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फुकेट से दिल्ली आ रही एयर इंडिया उड़ान में 300 फीट की अचानक गिरावट, डोप जांच में पायलट के मारिजुआना सेवन की पुष्टिदिल्ली
12 अग॰ 2026, 7:05 pm (1 घंटे पहले)· 2

फुकेट से दिल्ली आ रही एयर इंडिया उड़ान में 300 फीट की अचानक गिरावट, डोप जांच में पायलट के मारिजुआना सेवन की पुष्टि

फुकेट से दिल्ली आ रही एयर इंडिया की उड़ान में अचानक 300 फीट की गिरावट के बाद 24 लोग घायल हो गए। जांच के दौरान पायलट-इन-कमांड के दूसरे कन्फर्मेटरी ड्रग टेस्ट में मारिजुआना की पुष्टि हुई है।

4 अगस्त को फुकेट से दिल्ली की ओर उड़ान भर रही एयर इंडिया की फ्लाइट AI 2379 में हवा में एक गंभीर हादसा घटित हुआ। एयरबस A320 विमान में 137 यात्री सवार थे, जिनमें तीन बच्चे भी शामिल थे, और 8 केबिन क्रू सदस्य तैनात थे। यात्रा के दौरान अचानक विमान की ऊंचाई में लगभग 300 फीट की तीव्र गिरावट दर्ज की गई। इस अचानक हुए बदलाव से कॉकपिट और यात्री केबिन में अफरा-तफरी मच गई, लेकिन सह-पायलट ने तत्परता दिखाते हुए विमान पर नियंत्रण स्थापित किया और उसे दिल्ली में सुरक्षित उतार लिया। हालांकि, इस घटना के दौरान 20 यात्री और 4 केबिन क्रू सदस्य घायल हो गए, जिन्हें प्राथमिक उपचार की आवश्यकता पड़ी। इस मामले की शुरुआती छानबीन के बाद पायलट-इन-कमांड के डोप टेस्ट में मारिजुआना यानी गांजे का सेवन किए जाने का चौंकाने वाला खुलासा हुआ है।

कॉकपिट के भीतर की स्थिति और 300 फीट की गिरावट

घटना के समय विमान में बनी परिस्थितियों के विश्लेषण से पता चलता है कि जब एयरबस A320 में अचानक ऊंचाई कम होने लगी, उस समय पायलट-इन-कमांड सह-पायलट की सीट के ठीक पीछे खड़े होकर आगे की ओर झुके हुए थे। विमान अचानक क्षण भर के लिए नेगेटिव जी की स्थिति में चला गया। इस भौतिक स्थिति के कारण कॉकपिट में गुरुत्वाकर्षण का प्रभाव खत्म हो गया, जिससे पायलट-इन-कमांड और कॉकपिट में रखी कई ढीली चीजें हवा में ऊपर की ओर तैरने लगीं।

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इसी तरह का प्रभाव यात्री केबिन में भी देखने को मिला। जिन यात्रियों ने अपनी सीट बेल्ट नहीं बांध रखी थी, वे अचानक अपनी सीटों से ऊपर उछल गए और केबिन की छत तथा आसपास की संरचनाओं से टकरा गए। इसके परिणामस्वरूप 20 यात्रियों को चोटें आईं और 4 केबिन क्रू सदस्य भी घायल हो गए। सह-पायलट की सूझबूझ और त्वरित निर्णय क्षमता के कारण एक बड़ा हादसा टल गया और विमान को नियंत्रित कर दिल्ली हवाई अड्डे पर सुरक्षित लैंड कराया गया।

ड्रग स्क्रीनिंग और प्रयोगशाला जांच में बड़ा खुलासा

उड़ान के दौरान कॉकपिट में घटित असामान्य घटनाक्रम और पायलट-इन-कमांड के आचरण को देखते हुए ग्राउंड कंट्रोल को तुरंत सतर्क किया गया था। सह-पायलट और केबिन क्रू द्वारा दिए गए संकेतों के आधार पर एयरलाइन प्रबंधन ने एक असाधारण कदम उठाया। आमतौर पर उड़ानों के बाद पायलटों का नियमित रूप से सांस विश्लेषक (ब्रेथ एनालाइजर) परीक्षण किया जाता है, जो केवल शराब के सेवन की जांच करता है। लेकिन इस मामले में कॉकपिट क्रू का व्यापक साइकोएक्टिव-सबस्टेंस स्क्रीनिंग परीक्षण कराने का निर्णय लिया गया।

शुरुआती डोप स्क्रीनिंग परीक्षण के दौरान पायलट-इन-कमांड का परिणाम नेगेटिव नहीं पाया गया। इसके बाद तय मानकों और अंतरराष्ट्रीय प्रोटोकॉल का पालन करते हुए पायलट के जैविक नमूनों को एक अधिकृत और प्रमाणित प्रयोगशाला में कन्फर्मेटरी जांच के लिए भेजा गया। प्रयोगशाला की अंतिम रिपोर्ट में इस बात की पुष्टि हुई कि पायलट ने मारिजुआना का सेवन किया था। जांच एजेंसियों ने घटना से जुड़े मेडिकल रिकॉर्ड, गवाहों के बयान, तकनीकी आंकड़े और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज संरक्षित कर लिए हैं।

केबिन क्रू की शिकायत और कानूनी कार्रवाई

उड़ान एआई 2379 के केबिन क्रू सदस्यों ने एयरलाइन के शीर्ष प्रबंधन को अपनी आधिकारिक रिपोर्ट सौंपी है। इस रिपोर्ट में केबिन क्रू ने कॉकपिट में पायलट-इन-कमांड के नशे में होने और उनके असामान्य व्यवहार के संबंध में लिखित शिकायत दर्ज कराई है। केबिन क्रू का कहना है कि पायलट के आचरण ने विमान और उस पर सवार सभी 145 लोगों की जान को खतरे में डाल दिया था।

इस मामले में पायलट के खिलाफ विमानन नियामक नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) के कड़े नियमों के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा रही है। नियमों के अनुसार, किसी भी नशीले या मनो-सक्रिय पदार्थ के टेस्ट में पॉजिटिव पाए जाने वाले पायलट का लाइसेंस निलंबित कर दिया जाता है और उसे अनिवार्य रूप से नशामुक्ति केंद्र में भेजा जाता है। पूर्ण नशामुक्ति का चिकित्सकीय प्रमाण पत्र प्राप्त करने और कड़े मूल्यांकन के बाद ही उसे पुनः उड़ान भरने की अनुमति दी जा सकती है। इसके अलावा, यात्रियों की जान जोखिम में डालने के कारण पायलट के खिलाफ आपराधिक कानूनी धाराओं के तहत भी कार्रवाई की संभावना बन गई है।

एएआईबी की विस्तृत जांच और डीजीसीए के नियम

भारत के एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (एएआईबी) ने इस पूरे हादसे की तकनीकी और परिचालन संबंधी जांच शुरू कर दी है। एएआईबी की टीम घटना से जुड़े सभी तकनीकी आंकड़ों, कॉकपिट वॉइस रिकॉर्डर, फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर, चिकित्सा रिपोर्ट और मानवीय कारकों से संबंधित साक्ष्यों को व्यवस्थित रूप से एकत्रित और संरक्षित कर रही है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि जांच प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष और स्थापित अंतरराष्ट्रीय उड्डयन ढांचे के तहत संचालित की जा रही है।

इस घटना के बाद डीजीसीए अपने डोप टेस्ट और मेडिकल जांच नियमों की समीक्षा कर रहा है। दूसरी ओर, भारत के वरिष्ठ पायलट संगठनों ने नियामक से एक महत्वपूर्ण मांग की है। पायलटों का कहना है कि अनिद्रा या मानसिक तनाव के लिए ली जाने वाली चिकित्सकीय दवाओं और अवैध मारिजुआना जैसे मनो-सक्रिय पदार्थों के सेवन के बीच नियमों में स्पष्ट अंतर होना चाहिए। वर्तमान में एयरलाइंस के पास उन दवाओं की एक निश्चित सूची होती है, जिन्हें उड़ान से कुछ घंटे पहले लेने पर प्रतिबंध होता है क्योंकि वे उनींदापन पैदा कर सकती हैं।

एयर इंडिया के संचालन और सुरक्षा प्रबंधन पर सवाल

इस गंभीर हादसे ने एयर इंडिया के परिचालन प्रबंधन, सुरक्षा प्रोटोकॉल और क्रू मॉनिटरिंग सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एयरलाइन पहले ही वित्तीय नुकसान से जूझ रही है और जून 2025 में अहमदाबाद में हुए विमान हादसे के बाद यात्रियों और जनता का विश्वास फिर से हासिल करने का प्रयास कर रही थी। फुकेट-दिल्ली उड़ान में हुई इस घटना ने भारतीय नागरिक उड्डयन प्रणाली की मजबूती और सुरक्षा जांच प्रक्रियाओं की प्रभावशीलता पर एक बार फिर बहस छेड़ दी है। 20 यात्रियों और 4 क्रू सदस्यों के घायल होने के कारण डीजीसीए पर अब डोप टेस्टिंग प्रक्रियाओं को अधिक कड़ा और पारदर्शी बनाने का दबाव बढ़ गया है।

सवाल-जवाब

एयर इंडिया की फुकेट-दिल्ली उड़ान में क्या हादसा हुआ था?
4 अगस्त को फुकेट से दिल्ली जा रही एयर इंडिया की उड़ान AI 2379 में अचानक 300 फीट की गिरावट आई थी, जिससे 20 यात्री और 4 केबिन क्रू सदस्य घायल हो गए थे।
पायलट के ड्रग टेस्ट रिपोर्ट में क्या खुलासा हुआ है?
पायलट-इन-कमांड के शुरुआती डोप टेस्ट और बाद में प्रयोगशाला में हुए कन्फर्मेटरी टेस्ट में मारिजुआना (गांजे) के सेवन की पुष्टि हुई है।
विमान की ऊंचाई गिरते समय कॉकपिट में क्या स्थिति थी?
ऊंचाई गिरते समय पायलट-इन-कमांड सह-पायलट की सीट के पीछे खड़े थे। क्षणभर के लिए 'नेगेटिव जी' स्थिति बनने से कॉकपिट की वस्तुएं और पायलट हवा में तैरने लगे थे।
घटना के बाद पायलट के खिलाफ क्या कानूनी और नियामकीय कार्रवाई की जा रही है?
डीजीसीए नियमों के तहत पायलट का लाइसेंस निलंबित कर उसे नशामुक्ति केंद्र भेजा जाएगा। इसके अलावा यात्रियों की जान खतरे में डालने के लिए आपराधिक कार्रवाई भी हो सकती है।
इस मामले की जांच कौन सी एजेंसी कर रही है?
भारत का एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (एएआईबी) विमान के तकनीकी आंकड़ों, रिकॉर्डर और मानवीय साक्ष्यों की विस्तृत जांच कर रहा है।
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टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·51 मिनट पहले

यह घटना विमानन सुरक्षा में एक गंभीर चूक को उजागर करती है, जहाँ पायलट द्वारा मादक पदार्थों का सेवन और कॉकपिट प्रोटोकॉल का उल्लंघन सीधे तौर पर यात्रियों की जान जोखिम में डालता है। सह-पायलट की तत्परता से भले ही बड़ा हादसा टल गया हो, लेकिन यह मामला नागरिक उड्डयन प्राधिकरणों के लिए क्रू की रैंडम ड्रग स्क्रीनिंग और मानसिक स्वास्थ्य निगरानी को और अधिक कड़े और पारदर्शी बनाने की तत्काल आवश्यकता को रेखांकित करता है ताकि भविष्य में ऐसी लापरवाही रोकी जा सके।

Karan Malhotra@karan-malhotra·50 मिनट पहले

रोहन वर्मा की बात को आगे बढ़ाते हुए, यह सिर्फ एक प्रशासनिक लापरवाही नहीं बल्कि आपराधिक उपेक्षा का मामला है। विमानन सुरक्षा नियमों और भारतीय दंड संहिता के तहत ऐसे मामलों में कड़ी कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। अब जांच एजेंसियों और अदालतों को यह तय करना होगा कि सार्वजनिक सुरक्षा को ताक पर रखने वाले ऐसे लापरवाह कर्मियों के खिलाफ मिसाल कायम की जाए, ताकि भविष्य में कॉकपिट में इस तरह के नशे की पुनरावृत्ति न हो सके।

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