फिक्स्ड डिपॉजिट यानी FD आज भी भारत के करोड़ों परिवारों की पहली पसंद बनी हुई है। शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड और क्रिप्टो जैसे विकल्पों का आकर्षण भले बढ़ा हो, फिर भी ज्यादातर लोग अपनी बचत का बड़ा हिस्सा FD में ही सुरक्षित रखना पसंद करते हैं। ब्याज दरों में हालिया तेजी और स्मॉल फाइनेंस बैंकों की आकर्षक स्कीम्स ने फिक्स्ड-इनकम निवेश को फिर से चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
इसी पृष्ठभूमि में TrendKia ने Stable Money के को-फाउंडर और CEO सौरभ जैन से बात की और जाना कि निवेशकों को FD चुनते वक्त क्या-क्या देखना चाहिए, कम बचत से बड़ा फंड कैसे तैयार किया जा सकता है और क्यों FD आज भी एक मजबूत वित्तीय योजना की रीढ़ बनी हुई है।
ज्यादा ब्याज बनाम बैंक की सुरक्षा, संतुलन कैसे बनाएं
जैन मानते हैं कि स्मॉल फाइनेंस बैंक इस समय FD पर बेहतर ब्याज दे रहे हैं, इसलिए ज्यादा रिटर्न चाहने वालों के लिए ये स्वाभाविक रूप से आकर्षक हैं। लेकिन उनका साफ कहना है कि सिर्फ ब्याज दर देखकर फैसला करना सही नहीं है। FD चुनते वक्त बैंक की मजबूती पर भी उतनी ही नजर रखनी चाहिए।
इसके लिए उन्होंने कुछ अहम कसौटियां गिनाईं, RBI के नियम, DICGC का बीमा कवरेज, बैंक की एसेट क्वालिटी, उसका NPA लेवल, जमा यानी डिपॉजिट की बढ़त और बैंक की समग्र वित्तीय स्थिति। उनके मुताबिक Stable Money का भरोसा है कि फिक्स्ड-इनकम निवेश में डायवर्सिफिकेशन यानी विविधता बेहद अहम है। पूरी बचत किसी एक बैंक या एक ही अवधि की FD में लगाने के बजाय अलग-अलग बैंकों और अलग-अलग अवधियों में बांटकर रखने से रिटर्न, लिक्विडिटी और स्थिरता के बीच बेहतर तालमेल बैठता है। उनका कहना है कि FD भरोसे और स्थिरता पर टिका साधन है, इसलिए ज्यादातर निवेशकों की प्राथमिकता लंबे समय तक स्थिर रिटर्न और वित्तीय आत्मविश्वास बनाए रखने की होनी चाहिए।
क्या FD सिर्फ सुरक्षा देती है, रिटर्न नहीं
इस आम धारणा पर जैन का जवाब दो-टूक था। उनके शब्दों में, '’मेरा मानना है कि पिछले कुछ सालों में FD को लेकर लोगों की सोच काफी बदली है। पहले FD को मुख्य रूप से सुरक्षा से जोड़ा जाता था, लेकिन आज के ब्याज दरों के माहौल में यह कॉम्पिटेटिव और अनुमानित रिटर्न भी प्रदान कर रही है। कई मिडिल क्लास परिवारों, नौकरीपेशा लोगों और पहली बार निवेश करने वालों के लिए स्थिरता और निश्चितता बहुत जरूरी होती है। क्योंकि FD का रिटर्न रोज़ाना बाजार के उतार-चढ़ाव से प्रभावित नहीं होता, इसलिए यह आज भी छोटे और मध्यम अवधि के वित्तीय लक्ष्यों के लिए रेलेवेन्ट है। बड़ा फंड बनाना केवल अधिक रिस्क लेने से नहीं होता। समय के साथ निरंतर निवेश, अनुशासन और कंपाउंडिंग की ताकत भी बहुत जरूरी भूमिका निभाती है। FD निवेशकों को यही आदतें विकसित करने में मदद करती है और उनके पोर्टफोलियो को स्थिरता प्रदान करती है।'’
हर महीने ₹5,000 से ₹10,000 बचाने वाले बड़ा फंड कैसे बनाएं
जैन के मुताबिक संपत्ति बनाने के लिए बड़ी रकम से शुरुआत करना जरूरी नहीं है, असली ताकत निरंतरता और अनुशासन में है। हर महीने ₹5,000 से ₹10,000 की नियमित बचत भी धीरे-धीरे एक मजबूत वित्तीय आधार खड़ा कर सकती है।
उनकी पहली सलाह है कि शुरुआत 6 से 12 महीने के खर्च के बराबर एक इमरजेंसी फंड बनाने से करें। निवेश शुरू करने के लिए किसी बड़ी एकमुश्त रकम का इंतजार करने की जरूरत नहीं, छोटी राशि से किया गया नियमित निवेश भी लंबे समय में उतना ही असरदार साबित होता है।
वे FD लैडरिंग की रणनीति अपनाने पर खास जोर देते हैं, जिसमें पूरा पैसा एक ही अवधि की FD में लॉक करने के बजाय अलग-अलग अवधियों में बांटा जाता है। इससे एक ओर लिक्विडिटी बनी रहती है और दूसरी ओर निवेशक अलग-अलग ब्याज दर सर्किल का फायदा भी उठा पाते हैं। अनुशासित बचत करने वालों के लिए वे रिकरिंग डिपॉजिट यानी RD को भी अच्छा विकल्प बताते हैं, जिसमें मौजूदा ब्याज दर लॉक हो जाती है और अवधि पूरी होने पर तय रिटर्न मिलता है।
उनका कहना है कि समय बीतने के साथ कंपाउंडिंग का असर बहुत बड़ा हो जाता है। नियमित बचत आगे चलकर शिक्षा, यात्रा, घर खरीदने या लॉन्ग टर्म फाइनेंशियल सिक्योरिटी जैसे बड़े लक्ष्यों को पूरा करने में मदद करती है। उनकी सबसे अहम सलाह यही है कि जल्दी शुरुआत करें और लगातार निवेश करते रहें।
कैसे आया Stable Money का विचार
जैन बताते हैं कि Stable Money की नींव एक सीधी-सी समझ पर रखी गई, भारत में करोड़ों लोग पहले से ही फिक्स्ड डिपॉजिट को अपनी पसंदीदा बचत का जरिया मानते हैं। उनके अनुसार फिनटेक सेक्टर के ज्यादातर नए विचार बाजार-आधारित निवेशों के इर्द-गिर्द घूम रहे थे, जबकि एक बड़ा वर्ग ऐसा भी था जो अपनी वित्तीय यात्रा में सुरक्षा, निश्चितता और सरलता चाहता है।
उनके शब्दों में Stable Money का मकसद निवेशकों की आदतें अचानक बदलना नहीं था, बल्कि उन्हीं प्रोडक्ट्स के इर्द-गिर्द बेहतर अनुभव गढ़ना था जिन पर भारतीय पहले से भरोसा करते हैं, और उन्हें ज्यादा ट्रांसपरेंट, सरल और डिजिटल बनाना था। उनका कहना है कि फिक्स्ड डिपॉजिट भारत में पहले से ही बचत का बहुत बड़ा हिस्सा है, लेकिन इसका अनुभव अब भी काफी हद तक बिखरा हुआ और ऑफलाइन बना हुआ था। यहीं उन्हें मौका दिखा कि फिक्स्ड-इनकम प्रोडक्ट्स तक पहुंच आसान बनाई जाए और निवेशकों को बेहतर जानकारी के साथ फैसले लेने में मदद की जाए। उनके मुताबिक समय के साथ यह भी देखने को मिला कि कई FD निवेशक भरोसा और आत्मविश्वास बनने के बाद दूसरे फिक्स्ड-इनकम प्रोडक्ट्स को भी समझने और अपनाने लगते हैं।













