मानसून के मौसम में जहां किसानों के खेत हरे-भरे हो जाते हैं, वहीं इसी बारिश की वजह से मवेशियों की सेहत पर बड़ा खतरा मंडराने लगता है. डॉक्टरों की मानें तो जरा सी चूक गाय और भैंस दोनों के लिए जानलेवा साबित हो सकती है, और इसका सीधा असर दूध के उत्पादन पर भी पड़ता है.
नमी और कीचड़ से बढ़ता बीमारियों का खतरा
खंडवा के पशु चिकित्सक डॉ हेमंत शाह के अनुसार बारिश के दिनों में शेड में जमा नमी, कीचड़ और गंदगी पशुओं के लिए सबसे बड़ा दुश्मन बन जाती है. इन्हीं वजहों से निमोनिया, दस्त, बुखार, त्वचा से जुड़े संक्रमण और खुरपका-मुंहपका जैसी बीमारियां तेजी से फैलने लगती हैं. उनका कहना है कि छोटे और अभी जन्मे बछड़े इस मौसम में सबसे जल्दी बीमार पड़ते हैं, इसलिए उन पर खास नजर रखनी जरूरी है.
डॉ शाह बताते हैं कि ज्यादातर पशुपालक यही गलती करते हैं कि वे मवेशियों को गीली और कीचड़ भरी जगह पर ही बांध देते हैं, जिससे संक्रमण फैलने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है. उनकी सलाह है कि पशुओं के लिए हमेशा सूखा, साफ और हवादार शेड बनाया जाए और अगर कोई पशु बारिश में भीग जाए तो उसे तुरंत सूखी जगह पर लाकर पोंछ दिया जाए.
बछड़ों की सेहत के लिए पहला घंटा सबसे अहम
जन्म के बाद का पहला घंटा बछड़ों के लिए सबसे नाजुक होता है. डॉ शाह के मुताबिक इस दौरान बछड़े को मां का पहला दूध यानी खीस जरूर पिलाना चाहिए, क्योंकि इसी से उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत बनती है. अगर बछड़ा किसी वजह से बारिश में भीग जाए तो उसे बुखार और निमोनिया होने की आशंका बढ़ जाती है, और ऐसी हालत में देर किए बिना पशु चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए.
थनैला और महामारियों से बचाव के लिए टीकाकरण जरूरी
बरसात के मौसम में थनैला यानी मास्टाइटिस रोग भी तेजी से फैलता है. इससे बचने के लिए दूध निकालने के तुरंत बाद पशु को गीले फर्श पर बैठने न दें और थनों की सफाई का पूरा ध्यान रखें. डॉ शाह इस बात पर भी जोर देते हैं कि खुरपका-मुंहपका और गलघोंटू जैसी खतरनाक बीमारियों से बचने का सबसे भरोसेमंद तरीका समय पर टीकाकरण करवाना है.
मच्छर-मक्खी और गंदगी से भी रहें सतर्क
बारिश में मच्छर, मक्खी और परजीवी तेजी से बढ़ते हैं और यही संक्रमण फैलाने की बड़ी वजह बनते हैं. इसलिए बाड़े में कहीं भी पानी जमा न होने दें, समय-समय पर सफाई करते रहें और जरूरत पड़ने पर उचित दवाइयों का इस्तेमाल करें.
चारे में लापरवाही पड़ सकती है भारी
डॉ शाह के मुताबिक इस मौसम में खानपान को लेकर भी सतर्क रहना जरूरी है. पशुओं को कभी भी सड़ा-गला या फफूंद लगा चारा न खिलाएं. हरे चारे के साथ सूखा भूसा मिलाकर देने से पाचन ठीक रहता है और पेट से जुड़ी दिक्कतें नहीं होतीं. उनका कहना है कि बरसात के मौसम में थोड़ी सी सतर्कता पशुओं को बड़ी बीमारियों से बचा सकती है. समय पर देखभाल, नियमित सफाई और डॉक्टर की सलाह मानकर पशुपालक अपने मवेशियों को स्वस्थ रख सकते हैं और आर्थिक नुकसान से भी बच सकते हैं.



















