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जून-जुलाई के सूखे के बाद अगस्त की बारिश ने बचाई धान की खेती, कृषि वैज्ञानिकों ने दी खास सलाहव्यापार
25 अग॰ 2026, 9:13 am (19 दिन पहले)· 2

जून-जुलाई के सूखे के बाद अगस्त की बारिश ने बचाई धान की खेती, कृषि वैज्ञानिकों ने दी खास सलाह

झारखंड के पलामू में जून और जुलाई के सूखे के बाद अगस्त में हुई अच्छी बारिश से धान किसानों को राहत मिली है। कृषि वैज्ञानिक अब किसानों को कम अवधि और सूखे को सहन करने वाले धान के प्रभेद चुनने की सलाह दे रहे हैं ताकि बेहतर पैदावार मिल सके।

झारखंड के पलामू इलाके में मानसून के शुरुआती महीनों यानी जून और जुलाई के दौरान मौसम की बेरुखी और कम बारिश ने खरीफ फसलों, खासकर धान की खेती को बुरी तरह प्रभावित किया था। समय पर पानी न बरसने के कारण कई इलाकों में किसान तय वक्त पर धान की रोपाई नहीं कर पाए थे, जिससे उनकी चिंताएं लगातार बढ़ रही थीं। हालांकि, अगस्त के महीने में हुई बेहतर बारिश ने इन किसानों के लिए उम्मीद की एक नई किरण जगाई है। इस बदले हुए मौसम के बाद कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को कम अवधि में तैयार होने वाले धान के प्रभेदों को चुनने की सलाह दी है, ताकि कम वक्त में फसल उगाकर बेहतर पैदावार और मुनाफा हासिल किया जा सके।

क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र चियांकी के कृषि वैज्ञानिक डॉ. अखिलेश शाह ने इस स्थिति पर बात करते हुए बताया कि किसान इस समय कम समय में पकने वाली किस्मों का चुनाव कर सकते हैं, जो उनके लिए एक बहुत ही शानदार विकल्प साबित हो सकता है। किसान चाहें तो ब्राउन बोरा जैसे कम अवधि वाले धान के प्रभेद को अपना सकते हैं। इसके अलावा, हाइब्रिड किस्मों में ऐसे प्रभेदों का चयन किया जा सकता है जो केवल 100 से 105 दिन के भीतर पूरी तरह तैयार हो जाते हैं। इन खास किस्मों में पीएससी-807 प्रभेद को चुनना काफी फायदेमंद हो सकता है। इन कम अवधि वाली किस्मों की सबसे बड़ी खूबी यह है कि अगर इन्हें थोड़ा देर से भी लगाया जाए, तब भी इन्हें पकने के लिए बहुत ज्यादा समय की आवश्यकता नहीं होती है।

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सूखे से निपटने में हाइब्रिड धान की उपयोगिता

विशेषज्ञों का कहना है कि पारंपरिक और लंबी अवधि वाले धान की खेती पूरी तरह से अनुकूल मौसम पर निर्भर करती है। यदि फसल में बालियां निकलते समय या फ्लावरिंग के महत्वपूर्ण चरण में खेत में पर्याप्त नमी नहीं मिलती है, तो धान के दाने बनने की प्रक्रिया बुरी तरह प्रभावित होती है और कुल उत्पादकता में भारी गिरावट आ जाती है। इसके विपरीत, हाइब्रिड धान की कई ऐसी किस्में मौजूद हैं जिनमें सूखे और पानी की कमी को सहने की क्षमता काफी अधिक होती है। ऐसे में जिन क्षेत्रों में बारिश कम हुई है या मिट्टी में नमी की कमी बनी हुई है, वहां के किसान हाइब्रिड धान के इस विकल्प को अपनाकर जोखिम को कम कर सकते हैं।

टांड़ खेतों के लिए उपयुक्त किस्में और सीधी बुआई

पलामू और उसके आसपास के इलाकों में टांड़ यानी ऊंचे खेतों में हमेशा से ही कम अवधि वाली धान की खेती करने का पुराना चलन रहा है। ऐसे खेतों में किसान हमेशा से ऐसी किस्मों को प्राथमिकता देते आए हैं जो बेहद कम समय में बिना ज्यादा पानी के पक कर तैयार हो जाएं। मौजूदा मौसम के हालात को देखते हुए कृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि इसी तरह की कम समय लेने वाली किस्मों के दायरे को और बढ़ाना किसानों के लिए बेहद उपयोगी साबित हो सकता है। इसके साथ ही, जिन क्षेत्रों में अगस्त के दौरान पर्याप्त बारिश हो चुकी है और खेतों में जरूरी नमी मौजूद है, वहां किसान आधुनिक मशीनों की मदद से धान की सीधी बुआई का रास्ता भी चुन सकते हैं। सीधी बुआई करने से पारंपरिक रोपाई में खर्च होने वाला समय और भारी मेहनत, दोनों की बड़ी बचत होती है। इस तकनीक के जरिए किसान 100 से 105 दिन में पकने वाले प्रभेदों को आसानी से उगा सकते हैं और इस लेट सीजन में भी अच्छी पैदावार पा सकते हैं।

सवाल-जवाब

जून और जुलाई में कम बारिश का धान की खेती पर क्या असर पड़ा था?
समय पर बारिश न होने के कारण कई क्षेत्रों में किसान समय पर धान की रोपाई नहीं कर पाए थे जिससे खेती प्रभावित हुई।
अगस्त की बारिश के बाद कृषि विशेषज्ञ किसानों को क्या सलाह दे रहे हैं?
विशेषज्ञ कम अवधि और कम समय में तैयार होने वाले धान के प्रभेद चुनने की सलाह दे रहे हैं।
कम अवधि वाले धान की कौन सी किस्में किसानों के लिए उपयोगी हैं?
किसान ब्राउन बोरा और 100 से 105 दिन में तैयार होने वाली पीएससी-807 जैसी हाइब्रिड किस्मों का चयन कर सकते हैं।
हाइब्रिड धान सूखे की स्थिति में कैसे फायदेमंद है?
हाइब्रिड धान के कुछ प्रभेदों में सूखा सहने की बेहतर क्षमता होती है जिससे नमी की कमी वाले क्षेत्रों में भी अच्छी पैदावार मिलती है।
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