निवेश की दुनिया में सोना सालों से भरोसे का दूसरा नाम रहा है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में जिस रफ्तार से इसके दाम चढ़े हैं, उसने हर किसी का ध्यान खींच लिया है. अब बाजार से जुड़े कुछ जानकारों का अनुमान है कि अगले कुछ साल में सोना और महंगा होगा और 2030 तक 1 ग्राम सोने की कीमत करीब 30,000 रुपये तक पहुंच सकती है. इसी हिसाब से देखें तो 8 ग्राम सोने का दाम करीब 2.4 लाख रुपये तक चला जाएगा.
यह सिर्फ एक अनुमान है, कोई पक्का आंकड़ा नहीं. लेकिन इतना जरूर है कि इससे आने वाले सालों की दिशा का संकेत मिलता है, यानी सोना धीरे-धीरे आम लोगों की पहुंच से दूर होता दिख रहा है. यही वजह है कि इसे भविष्य के लिए एक कीमती निवेश के तौर पर देखा जा रहा है.
आखिर क्यों चढ़ रहे हैं दाम
मौजूदा वैश्विक आर्थिक हालात, लगातार बढ़ती महंगाई और केंद्रीय बैंकों की भारी खरीदारी, इन तीनों को मिलाकर सोने की तेजी की सबसे बड़ी वजह माना जा रहा है. जानकारों का कहना है कि इन्हीं कारणों से आने वाले वर्षों में सोने के भाव नए रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच सकते हैं.
सोना लंबे समय से ऐसी संपत्ति रहा है जो महंगाई की मार से बचाने में मदद करती है. इसके दाम में उतार-चढ़ाव तो आता रहता है, फिर भी लंबी अवधि में रुझान ऊपर की ओर ही देखा गया है. इसी भरोसे की वजह से निवेशक और केंद्रीय बैंक दोनों इसे सुरक्षित निवेश मानते हैं. बढ़ती मांग और सीमित सप्लाई के चलते यह आज भी निवेशकों की पसंदीदा एसेट में बना हुआ है.
केंद्रीय बैंकों की खरीदारी ने बढ़ाया दबाव
पिछले कुछ सालों में दुनिया भर के कई देशों के केंद्रीय बैंकों ने बड़े पैमाने पर अपना गोल्ड रिजर्व बढ़ाया है. इससे बाजार में सोने की मांग लगातार मजबूत बनी हुई है. जब मांग तेजी से बढ़े और सप्लाई उतनी न हो, तो कीमतों पर ऊपर की ओर दबाव बनना तय है. यही कारण है कि ग्लोबल अनिश्चितता, महंगाई और बैंकों की बढ़ती खरीद को तेजी की अहम वजहों में गिना जा रहा है.
सीमित सप्लाई भी बड़ा फैक्टर
दाम चढ़ने की एक बड़ी वजह सोने की सीमित आपूर्ति भी है. जानकारों के मुताबिक नई सोने की खानों की खोज की रफ्तार सुस्त पड़ गई है, जबकि पुरानी खानों से सोना निकालने का खर्च लगातार बढ़ रहा है. खनन कंपनियों को प्रोडक्शन के लिए पहले से ज्यादा पैसा लगाना पड़ रहा है, जिसका सीधा असर सप्लाई पर पड़ता है. दूसरी तरफ निवेशकों, ज्वेलरी सेक्टर और केंद्रीय बैंकों की मांग जस की तस मजबूत बनी हुई है. मांग और सप्लाई के इसी असंतुलन की वजह से कई विश्लेषक मानते हैं कि आने वाले वर्षों में दाम बढ़ने का सिलसिला बना रह सकता है.
महंगाई और रुपये की घटती ताकत
अगर आने वाले सालों में महंगाई की रफ्तार ऊंची बनी रही, तो रुपये की खरीदने की ताकत यानी पर्चेजिंग पावर में और गिरावट आ सकती है. इसका सीधा मतलब यह है कि भविष्य में वही चीजें खरीदने के लिए लोगों को ज्यादा पैसा खर्च करना पड़ेगा. ऐसे माहौल में निवेशक आमतौर पर सोने जैसी सुरक्षित संपत्तियों की ओर रुख करते हैं, जिससे इसकी मांग और बढ़ जाती है. कुछ बाजार विशेषज्ञों का अनुमान है कि 2030 तक सोने का भाव 30,000 रुपये प्रति ग्राम के स्तर तक पहुंच सकता है. हालांकि असली कीमत उस वक्त की आर्थिक स्थिति, ब्याज दरों और वैश्विक बाजार के हालात पर ही निर्भर करेगी.
निवेश से पहले इन बातों का रखें ध्यान
कई वित्तीय जानकारों का मानना है कि लंबी अवधि में सोना महंगाई से बचाव और पोर्टफोलियो में संतुलन बनाए रखने में मदद कर सकता है. लेकिन कोई भी निवेश करने से पहले अपनी आर्थिक स्थिति, जोखिम उठाने की क्षमता और निवेश के लक्ष्यों को अच्छी तरह परख लेना जरूरी है.













