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शिमला में पेट्रोल की कीमत 103 रुपये पार, हिमाचल सरकार के नए सेस का असरव्यापार
12 अग॰ 2026, 7:14 pm (1 घंटे पहले)· 1

शिमला में पेट्रोल की कीमत 103 रुपये पार, हिमाचल सरकार के नए सेस का असर

हिमाचल प्रदेश में 11 अगस्त 2026 की मध्यरात्रि से पेट्रोल और हाई-स्पीड डीजल पर 60 पैसे प्रति लीटर का नया सेस लागू हो गया है, जिससे शिमला में पेट्रोल 103.05 रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गया है।

हिमाचल प्रदेश में गाड़ी चलाने वालों की जेब पर अब थोड़ा और बोझ बढ़ने वाला है। 11 अगस्त 2026 की आधी रात से राज्य में पेट्रोल और हाई-स्पीड डीजल 60 पैसे प्रति लीटर महंगा हो गया है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की सरकार ने यह बढ़ोतरी किसी सामान्य टैक्स के तौर पर नहीं, बल्कि 'अनाथ एवं विधवा सेस' के नाम से लागू की है, जिसका मकसद राज्य के अनाथ बच्चों और विधवाओं की मदद के लिए धन जुटाना है।

शिमला में पेट्रोल 103.05 रुपये प्रति लीटर

इस फैसले का सीधा असर राजधानी शिमला में देखने को मिला है, जहां पेट्रोल की कीमत 102.45 रुपये प्रति लीटर से बढ़कर 103.05 रुपये प्रति लीटर हो गई है। यानी हर लीटर पेट्रोल पर उपभोक्ताओं को 60 पैसे ज्यादा चुकाने होंगे। इसी तरह हाई-स्पीड डीजल पर भी 60 पैसे प्रति लीटर का यही अतिरिक्त उपकर जोड़ा गया है, जिससे डीजल खरीदना भी पहले से महंगा हो गया है।

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2005 के वैट कानून की धारा 6-ए के तहत लागू हुआ उपकर

राज्य कर एवं आबकारी विभाग ने इस बारे में अधिसूचना जारी करते हुए बताया कि यह सेस हिमाचल प्रदेश मूल्य वर्धित कर यानी वैट अधिनियम, 2005 की धारा 6-ए के प्रावधानों के तहत लगाया जा रहा है। नियमों के मुताबिक यह उपकर पेट्रोल और हाई-स्पीड डीजल की पहली बिक्री यानी 'पॉइंट ऑफ फर्स्ट सेल' पर ही वसूला जाएगा। सीधे शब्दों में कहें तो जब तेल कंपनियां पहली बार डीलरों को पेट्रोल-डीजल बेचती हैं, उसी स्तर पर यह अतिरिक्त शुल्क जुड़ जाएगा और इसका बोझ अंतत: उपभोक्ता तक पहुंचेगा।

अनाथ बच्चों और विधवाओं के कल्याण पर खर्च होगी रकम

सरकार का कहना है कि इस नए सेस से जो भी राशि जुटेगी, उसे राज्य में अनाथ बच्चों और विधवाओं के कल्याण और सहायता से जुड़ी योजनाओं पर खर्च किया जाएगा। यानी यह पैसा सीधे तौर पर समाज के इन दो कमजोर वर्गों के पुनर्वास, शिक्षा और आर्थिक सहायता जैसे कार्यों में लगाया जाएगा। फैसला लागू होने के बाद से प्रदेशभर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में यह मामूली बढ़ोतरी दर्ज की गई है, हालांकि इसका असर राज्य के अलग-अलग जिलों में स्थानीय करों के हिसाब से थोड़ा अलग-अलग हो सकता है।

सवाल-जवाब

हिमाचल प्रदेश में पेट्रोल-डीजल कब से महंगा हुआ?
11 अगस्त 2026 की मध्यरात्रि से नई कीमतें लागू हो गई हैं।
'अनाथ एवं विधवा सेस' क्या है?
यह हिमाचल सरकार द्वारा पेट्रोल और हाई-स्पीड डीजल पर लगाया गया नया उपकर है, जिसका मकसद अनाथ बच्चों और विधवाओं के कल्याण के लिए धन जुटाना है।
शिमला में अब पेट्रोल की नई कीमत क्या है?
शिमला में पेट्रोल 102.45 रुपये से बढ़कर 103.05 रुपये प्रति लीटर हो गया है।
यह सेस किस कानून के तहत लगाया गया है?
यह हिमाचल प्रदेश मूल्य वर्धित कर (वैट) अधिनियम, 2005 की धारा 6-ए के तहत लगाया गया है।
यह उपकर कहां वसूला जाएगा?
यह पेट्रोल और हाई-स्पीड डीजल की पहली बिक्री यानी 'पॉइंट ऑफ फर्स्ट सेल' पर वसूला जाएगा।
सेस से जुटाई गई राशि का इस्तेमाल कहां होगा?
इस राशि का इस्तेमाल राज्य में अनाथ बच्चों और विधवाओं के कल्याण और सहायता से जुड़े कार्यों में किया जाएगा।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Ravikash Gupta@ravikash·49 मिनट पहले

हिमाचल सरकार का यह कदम भले ही सामाजिक कल्याण के लिहाज से सराहनीय प्रतीत हो, लेकिन ईंधन पर उपकर लगाने से परिवहन लागत बढ़ने का सीधा असर महंगाई पर पड़ सकता है। जब भी लॉजिस्टिक या ढुलाई खर्च बढ़ता है, तो आवश्यक वस्तुओं और औद्योगिक आपूर्ति के दाम प्रभावित होते हैं। राज्य के राजकोषीय प्रबंधन और कल्याणकारी लक्ष्यों के बीच संतुलन बनाने की यह कोशिश अंततः आम उपभोक्ता की जेब पर अप्रत्यक्ष दबाव बढ़ाएगी।

Rohan Gupta@rohan-gupta·48 मिनट पहले

रविप्रकाश जी के विश्लेषण को आगे बढ़ाते हुए, मैं यह जोड़ना चाहूंगा कि आज के डिजिटल और तकनीक-संचालित लॉजिस्टिक्स युग में, परिवहन लागत में मामूली वृद्धि भी पूरी सप्लाई चेन को प्रभावित करती है। ई-कॉमर्स डिलीवरी, फ्रेट मैनेजमेंट और डिजिटल आपूर्ति नेटवर्क पर इसका दूरगामी असर देखने को मिल सकता है। जब ईंधन महंगा होता है, तो स्मार्ट फ्लीट मैनेजमेंट और एआई-आधारित रूट ऑप्टिमाइजेशन सॉफ़्टवेयर का उपयोग करने वाली कंपनियों पर भी मार्जिन का दबाव बढ़ जाता है। हालांकि उद्देश्य सामाजिक कल्याण का है, लेकिन तकनीक और आपूर्ति श्रृंखला के इस दौर में फ्लीट ऑपरेटरों को अतिरिक्त खर्च का सामना करना पड़ेगा, जिसका अप्रत्यक्ष असर अंततः डिजिटल और भौतिक दोनों बाजारों में उपभोक्ता महंगाई पर पड़ सकता है।

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