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खेत में बरसात भर रहता है पानी? जलडुबी धान बचाएगी फसल और मुनाफा, जानिए एक्सपर्ट की सलाहव्यापार
16 जून 2026, 6:02 pm (133 दिन पहले)· 4

खेत में बरसात भर रहता है पानी? जलडुबी धान बचाएगी फसल और मुनाफा, जानिए एक्सपर्ट की सलाह

छत्तीसगढ़ के निचले इलाकों में जहां बारिश में लंबे समय तक पानी भरा रहता है, वहां जलडुबी धान बेहतर विकल्प है, जो करीब 150 से 155 दिनों में तैयार होकर 20 से 25 क्विंटल प्रति एकड़ तक उत्पादन देती है।

खरीफ सीजन की दस्तक के साथ ही छत्तीसगढ़ के किसान धान की बुआई का खाका तैयार करने में जुट गए हैं। मगर राज्य के कई हिस्सों में खेती उतनी सीधी नहीं है जितनी दिखती है। यहां ऐसी कई जमीनें हैं जहां बरसात शुरू होते ही पानी जमा होने लगता है और महीनों तक नहीं उतरता। ऐसी जमीन पर किसान कौन सी किस्म लगाएं, यह सवाल हर साल उनके सामने खड़ा होता है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि अगर जमीन के मिजाज के हिसाब से धान की किस्म चुन ली जाए, तो न तो उत्पादन गिरेगा और न ही किसान को घाटा उठाना पड़ेगा।

निचली जमीन की असली परेशानी

कृषि विज्ञान केंद्र बालोद के विषय वस्तु विशेषज्ञ ए. आर. गौर के मुताबिक छत्तीसगढ़ के कई निचले इलाकों में बारिश के दौरान खेत तालाब जैसे बन जाते हैं। स्थानीय बोली में इन्हें बाहरा जमीन कहा जाता है। समस्या तब शुरू होती है जब किसान ऐसी जमीन पर धान की आम किस्म लगा देते हैं। लगातार पानी में डूबे रहने की वजह से पौधों की जड़ें गलने लगती हैं, पौधे कमजोर पड़ जाते हैं और आखिरकार गिर जाते हैं। नतीजा सीधे फसल पर दिखता है और किसान की जेब पर भारी पड़ता है।

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जलडुबी धान क्यों है बेहतर विकल्प

ए. आर. गौर बताते हैं कि इसी मुश्किल का तोड़ है जलडुबी धान। यह किस्म खासतौर पर उन्हीं हालात के लिए तैयार की गई है जहां खेत में लंबे समय तक पानी ठहरा रहता है। इसकी सबसे बड़ी खूबी यह है कि ज्यादा पानी होने के बाद भी इसकी जड़ें सुरक्षित बनी रहती हैं और फसल की बढ़त सामान्य रफ्तार से चलती रहती है। यानी जो पानी आम धान की जड़ों के लिए जानलेवा साबित होता है, वही इस किस्म को कोई खास नुकसान नहीं पहुंचा पाता।

कितने दिन में तैयार, कितना उत्पादन

विशेषज्ञ के अनुसार जलडुबी धान करीब 150 से 155 दिनों में पककर तैयार हो जाती है। इसकी उत्पादन क्षमता लगभग 20 से 25 क्विंटल प्रति एकड़ आंकी गई है, जो जलभराव वाली जमीन के लिहाज से अच्छी पैदावार मानी जाती है। ए. आर. गौर का कहना है कि यह किस्म खासकर उन किसानों के काम की है जिनके खेत नालों के पास, नदी किनारे या ऐसी जगहों पर हैं जहां बारिश के बाद अक्सर बाढ़ जैसे हालात बन जाते हैं।

एक्सपर्ट की किसानों से अपील

गौर ने किसानों से कहा है कि किस्म चुनने से पहले वे अपने खेत की भौगोलिक स्थिति और वहां पानी की उपलब्धता पर जरूर गौर करें। उनका मानना है कि सही किस्म का चुनाव सिर्फ उत्पादन ही नहीं बढ़ाता, बल्कि खेती में आने वाले जोखिम और संभावित नुकसान को भी काफी हद तक कम कर देता है।

सवाल-जवाब

जलडुबी धान क्या है और यह किसके लिए है?
यह धान की एक खास किस्म है जो लगातार पानी भरे रहने वाली जमीन के लिए विकसित की गई है। यह उन किसानों के लिए है जिनके खेत निचले इलाकों, नालों या नदी किनारे हैं।
जलडुबी धान कितने दिनों में तैयार होती है?
विशेषज्ञ के अनुसार यह किस्म करीब 150 से 155 दिनों में पककर तैयार हो जाती है।
इस किस्म से कितना उत्पादन मिल सकता है?
इसकी उत्पादन क्षमता लगभग 20 से 25 क्विंटल प्रति एकड़ मानी जाती है, जो जलभराव वाली जमीन के लिए अच्छी पैदावार है।
आम धान निचली जमीन में क्यों नहीं चलती?
लगातार पानी में डूबे रहने से आम धान की जड़ें सड़ने लगती हैं और पौधे कमजोर होकर गिर जाते हैं, जिससे उत्पादन घट जाता है।
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