भारतीय करेंसी में आज एक बड़ा उछाल देखने को मिला है। सोमवार 27 जुलाई को भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले 41 पैसे की मजबूती के साथ खुला है। कारोबार की शुरुआत में रुपया 96.56 प्रति डॉलर के पिछले स्तर के मुकाबले सुधरकर 96.15 प्रति डॉलर पर पहुंच गया। पिछले काफी समय से डॉलर के सामने लगातार कमजोर हो रही भारतीय मुद्रा के लिए यह एक बड़ी राहत की खबर है। इस अचानक आई मजबूती और रिकवरी के पीछे कई बड़े आर्थिक कारक जिम्मेदार हैं।
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से मिली बड़ी राहत
रुपये में आई इस तेजी के पीछे सबसे बड़ा कारण इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल के दामों में आई नरमी को माना जा रहा है। क्रूड ऑयल का प्राइस लुढ़ककर 93 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर आ गया है। इससे पहले मध्य पूर्व यानी मिडिल ईस्ट में तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में भारी उबाल देखने को मिला था। हालांकि अब दोनों पक्षों के बीच संघर्ष समाप्त होने के करीब पहुंचने के संकेत मिल रहे हैं। इसके चलते ब्रेंट क्रूड के भाव में करीब 4 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और यह 93 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड करता नजर आया।
आयात बिल घटने से कम हुआ वित्तीय दबाव
कच्चे तेल के दामों का घटना भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बेहद सकारात्मक है, क्योंकि देश अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं का एक बहुत बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात के जरिए पूरा करता है। जब वैश्विक बाजार में क्रूड ऑयल महंगा होता है, तो भारत का कुल आयात बिल काफी बढ़ जाता है। इससे करेंट अकाउंट डेफिसिट पर अतिरिक्त दबाव बनता है और घरेलू बाजार में अमेरिकी डॉलर की मांग तेजी से बढ़ जाती है। बाजार के जानकारों का मानना है कि कच्चे तेल के दाम घटना रुपये के लिए बहुत बड़ी राहत है, क्योंकि देश अपनी तेल जरूरतों के लिए आयात पर भारी मात्रा में निर्भर रहता है।
रिजर्व बैंक के कदमों से बढ़ा डॉलर का इनफ्लो
कच्चे तेल में नरमी के अलावा भारतीय रुपये को देश में बढ़ रहे डॉलर के प्रवाह यानी इनफ्लो से भी मजबूत सहारा मिला है। हाल ही में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने घरेलू बाजार में विदेशी मुद्रा की उपलब्धता बढ़ाने के लिए कई प्रभावी कदम उठाए हैं, जिससे देश में डॉलर का आना तेज हुआ है। केंद्रीय बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा के अनुसार, जून महीने में की गई घोषणा के बाद से अब तक लगभग 32 अरब डॉलर का विदेशी निवेश और मुद्रा देश के भीतर आ चुकी है। इससे पहले जुलाई के मध्य तक यह आंकड़ा लगभग 20 अरब डॉलर के आसपास दर्ज किया गया था।
मुद्रा बाजार में स्थिरता बनाए रखने में मदद
घरेलू बाजार में अधिक मात्रा में डॉलर आने से भारतीय मुद्रा को स्वतः मजबूती मिलती है। इसके अलावा विदेशी मुद्रा का इनफ्लो बढ़ने से रिजर्व बैंक के लिए रुपये की विनिमय दर में होने वाले अत्यधिक उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करना भी काफी आसान हो जाता है। इससे समग्र करेंसी मार्केट में स्थिरता बनी रहती है और निवेशकों का भरोसा भी मजबूत होता है।




















