घरों की बालकनी अक्सर खुली और शांत जगह होती है, जिसके चलते कई बार मधुमक्खियां वहां अपना ठिकाना बना लेती हैं। छत्ता बन जाने के बाद बालकनी में कदम रखना भी जोखिम भरा हो जाता है, क्योंकि डंक लगने की आशंका हमेशा बनी रहती है। लोग अक्सर अपनी सुविधानुसार इसे तुरंत हटाने की कोशिश में जुट जाते हैं, परंतु यह कार्य जितना सामान्य दिखता है, वास्तव में उतना ही संवेदनशील और जोखिम भरा होता है। बिना तैयारी या जानकारी के छत्ते के पास जाना भारी मुसीबत को न्योता देना साबित हो सकता है।
मधुमक्खियों का व्यवहार और डंक का जोखिम
प्राकृतिक रूप से मधुमक्खियां आक्रामक नहीं होती हैं और वे बेवजह किसी पर हमला नहीं करतीं। उनका आक्रामक रूप तभी सामने आता है जब उन्हें अपने बसेरे पर किसी खतरे या छेड़छाड़ का आभास होता है। जब कोई व्यक्ति छत्ते को छूने, हिलाने, लाठी मारने या बिना पुख्ता साधनों के हटाने की चेष्टा करता है, तब वे झुंड में हमलावर हो जाती हैं। इनके डंक से न केवल असहनीय दर्द और सूजन होती है, बल्कि संवेदनशील शारीरिक प्रकृति वाले कुछ व्यक्तियों में यह गंभीर एलर्जिक रिएक्शन भी पैदा कर सकता है। इसी वजह से इन्हें हटाते वक्त अत्यधिक सतर्कता बरतना आवश्यक माना जाता है।
घरेलू नुस्खों के इस्तेमाल में बरती जाने वाली सावधानियां
आम तौर पर लोग धुआं सुलगाने या सिरके का छिड़काव करने जैसे पारंपरिक तरीके अपनाकर मधुमक्खियों को खदेड़ने का प्रयास करते हैं। यह ध्यान रखना आवश्यक है कि ऐसे नुस्खे हर बार कारगर साबित नहीं होते हैं। अधूरा या गलत तरीका मधुमक्खियों को शांत करने के बजाय उन्हें और अधिक भड़का सकता है। यदि कोई घरेलू तरीका आजमाना भी हो, तो सबसे पहले स्वयं और परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए।
- छत्ते के एकदम समीप जाने से पूरी तरह परहेज करें ताकि उनकी शांति भंग न हो।
- शरीर को सिर से पैर तक पूरी तरह से ढकने वाले मोटे और सुरक्षित कपड़े पहनें।
- चेहरे, आंखों और हाथों को बचाने के लिए सुरक्षात्मक गियर या दस्ताने अवश्य इस्तेमाल करें।
- घर के छोटे बच्चों और पालतू जानवरों को बालकनी तथा आसपास के दायरे से बिल्कुल दूर रखें।
- कमरे की खिड़कियां, जाली और दरवाजे पूरी तरह बंद रखें ताकि बाहर उड़ रही मधुमक्खियां भीतर प्रवेश न कर सकें।
विशेषज्ञों की सहायता और रोकथाम के प्रभावी उपाय
अगर बालकनी में बना छत्ता काफी बड़ा है या फिर ऐसी जगह स्थित है जहां घर के सदस्यों का निरंतर आवागमन रहता है, तो स्वयं कोई प्रयोग करने के बजाय कीट नियंत्रण सेवा यानी पेस्ट कंट्रोल विशेषज्ञों की सहायता लेनी चाहिए। प्रशिक्षित पेशेवर उचित सुरक्षा उपकरणों के साथ छत्ते को सुरक्षित रूप से हटा देते हैं या आवश्यकतानुसार उसे किसी अन्य स्थान पर स्थानांतरित करने का काम बखूबी संभाल लेते हैं। इसके अलावा दोबारा छत्ता बनने से रोकने के लिए बालकनी के हर कोने की महीने में कम से कम एक बार गहन सफाई करनी चाहिए। सफाई के पश्चात सिरके का हल्का छिड़काव भी किया जा सकता है, क्योंकि इसकी तीखी गंध के प्रभाव से कीट दोबारा वहां अपना डेरा जमाने से कतराते हैं।



















