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गुजरात से चलेगी देश की पहली एलएनजी ट्रेन, अमित शाह दिखाएंगे हरी झंडीव्यापार
26 सित॰ 2026, 10:13 pm (32 दिन पहले)· 3

गुजरात से चलेगी देश की पहली एलएनजी ट्रेन, अमित शाह दिखाएंगे हरी झंडी

देश की पहली एलएनजी से चलने वाली ट्रेन की शुरुआत गुजरात के साबरमती स्टेशन से होने जा रही है। गृह मंत्री अमित शाह 27 सितंबर, रविवार को इस ट्रेन को रवाना करेंगे, जिससे सालाना लाखों रुपये की बचत होगी।

डीजल और बिजली आधारित रेल परिचालन के बाद अब भारतीय रेलवे ने एक नया कदम उठाते हुए लिक्विफाइड नेचुरल गैस यानी एलएनजी से ट्रेन चलाने की तैयारी पूरी कर ली है। देश की पहली एलएनजी ट्रेन गुजरात के साबरमती स्टेशन से अपनी यात्रा शुरू करेगी। इस महत्वपूर्ण ट्रेन को गृह मंत्री अमित शाह 27 सितंबर, रविवार को हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे। यह पहल परिवहन क्षेत्र में वैकल्पिक ईंधनों के इस्तेमाल को बढ़ावा देने और पारंपरिक डीजल पर देश की निर्भरता को काफी हद तक कम करने की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर साबित होगी।

साबरमती से होगी ऐतिहासिक शुरुआत

अहमदाबाद रेलवे डिवीजन से मिली जानकारी के मुताबिक, राष्ट्रीय ट्रांसपोर्टर द्वारा पहली बार गाड़ियों की ड्राइविंग पावर कारों में एलएनजी आधारित फ्यूल सिस्टम को शामिल किया जा रहा है। इस नवीनतम डुअल-फ्यूल तकनीक की मदद से एक ही इंजन जरूरत और ईंधन की उपलब्धता के आधार पर एलएनजी और डीजल दोनों ही माध्यमों से संचालित हो सकेगा। इस तकनीक के आने से डीजल की खपत में भारी कमी आएगी और रेलवे को केवल एक इंजन पर ही हर साल लगभग चौबीस लाख रुपये की उल्लेखनीय बचत देखने को मिलेगी।

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दो इंजनों को किया गया है अपग्रेड

इस महत्वाकांक्षी परियोजना के अंतर्गत रेलवे ने दो ड्राइविंग पावर कारों यानी इंजनों को डीजल और एलएनजी दोनों ईंधनों पर काम करने के लिहाज से रूपांतरित किया है। इन दोनों इंजनों की कुल क्षमता चौदह सौ हॉर्स पॉवर की है। इस तकनीक को अमलीजामा पहनाने से पहले इन इंजनों को दो हजार किलोमीटर तक सफलतापूर्वक दौड़ाकर इनका कड़ा ट्रायल लिया जा चुका है। इस परीक्षण का मुख्य उद्देश्य इस नई तकनीकी प्रणाली की मजबूती और विश्वसनीयता को परखना था, जिसमें यह पूरी तरह खरी उतरी है। इंजनों में एलएनजी का उपयोग होने से डीजल की खपत में सीधे तौर पर चालीस प्रतिशत तक की कटौती होगी।

स्मार्ट स्विचिंग तकनीक और पर्यावरण को फायदा

इन इंजनों को पूरी तरह से केवल एलएनजी पर निर्भर नहीं रखा गया है, बल्कि इन्हें इस तरह डिजाइन किया गया है कि ये डीजल और एलएनजी दोनों के मिश्रित तंत्र पर चल सकें। इंजन जरूरत पड़ने पर खुद-ब-खुद डीजल और एलएनजी के बीच स्विच करने की क्षमता रखता है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि यदि मार्ग में कहीं एलएनजी उपलब्ध न हो, तो यह स्वतः डीजल पर काम करना शुरू कर देगा। इससे लंबी दूरी के सफर में बिना किसी रुकावट के लगातार इंजन को संचालित रखने की क्षमता बनी रहती है।

एलएनजी और डीजल के इस संयुक्त संचालन प्रणाली से न केवल परिचालन लागत घटेगी, बल्कि कार्बन उत्सर्जन में भी भारी कमी दर्ज की जाएगी। इसके अलावा नाइट्रोजन और अन्य पर्यावरण के लिए हानिकारक गैसों का निकलना भी काफी हद तक कम हो जाएगा। डीजल के मुकाबले एलएनजी की बाजार कीमत कम होने के कारण इस तकनीक से प्रति इंजन ग्यारह लाख नब्बे हजार रुपये यानी दोनों इंजनों पर कुल मिलाकर लगभग तेरह लाख नब्बे हजार रुपये की सालाना बचत होगी। इस खास तकनीक से लैस इंजन का उपयोग आठ कोच वाली ट्रेन को खींचने के लिए किया जाएगा।

सवाल-जवाब

देश की पहली एलएनजी ट्रेन कहाँ से रवाना होगी?
देश की पहली एलएनजी ट्रेन गुजरात के साबरमती स्टेशन से रवाना होगी।
इस ट्रेन को हरी झंडी कौन दिखाएगा?
गृह मंत्री अमित शाह 27 सितंबर, रविवार को इस ट्रेन को हरी झंडी दिखाएंगे।
इस तकनीक से कितनी बचत होगी?
इस तकनीक के उपयोग से हर साल एक इंजन पर करीब चौबीस लाख रुपये की बचत होगी।
इंजनों की क्षमता कितनी है?
इस प्रोजेक्ट में उपयोग किए जा रहे दोनों इंजनों की क्षमता चौदह सौ हॉर्स पॉवर की है।
क्या इंजन केवल एलएनजी पर चलेंगे?
नहीं, ये इंजन डीजल और एलएनजी दोनों पर चल सकते हैं और जरूरत के अनुसार आपस में स्विच कर सकते हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Laxmi Gupta@laxmi-gupta·32 दिन पहले

साबरमती स्टेशन से जुड़ी यह खबर पढ़ते ही मुझे पिछले साल की अपनी गुजरात यात्रा याद आ गई, जब मैं वहाँ परिवार के साथ गई थी। तकनीक और वैकल्पिक ईंधन की यह तरक्की देखकर बहुत सुकून मिला कि अब सफर के साथ-साथ पर्यावरण का भी ऐसा बेहतरीन ख्याल रखा जा रहा है।

Michael Anderson@michael-anderson·32 दिन पहले

सिर्फ एक इंजन पर चौबीस लाख की बचत, यह वाकई बड़ा आंकड़ा है। अगर यह तकनीक बाकी रूटों पर भी कामयाब हो गई, तो रेलवे का खर्च काफ़ी कम हो जाएगा।

Tanvi Desai@tanvi-desai·32 दिन पहले

माइकल, बात तो सही है, लेकिन क्या देश के बाकी स्टेशनों पर भी एलएनजी की वैसी ही सप्लाई आसानी से मिल पाएगी?

Rohan Gupta@rohan-gupta·32 दिन पहले

एलएनजी से बचत तो ठीक है, पर जब रूट पर गैस ही न मिले और बार-बार डीजल पर स्विच करना पड़े, तो फिर इस तकनीक का असली फायदा मिलेगा भी या नहीं?

Ravikash Gupta@ravikash·32 दिन पहले

रोहन भाई, स्विच तो ऑटोमैटिक हो जाएगा, पर रूट पर एलएनजी पंप लगाने का क्या प्लान है?

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