उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में छोटे स्तर पर अपना कारोबार शुरू करने की सोच में बैठे लोगों के लिए गुड़ बनाने का प्लांट एक फायदे का सौदा साबित हो सकता है। यह कारोबार अपेक्षाकृत कम लागत में शुरू हो जाता है और अब केंद्र सरकार की एक योजना के चलते इसमें मोटी सब्सिडी भी मिल रही है, जिससे गन्ना उत्पादक क्षेत्र के किसानों और नए उद्यमियों के लिए यह और आकर्षक बन गया है।
कितनी जमीन, मशीन और निवेश की जरूरत होगी
गुड़ बनाने की यूनिट खड़ी करने के लिए करीब 4,000 से 4,500 वर्ग फीट जगह चाहिए होती है। इसके साथ ही गन्ने से रस निकालने के लिए क्रशर और उस रस को पकाने के लिए बड़ी कड़ाही जैसी मशीनें लगानी पड़ती हैं। यूनिट को चलाने के लिए 10 से 15 कामगारों की जरूरत पड़ती है, जबकि शुरुआती दौर में जमीन, मशीन और अन्य साधनों पर करीब 10 से 15 लाख रुपये का निवेश करना होता है। प्रक्रिया के लिहाज से यह काम बहुत जटिल नहीं है, सबसे पहले गन्ने के रस को छाना जाता है, फिर उसे कड़ाही में उबाला जाता है और आखिर में इसे सांचों में डालकर ठोस गुड़ की शक्ल दी जाती है। इस तरह कम मशीनरी और सीमित जगह में भी यह इकाई खड़ी की जा सकती है।
पीएमएफएमई योजना के तहत मिलेगी 35 प्रतिशत तक सब्सिडी
उद्यान विभाग में डीआरपी के पद पर तैनात विमल कुमार तोमर के मुताबिक, प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना यानी पीएमएफएमई योजना के तहत गुड़ पाउडर और गुड़ से बने लड्डुओं के उत्पादन को बढ़ावा दिया जा रहा है। इस योजना के अंतर्गत केंद्र सरकार गुड़ प्रसंस्करण संयंत्र लगाने की कुल परियोजना लागत का 35 प्रतिशत तक अनुदान देती है। खास बात यह है कि यह अनुदान राशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में भेजी जाती है, जिससे किसी बिचौलिए की जरूरत नहीं पड़ती और पैसा समय पर लाभार्थी तक पहुंच जाता है। तोमर ने बताया कि इस सुविधा से छोटे उद्यमियों और किसान भाइयों को अपना कारोबार खड़ा करने में बहुत मदद मिल रही है और क्षेत्र के कई किसान व उद्यमी पहले ही इस योजना का लाभ उठा चुके हैं।
आवेदन बढ़े, अक्टूबर से आवेदनों पर काम होगा तेज
योजना के लिए कार्यालय में अब तक बड़ी तादाद में आवेदन आ चुके हैं। अक्टूबर के महीने से गन्ने की पेराई का सीजन शुरू हो जाता है, जिसके चलते गुड़ के उत्पादन की मांग में भी एकदम से बढ़ोतरी हो जाती है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए अगले महीने से अब तक मिले सभी आवेदनों पर प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। पिछले कुछ वर्षों में इसी योजना के तहत क्षेत्र में करीब 7 से 8 बड़े गुड़ प्रसंस्करण संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं। वर्तमान में यहां 8 इकाइयां सफलतापूर्वक चल रही हैं और किसानों को गुणवत्तापूर्ण उत्पाद मुहैया करा रही हैं।
प्लांट लगाने के लिए ये दस्तावेज रखने होंगे तैयार
आवेदन के लिए आधार कार्ड, पैन कार्ड, पिछले 6 महीने की बैंक स्टेटमेंट और बिजली का बिल देना जरूरी होगा। अगर संयंत्र को जेनसेट या किसी अन्य वैकल्पिक ऊर्जा स्रोत से चलाया जाना है, तो इसकी जानकारी भी आवेदन के साथ देनी होगी।
किसानों के साथ गांव के लोगों को भी मिलेगा रोजगार
तोमर के मुताबिक यह योजना सिर्फ किसानों की आमदनी बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए मौके भी पैदा कर रही है। गुड़ प्रसंस्करण इकाई शुरू होने से किसानों को अपनी फसल की बेहतर मार्केटिंग का मौका मिलेगा, वहीं स्थानीय स्तर पर भी लोगों के लिए रोजगार के दरवाजे खुलेंगे।


















