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गूगल डीपमाइंड में यूनियन बनाने की कोशिश: पहले ही दौर की बातचीत में बढ़ी तल्खीव्यापार
2 घंटे पहले· 2

गूगल डीपमाइंड में यूनियन बनाने की कोशिश: पहले ही दौर की बातचीत में बढ़ी तल्खी

गूगल डीपमाइंड के कर्मचारियों की यूनियन बनाने की मांग पर कंपनी के साथ बातचीत का पहला चरण काफी तनावपूर्ण रहा। प्रबंधन और कर्मचारियों के बीच अविश्वास की खाई चौड़ी होती दिख रही है।

अमित पटेलअमित पटेलबिज़नेस संवाददाता 4 मिनट पढ़ें AI के लिए
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मई में डीपमाइंड के कर्मचारियों ने गूगल से कम्युनिकेशंस वर्कर्स यूनियन और यूनाइट द यूनियन को संयुक्त प्रतिनिधि के तौर पर मान्यता देने का आग्रह किया था। हालांकि कंपनी ने इस अनुरोध को ठुकरा दिया, लेकिन उसने किसी तीसरे पक्ष द्वारा मध्यस्थता वाली वार्ता में भाग लेने पर सहमति जताई थी। इस प्रक्रिया का पहला सत्र बुधवार को आयोजित हुआ, जिसमें यूनियन अधिकारी, डीपमाइंड के कर्मचारी, तीसरे पक्ष के मध्यस्थ और कंपनी के मानव संसाधन विभाग के प्रतिनिधि शामिल हुए। इस दौरान वरिष्ठ नेतृत्व की अनुपस्थिति से यूनियन समर्थक कर्मचारी बेहद निराश नजर आए।

बातचीत के पहले ही दौर में गतिरोध

सीडब्ल्यूयू (CWU) के अधिकारी जॉन चैडफील्ड, जो इस बैठक में मौजूद थे, ने आरोप लगाया कि शुरुआती चरण में ही वरिष्ठ प्रबंधन का न पहुंचना कंपनी के गलत इरादों का संकेत है। उन्होंने इसे महज समय बर्बाद करने वाली कवायद बताते हुए कहा कि बातचीत शुरुआत में ही रुक गई है। वहीं, गूगल डीपमाइंड के प्रवक्ता अल वर्नी ने इन दावों का खंडन करते हुए कहा कि प्रक्रिया का पहला कदम यह तय करना है कि यूनियन किसका प्रतिनिधित्व करना चाहती है और इस पर आगे की रणनीति पर सहमति बनी है। उनके अनुसार, बैठक में उचित प्रतिनिधि उपस्थित थे।

मानव संसाधन विभाग पर लगे गंभीर आरोप

बैठक के दौरान एक कर्मचारी ने यूनियन समर्थक सहयोगियों की ओर से एक पत्र पढ़कर सुनाया। इस पत्र में आरोप लगाया गया है कि गूगल डीपमाइंड कर्मचारियों की चिंताओं पर सार्थक चर्चा करने के बजाय उन्हें केवल एक समस्या मानकर मानव संसाधन विभाग के हवाले कर रहा है। जानकारी के अनुसार, इस पत्र को पढ़ते समय मानव संसाधन विभाग के अधिकारियों ने कर्मचारी को दो बार रोका। पत्र में यह भी दावा किया गया है कि कंपनी ने आंतरिक संवाद के मंचों को बंद करके या उनकी सेटिंग्स बदलकर कर्मचारियों के बीच बातचीत को कुचलने की कोशिश की है। यहाँ तक कि यूनियन के पक्ष में बात करने पर कर्मचारियों को चेतावनी भी दी गई है।

एक कर्मचारी ने, जिसने नाम न छापने की शर्त पर बताया, कहा कि ये सभी कदम कर्मचारियों को डराने के लिए उठाए गए थे। उन्होंने इन्हें यूनियन विरोधी पुरानी तकनीक करार दिया। दूसरी ओर, वर्नी का कहना है कि कंपनी रचनात्मक रूप से इस प्रक्रिया में शामिल रहेगी और कर्मचारियों के साथ खुला संवाद बनाए रखेगी। उन्होंने कहा कि अन्य विषयों पर चर्चा के लिए कंपनी पहले से ही कई विकल्प प्रदान कर रही है।

एआई और नैतिकता का मुद्दा

डीपमाइंड में यूनियन बनाने की यह मुहिम फरवरी 2025 में शुरू हुई थी, जब पैरेंट कंपनी अल्फाबेट ने अपने एआई नैतिकता संबंधी दिशा-निर्देशों से यह प्रतिज्ञा हटा दी थी कि तकनीक का उपयोग हथियारों या निगरानी के लिए नहीं किया जाएगा। एक कर्मचारी ने बताया कि इन्हीं सिद्धांतों की वजह से वे डीपमाइंड से जुड़े थे, लेकिन अब उन्हें हटा दिया गया है। एआई उद्योग में काम करने वाले कई लोग अपने विकसित मॉडलों के सैन्यीकरण को लेकर चिंतित हैं। फरवरी के अंत में डीपमाइंड और ओपनएआई के कर्मचारियों ने एंथ्रोपिक के समर्थन में एक पत्र पर हस्ताक्षर किए थे, जब अमेरिकी रक्षा विभाग ने कंपनी को आपूर्ति श्रृंखला के लिए जोखिम घोषित करने का प्रयास किया था।

सरकारी अनुबंधों को लेकर विवाद

अप्रैल में सार्वजनिक हुई जानकारी के अनुसार, गूगल ने पेंटागन के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे, जिसके तहत कंपनी का एआई किसी भी वैध सरकारी उद्देश्य के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। करीब 600 गूगल कर्मचारियों ने इसके विरोध में पत्र लिखा था। बाद में अमेरिकी रक्षा विभाग ने पुष्टि की कि गूगल, स्पेसएक्स, ओपनएआई और माइक्रोसॉफ्ट समेत सात एआई कंपनियों के साथ वर्गीकृत नेटवर्क पर उनके मॉडलों के उपयोग का करार किया गया है।

गूगल ने हमेशा इन सौदों का बचाव किया है। प्रवक्ता जेन क्राइडर ने कहा था कि कंपनी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एआई सेवाएं प्रदान करने वाले कंसोर्टियम का हिस्सा बनने पर गर्व महसूस करती है। उन्होंने दोहराया कि कंपनी इस बात के लिए प्रतिबद्ध है कि उचित मानव निगरानी के बिना एआई का उपयोग घरेलू निगरानी या हथियारों के तौर पर न हो। 2021 में भी गूगल के कर्मचारियों ने अल्फाबेट वर्कर्स यूनियन का गठन किया था। भले ही अल्फाबेट ने इसे सामूहिक सौदेबाजी के लिए मान्यता नहीं दी है, लेकिन यूनियन ने ठेका कर्मियों के लिए समझौते कराने में सफलता हासिल की है। चैडफील्ड ने चेतावनी दी है कि यदि लंदन में बातचीत आगे नहीं बढ़ती, तो कर्मचारी मध्यस्थता समिति से गूगल को यूनियन को मान्यता देने के लिए मजबूर करने का आग्रह करेंगे। उन्होंने उम्मीद जताई कि गूगल ईमानदारी से मेज पर आएगा, लेकिन फिलहाल ऐसा कोई संकेत नहीं दिख रहा है कि कंपनी कोई रियायत देने को तैयार है।

इसका आप पर असर

भारत में: गूगल या बड़ी एआई कंपनियों के वैश्विक नीतिगत बदलावों से भारतीय कर्मचारियों के लिए भी कार्यस्थल के नियम और एआई नैतिकता संबंधी दिशा-निर्देश प्रभावित हो सकते हैं।

सामान्य तौर पर: एआई कंपनियों में यूनियन की यह हलचल भविष्य में एआई के सैन्य उपयोग और निगरानी के प्रति कंपनियों के नजरिए में बदलाव ला सकती है, जिसका असर तकनीकी पारदर्शिता पर पड़ेगा।

सवाल-जवाब

गूगल डीपमाइंड में यूनियन बनाने की शुरुआत कब हुई?
डीपमाइंड में यूनियन बनाने की मुहिम फरवरी 2025 में शुरू हुई थी।
यूनियन वार्ता में डीपमाइंड प्रबंधन की ओर से क्या कमी बताई गई?
यूनियन समर्थकों का कहना है कि वार्ता के पहले दौर में वरिष्ठ प्रबंधन के न होने से ऐसा लग रहा है कि कंपनी इस बातचीत में गंभीरता से शामिल नहीं है।
अल्फाबेट वर्कर्स यूनियन के बारे में क्या जानकारी है?
अल्फाबेट वर्कर्स यूनियन 2021 में गठित हुई थी, जिसे सामूहिक सौदेबाजी के लिए आधिकारिक मान्यता प्राप्त नहीं है, लेकिन इसने ठेका कर्मियों के लिए समझौते कराए हैं।
डीपमाइंड कर्मचारी किस बात को लेकर चिंतित हैं?
कर्मचारी कंपनी द्वारा एआई का उपयोग हथियारों और निगरानी में करने की संभावना तथा एआई नैतिकता संबंधी वादों से पीछे हटने को लेकर चिंतित हैं।
अमित पटेल
लेखक के बारे मेंअमित पटेलबिज़नेस संवाददाता दिल्ली
विशेषज्ञताबिज़नेस समाचार, वित्तीय बाज़ार, शेयर बाज़ार विश्लेषण, कॉर्पोरेट मामले, स्टार्टअप, उद्यमिता, आर्थिक रुझान, टेक्नोलॉजी बिज़नेस, निवेश, वैश्विक अर्थव्यवस्था

अमित पटेल एक बिज़नेस संवाददाता हैं जो वैश्विक बाज़ार, वित्त, स्टार्टअप, तकनीक और आर्थिक रुझानों को कवर करते हैं। वे आधुनिक अर्थव्यवस्था को आकार देने वाले कारोबार और उद्योगों की ख़बरें, बाज़ार विश्लेषण और अंतर्दृष्टि देते हैं।

अमित पटेल एक बिज़नेस संवाददाता हैं जो वैश्विक बाज़ार, वित्त, उद्यमिता, तकनीक और आर्थिक घटनाक्रमों को कवर करते हैं। वे ब्रेकिंग बिज़नेस न्यूज़, कॉर्पोरेट रणनीतियों, शेयर बाज़ार के रुझानों, स्टार्टअप इकोसिस्टम और वैश्विक अर्थव्यवस्था को आकार देने वाले औद्योगिक नवाचारों पर रिपोर्ट करते हैं। सटीकता, स्पष्टता और गहन विश्लेषण पर ज़ोर देते हुए अमित पाठकों को जटिल कारोबारी विषयों और उनके वास्तविक असर को समझने में मदद करते हैं। उनकी कवरेज वित्तीय बाज़ार, बहुराष्ट्रीय कंपनियों, उभरते उद्योगों, आर्थिक नीति, निवेश रुझानों और डिजिटल बदलाव तक फैली है।

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