भारतीय विमानन क्षेत्र में तेजी से आ रहे उछाल को देखते हुए देश के भीतर ही पायलट प्रशिक्षण क्षमता को नए स्तर पर ले जाने की तैयारी पूरी हो चुकी है। एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने फरवरी 2026 में जारी की गई ई-टेंडर प्रक्रिया को सफलता से पूरा करते हुए देश के 7 विभिन्न हवाई अड्डों पर 11 नए फ्लाइंग ट्रेनिंग ऑर्गनाइजेशन (FTO) स्लॉट आवंटित कर दिए हैं। इस कदम का मुख्य ध्येय भारतीय एयरलाइंस में गहराते पायलट संकट को समाप्त करना तथा भविष्य की उड्डयन आवश्यकताओं के लिए सक्षम पेशेवर तैयार करना है। अगले दशक में भारतीय विमानन उद्योग को विशाल कार्यबल की आवश्यकता होगी, जिसे ध्यान में रखते हुए यह इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया जा रहा है।
भविष्य की मांग और भारतीय एयरलाइंस का व्यापक विस्तार
नागरिक उड्डयन मंत्रालय के आधिकारिक आकलन के अनुसार, आने वाले 10 वर्षों के दौरान भारतीय एविएशन सेक्टर को लगभग 30,000 से 31,000 अतिरिक्त पायलटों की आवश्यकता पड़ने वाली है। इस विशाल मांग का सीधा संबंध भारतीय एयरलाइन कंपनियों की तेजी से बढ़ रही विस्तार योजनाओं से है। अगले 5 वर्षों के भीतर देश की विभिन्न विमानन कंपनियां अपने वाणिज्यिक बेड़े में लगभग 500 नए विमान जोड़ने की तैयारी कर रही हैं। इसके साथ ही, हवाई संपर्क को मजबूत बनाने के उद्देश्य से पूरे देश में लगभग 50 नए हवाई अड्डे विकसित किए जाने की संभावना है।
इस असाधारण वृद्धि की झलक देश की प्रमुख विमानन कंपनियों के बेड़ा विस्तार योजनाओं में स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। टाटा ग्रुप के मालिकाना हक वाली एयर इंडिया अगले 18 महीनों की अवधि में अपने फ्लीट में 50 से 60 नए वाणिज्यिक हवाई जहाज शामिल करने की गहन तैयारियों में जुटी हुई है। जब बेड़े का आकार इतनी तीव्र गति से बढ़ेगा, तब पर्याप्त संख्या में योग्य तथा प्रशिक्षित पायलटों की उपलब्धता सुनिश्चित करना एक प्राथमिक आवश्यकता बन जाता है। यही कारण है कि नए प्रशिक्षण केंद्रों की स्थापना को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है।
घरेलू प्रशिक्षण क्षमता और प्रशिक्षण विमानों की संख्या
वर्तमान में देश के भीतर उड़ान प्रशिक्षण के बुनियादी ढांचे पर नजर डालें तो अप्रैल 2026 तक डीजीसीए से मान्यता प्राप्त 41 फ्लाइंग ट्रेनिंग ऑर्गनाइजेशन मौजूद हैं, जो कुल 63 फ्लाइंग बेस के माध्यम से अपना संचालन कर रहे हैं। हालांकि, घरेलू स्तर पर सीटों की सीमित उपलब्धता के कारण बड़ी संख्या में भारतीय कैडेट्स को महंगी ट्रेनिंग के लिए विदेशों का रुख करना पड़ता था। 11 नए FTO स्लॉट शुरू होने से न केवल घरेलू प्रशिक्षण की क्षमता में भारी बढ़ोतरी होगी, बल्कि भारतीय छात्रों की विदेश जाने की निर्भरता भी काफी हद तक कम हो जाएगी।
इन नए स्थापित होने वाले 11 प्रशिक्षण संस्थानों के बेड़े में शुरुआती चरण के दौरान 60 से 70 ट्रेनिंग विमान शामिल किए जाने की उम्मीद है। जब ये सभी केंद्र अपनी पूर्ण परिचालन क्षमता हासिल कर लेंगे, तब इनके पास उपलब्ध प्रशिक्षण विमानों की कुल संख्या बढ़कर 110 से 120 तक पहुंच जाएगी। क्षमता विस्तार का सीधा सकारात्मक असर वार्षिक स्नातक होने वाले एविएशन प्रोफेशनल्स की संख्या पर दिखेगा। शुरुआत में इन नए केंद्रों से हर साल 400 से 500 उड्डयन विशेषज्ञों को प्रशिक्षित किया जा सकेगा, जो पूर्ण क्षमता पर पहुंचकर प्रति वर्ष लगभग 1,500 तक हो जाएगा।
कमर्शियल पायलट लाइसेंस के आंकड़ों में निरंतर उछाल
भारत में कमर्शियल पायलट लाइसेंस हासिल करने वाले युवाओं की संख्या में पिछले कुछ वर्षों के दौरान रिकॉर्ड वृद्धि दर्ज की गई है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2018 में जारी किए गए कमर्शियल पायलट लाइसेंस (CPL) की संख्या जहां 640 थी, वहीं वर्ष 2024 में यह आंकड़ा बढ़कर 1,628 तक पहुंच गया। यह वृद्धि देश के युवाओं में विमानन क्षेत्र के प्रति बढ़ते आकर्षण और करियर के नए अवसरों को दर्शाती है।
हाल के वर्ष में डीजीसीए द्वारा विदेशी उड़ान प्रशिक्षण संस्थानों से ट्रेनिंग पूरी करके वापस लौटे कैडेट्स को 615 CPL जारी किए गए। इसके अतिरिक्त, उड्डयन क्षेत्र में कदम रखने वाले नए अभ्यर्थियों को 2,309 स्टूडेंट पायलट लाइसेंस (SPL) भी जारी किए गए हैं। यह आंकड़े स्पष्ट करते हैं कि देश में पायलट बनने की दिशा में पंजीकरण और रुचि में अभूतपूर्व बढ़ोतरी हो रही है।
रीजनल एयरपोर्ट्स का लाभ और सस्ती विमानन शिक्षा
देश के रीजनल एयरपोर्ट्स पर नए FTO की स्थापना से पायलट बनने का सपना देखने वाले छात्रों को अत्यधिक लाभ मिलने की उम्मीद है। बड़े महानगरों के बजाय क्षेत्रीय हवाई अड्डों पर ट्रेनिंग की सुविधा मिलने से छात्रों के लिए प्रशिक्षण अधिक सुलभ, व्यावहारिक और किफायती बन सकेगा। इसके अलावा, इस पहल से देश के क्षेत्रीय हवाई अड्डा इंफ्रास्ट्रक्चर का समुचित और कुशल उपयोग भी सुनिश्चित हो सकेगा। सरकार का यह कदम भारत के तेजी से फैल रहे विमानन बाजार के लिए कुशल मानव संसाधन तैयार करने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा।



















