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सितंबर में लगाएं इन 5 फूलों के बीज, सर्दियों में महक उठेगा आपका गार्डनजीवनशैली
25 सित॰ 2026, 9:46 pm (1 दिन पहले)· 1

सितंबर में लगाएं इन 5 फूलों के बीज, सर्दियों में महक उठेगा आपका गार्डन

मानसून खत्म होते ही सर्दियों के फूलों की तैयारी शुरू करने का यह सबसे सही समय है। बागवानी विशेषज्ञ डॉ डी एस श्रीवास्तव ने सिनेरिया, पेटूनिया और ल्यूपिन जैसे खूबसूरत फूलों को उगाने के जरूरी तरीके साझा किए हैं।

मानसून के विदा होते ही सितंबर और अक्टूबर का समय होम गार्डन के शौकीनों के लिए बेहद व्यस्त और महत्वपूर्ण हो जाता है। सर्दियों का मौसम फूलों की सबसे शानदार विविधता और रंगों की छटा लेकर आता है। अगर आप चाहते हैं कि दिसंबर और जनवरी की ठंड में आपका आंगन और बालकनी रंग-बिरंगे फूलों से खिलखिला उठे, तो उसकी नींव सितंबर के अंतिम सप्ताह तक रखनी होगी। इस मौसम में सही समय पर बीज लगाने से पौधों को अच्छी तरह विकसित होने का पूरा मौका मिलता है।

छांव वाली जगहों के लिए सिनेरिया एक बेहतरीन विकल्प

सर्दियों के बगीचे में रोशनी की स्थिति हर कोने में एक जैसी नहीं होती। पलामू जिले के विशेषज्ञ डॉ डी एस श्रीवास्तव के अनुसार, सिनेरिया विंटर सीजन का एक बेहद आकर्षक और सजावटी पौधा है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह कम सीधी धूप वाली जगहों पर भी बहुत खूबसूरती से पनपता है। जिन घरों या फ्लैटों की बालकनी में हल्की रोशनी आती है, वहां सिनेरिया को आसानी से लगाया जा सकता है। इसके पौधों पर गुच्छों में छोटे-छोटे फूल खिलते हैं जो देखने में काफी सघन और मनमोहक लगते हैं। ठंड के दिनों में सीमित धूप मिलने के बाद भी यदि इसकी उचित देखभाल की जाए, तो इसमें लंबे समय तक लगातार फूल आते रहते हैं।

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नेमेसिया और डेजी से भरें फूलों के कंटेनर

बगीचे में विविधता जोड़ने के लिए नेमेसिया और डेजी यानी गुलबहार शानदार विकल्प साबित होते हैं। नेमेसिया के पौधे को रोजाना लगभग तीन से चार घंटे की धूप की जरूरत होती है। इसे बहुत बड़े गमले की आवश्यकता नहीं होती, बल्कि छह से सात इंच के कंटेनर में यह पौधा बहुत आराम से फैल जाता है और अच्छी फ्लावरिंग करता है। वहीं दूसरी तरफ, डेजी भी शीतकालीन गार्डनिंग के लिए बेहद लोकप्रिय विकल्प है। डेजी को लगाने के लिए छह से आठ इंच का गमला या फिर चौड़ी सीडलिंग ट्रे सबसे बेहतर मानी जाती है। सितंबर के अंत तक इसके बीजों की बुवाई करने से आने वाले महीनों में पौधों की वनस्पति वृद्धि मजबूत होती है और सर्दी आते-आते भरपूर कलियां खिलने लगती हैं।

पेटूनिया की नाजुक सीडलिंग में बरतें विशेष सावधानी

सर्दियों के मौसम का राजा माने जाने वाले पेटूनिया की बुवाई करते वक्त बागवानों को विशेष धैर्य और सावधानी बरतने की जरूरत होती है। पेटूनिया के बीज आकार में बेहद सूक्ष्म और धूल के महीन कणों जैसे होते हैं। अगर इन्हें बोते समय लापरवाही बरती जाए, तो बीज बह सकते हैं या गहराई में दबकर सड़ सकते हैं। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि सीड ट्रे में बीज डालने के बाद कभी भी ऊपर से तेज धार में पानी न डालें। इसके बजाय सीड ट्रे को किसी पानी से भरे उथले बर्तन में नीचे से नमी सोखने के लिए रखना सबसे सुरक्षित तरीका है। नीचे से पानी देने पर मिट्टी अपनी क्षमता अनुसार नमी सोख लेती है और बीज अपनी जगह से हिलते नहीं हैं। पेटूनिया के पौधे जब बड़े हो जाएं, तो उन्हें सामान्य गमलों के अलावा हैंगिंग बास्केट में भी लगाया जा सकता है, जहां नीचे लटकती फूलों की शाखाएं बेहद खूबसूरत दिखती हैं।

ल्यूपिन के सख्त बीजों को बोने का सही तरीका

गार्डन को एक अलग ऊंचाई और शाही लुक देने के लिए ल्यूपिन के पौधे लगाए जा सकते हैं। ल्यूपिन के फूल लंबी बालियों की तरह सीधे खड़े होते हैं, जिससे गमले की सुंदरता देखते ही बनती है। हालांकि, ल्यूपिन के बीजों का बाहरी आवरण काफी सख्त होता है, जिससे अंकुरण में समय लग सकता है। इसके बीजों को लगाने से पहले सैंड पेपर यानी रेगमाल से हल्का सा घिस लेना चाहिए और फिर लगभग छह से सात घंटे के लिए साफ पानी में भिगोकर रखना चाहिए। इस प्रक्रिया से बीजों का छिलका नरम हो जाता है और अंकुरण तेजी से होता है। ल्यूपिन को बार-बार ट्रांसप्लांट करना पसंद नहीं होता, इसलिए बेहतर यही है कि इसे सीधे उसी स्थायी गमले में बोया जाए जहां पौधे को पूरा बढ़ना हो। इसके लिए 10 से 12 इंच का बड़ा कंटेनर चुनें और गमले को ऐसी जगह रखें जहां दिन में कम से कम तीन से चार घंटे की धूप आती हो।

अंकुरण के लिए बनाएं यह खास मिट्टी का मिश्रण

बीजों के सफल जमाव और स्वस्थ पौधों के लिए सही पोटिंग मिक्स तैयार करना सबसे बुनियादी शर्त है। डॉ डी एस श्रीवास्तव के अनुसार, बीजों की बुवाई के लिए भारी चिकनी मिट्टी के बजाय एक हल्का और भुरभुरा माध्यम बनाना जरूरी है। इसके लिए 60 प्रतिशत कोकोपीट, 30 प्रतिशत वर्मी कम्पोस्ट और 10 प्रतिशत साफ रेत का संतुलन तैयार करें। कोकोपीट नमी को बनाए रखती है, वर्मी कम्पोस्ट पोषक तत्व देती है और रेत जल निकासी को आसान बनाती है। इस मिश्रण में फंगस और फफूंद के खतरे को कम करने के लिए थोड़ी मात्रा में हल्दी पाउडर मिलाना बहुत असरदार रहता है। हल्दी प्राकृतिक एंटीफंगल का काम करती है और नाजुक अंकुरों को सड़ने से बचाती है।

रासायनिक खादों से बचाव और पुरानी मिट्टी का पोषण

सर्दियों के पौधों की तैयारी करते समय अक्सर लोग पिछले सीजन के गमलों की पुरानी मिट्टी का इस्तेमाल करते हैं। ऐसी मिट्टी की उर्वरता वापस लौटाने के लिए उसमें अच्छी तरह से वर्मी कम्पोस्ट मिलाना चाहिए, जिससे मिट्टी फिर से उपजाऊ बन जाती है। इसके साथ ही रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध इस्तेमाल से बचने की सख्त हिदायत दी गई है। गमलों के सीमित वातावरण में डीएपी या यूरिया जैसी तेज रासायनिक खादों का प्रयोग बिना सही जानकारी और उचित मात्रा के बिल्कुल नहीं करना चाहिए। अत्यधिक रासायनिक खाद पौधों की नाजुक जड़ों को जला सकती है, जिससे हरा-भरा पौधा भी अचानक सूखकर नष्ट हो जाता है। संतुलित देखभाल, सही रोशनी और समय पर की गई तैयारी से पूरा शीतकालीन सत्र फूलों की खुशबू से महकता रहेगा।

सवाल-जवाब

विंटर गार्डन के लिए सितंबर में कौन से फूल लगाने की सलाह दी गई है?
विशेषज्ञ ने इस मौसम में सिनेरिया, नेमेसिया, डेजी यानी गुलबहार, पेटूनिया और ल्यूपिन के बीज लगाने की सलाह दी है।
कम धूप वाली बालकनी के लिए कौन सा फूल सबसे उपयुक्त है?
सिनेरिया कम सीधी धूप वाली जगहों पर भी बहुत अच्छी तरह बढ़ता है और गुच्छों में फूल देता है।
पेटूनिया के बीजों को पानी देते समय क्या सावधानी रखनी चाहिए?
पेटूनिया के बीज बेहद सूक्ष्म होते हैं, इसलिए ट्रे में ऊपर से पानी देने के बजाय नीचे से ट्रे को पानी देना चाहिए ताकि बीज बहें नहीं।
ल्यूपिन के बीजों को बोने से पहले कैसे तैयार किया जाता है?
ल्यूपिन के बीजों को बोने से पहले सैंड पेपर से हल्का घिसकर छह से सात घंटे पानी में भिगोया जाता है।
बीज अंकुरण के लिए मिट्टी का क्या अनुपात होना चाहिए?
इसके लिए 60 प्रतिशत कोकोपीट, 30 प्रतिशत वर्मी कम्पोस्ट और 10 प्रतिशत रेत का मिश्रण तैयार करना चाहिए।
पोटिंग मिक्स में हल्दी पाउडर मिलाने से क्या लाभ होता है?
हल्दी पाउडर मिलाने से मिट्टी में फंगस और फफूंद की समस्या को कम करने में मदद मिलती है।
गमलों में डीएपी या यूरिया जैसी रासायनिक खादों से क्यों बचना चाहिए?
बिना माप के रासायनिक खाद का अधिक उपयोग करने से पौधे की जड़ें जलकर खराब हो सकती हैं।
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