम रहीं तो जल्द ही राहत मिलने की पूरी उम्मीद है।

सवाल-जवाब

भारत में कच्चा तेल सस्ता होने के बाद भी पेट्रोल-डीजल के दाम क्यों नहीं घट रहे हैं?
सरकारी तेल कंपनियां वर्तमान में पश्चिम एशिया संकट के दौरान महंगे दाम पर खरीदे गए कच्चे तेल को प्रोसेस कर रही हैं और अपने पुराने वित्तीय नुकसान की भरपाई भी कर रही हैं।
पश्चिम एशिया संकट के दौरान भारतीय तेल कंपनियों को कितना नुकसान हुआ?
उपभोक्ताओं को महंगाई से बचाने के लिए लागत से कम दाम पर पेट्रोल, डीजल और LPG बेचने के कारण सरकारी तेल कंपनियों को 30 जून तक कुल ₹74,781 करोड़ का भारी नुकसान उठाना पड़ा।
साल 2022 से 2026 के बीच भारत में पेट्रोल और डीजल के दामों में कितनी बढ़ोतरी हुई?
इस अवधि के दौरान भारत में पेट्रोल की कीमतों में केवल 5.58% और डीजल की कीमतों में सिर्फ 6.23% की मामूली बढ़ोतरी दर्ज की गई।
भारतीय उपभोक्ताओं को ईंधन की कीमतों में कटौती की उम्मीद कब तक करनी चाहिए?
यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें अगले कुछ हफ्तों तक इसी तरह निचले स्तर पर बनी रहती हैं, तो घरेलू बाजार में कीमतों को घटाने पर विचार किया जाएगा।
वैश्विक ऊर्जा संकट के चरम समय में क्या भारत में ईंधन की कोई किल्लत हुई थी?
नहीं, मार्च, अप्रैल, मई और जून के संकटग्रस्त महीनों के दौरान पूरे देश में पेट्रोल और डीजल की सप्लाई बिना किसी रुकावट के पूरी तरह सामान्य बनी रही।
अमित पटेल
लेखक के बारे मेंअमित पटेलबिज़नेस संवाददाता दिल्ली
विशेषज्ञताबिज़नेस समाचार, वित्तीय बाज़ार, शेयर बाज़ार विश्लेषण, कॉर्पोरेट मामले, स्टार्टअप, उद्यमिता, आर्थिक रुझान, टेक्नोलॉजी बिज़नेस, निवेश, वैश्विक अर्थव्यवस्था

अमित पटेल एक बिज़नेस संवाददाता हैं जो वैश्विक बाज़ार, वित्त, स्टार्टअप, तकनीक और आर्थिक रुझानों को कवर करते हैं। वे आधुनिक अर्थव्यवस्था को आकार देने वाले कारोबार और उद्योगों की ख़बरें, बाज़ार विश्लेषण और अंतर्दृष्टि देते हैं।

अमित पटेल एक बिज़नेस संवाददाता हैं जो वैश्विक बाज़ार, वित्त, उद्यमिता, तकनीक और आर्थिक घटनाक्रमों को कवर करते हैं। वे ब्रेकिंग बिज़नेस न्यूज़, कॉर्पोरेट रणनीतियों, शेयर बाज़ार के रुझानों, स्टार्टअप इकोसिस्टम और वैश्विक अर्थव्यवस्था को आकार देने वाले औद्योगिक नवाचारों पर रिपोर्ट करते हैं। सटीकता, स्पष्टता और गहन विश्लेषण पर ज़ोर देते हुए अमित पाठकों को जटिल कारोबारी विषयों और उनके वास्तविक असर को समझने में मदद करते हैं। उनकी कवरेज वित्तीय बाज़ार, बहुराष्ट्रीय कंपनियों, उभरते उद्योगों, आर्थिक नीति, निवेश रुझानों और डिजिटल बदलाव तक फैली है।

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