महाराष्ट्र में मोटर वाहनों का प्रदूषण नियंत्रण यानी पीयूसी सर्टिफिकेट बनवाना महंगा हो गया है। परिवहन विभाग ने पीयूसी जांच की संशोधित दरों को अपनी आधिकारिक मंजूरी दे दी है, जिसके बाद राज्यभर के तमाम पीयूसी केंद्रों पर अब नई दरों के मुताबिक ही शुल्क वसूला जाएगा। यह दस्तावेज इस बात की आधिकारिक पुष्टि करता है कि संबंधित वाहन से होने वाला प्रदूषण निर्धारित मानकों के दायरे में है। महाराष्ट्र स्टेट पायूसी सेंटर ओनर्स एसोसिएशन की तरफ से पीयूसी शुल्क में बढ़ोतरी करने की पुरजोर मांग उठाई गई थी, जिस पर विचार करते हुए परिवहन विभाग ने एक तीन सदस्यीय समिति का गठन किया था। इस समिति ने देश के अन्य राज्यों में लागू पीयूसी जांच दरों और अन्य सभी जरूरी पहलुओं का बारीकी से अध्ययन करने के बाद शुल्क वृद्धि को लेकर अपनी विस्तृत रिपोर्ट सौंपी थी, जिसके आधार पर यह निर्णय लिया गया है।
नई संशोधित दरें इस प्रकार हैं
लागू की गई संशोधित दरों के मुताबिक, दोपहिया वाहनों का पीयूसी जांच शुल्क अब 50 रुपये से बढ़ाकर 60 रुपये कर दिया गया है। इसके अलावा पेट्रोल चालित तिपहिया वाहनों के लिए यह शुल्क 100 रुपये से बढ़ाकर 120 रुपये तय किया गया है। पेट्रोल, सीएनजी और एलपीजी ईंधन से संचालित होने वाले चार पहिया वाहनों के लिए जांच शुल्क 125 रुपये से बढ़ाकर 150 रुपये कर दिया गया है। वहीं, डीजल वाहनों के चालकों को अब पीयूसी जांच के लिए 150 रुपये की जगह 180 रुपये चुकाने होंगे। ये बढ़ी हुई दरें पूरे राज्य में प्रभावी कर दी गई हैं।
केंद्रों पर प्रदर्शित करनी होंगी नई दरें
राज्य के सभी पीयूसी केंद्र संचालकों को यह सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे संशोधित शुल्क की पूरी जानकारी अपने केंद्र के प्रमुख और साफ़ दिखने वाले स्थान पर बड़े अक्षरों में प्रदर्शित करें। संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी दी गई है कि सभी केंद्रों पर केवल नई दरें ही लागू हों और किसी भी वाहन चालक से निर्धारित शुल्क से एक भी रुपया अधिक न वसूला जाए। इस पूरी प्रक्रिया पर कड़ी निगरानी रखने और नियमों का सख्ती से पालन कराने के लिए वायुवेग टीमों को भी आवश्यक और कड़े निर्देश जारी किए गए हैं, ताकि मनमाने तरीके से वसूली न की जा सके।
कर्नाटक में भी बढ़ाई जा चुकी हैं फीस
महाराष्ट्र से पहले पड़ोसी राज्य कर्नाटक में भी सरकार ने इसी तरह का कदम उठाया था। कर्नाटक सरकार ने 16 अगस्त को ही पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल टेस्टिंग फीस में इजाफा किया था। वहां दोपहिया वाहनों की टेस्टिंग फीस 65 रुपये से बढ़ाकर 80 रुपये की गई थी, जबकि तिपहिया वाहनों के लिए यह फीस 75 रुपये से बढ़ाकर 80 रुपये तय की गई थी। इसके अलावा पेट्रोल, एलपीजी या सीएनजी से चलने वाले चार पहिया वाहनों की फीस 115 रुपये से बढ़कर 150 रुपये और डीजल गाड़ियों की फीस 160 रुपये से बढ़ाकर 200 रुपये कर दी गई थी। कर्नाटक सरकार का कहना था कि वाहनों की जांच से जुड़े ऑपरेशनल और मेंटेनेंस खर्चों में भारी बढ़ोतरी हो चुकी है, जिसकी वजह से फीस बढ़ाना जरूरी हो गया था।
कर्नाटक में शुल्क वृद्धि के पीछे ये कारण थे
कर्नाटक में यह बदलाव कर्नाटक पॉल्यूशन टेस्टिंग सेंटर ओनर्स एसोसिएशन, बेंगलुरु की तरफ से दिए गए एक रिप्रेजेंटेशन के बाद ट्रांसपोर्ट और रोड सेफ्टी कमिश्नर के प्रस्ताव के आधार पर किया गया था। एसोसिएशन ने अपनी मांग के समर्थन में कच्चे माल, पेट्रोल और डीजल की कीमतों, रोजाना इस्तेमाल होने वाली वस्तुओं, टेस्टिंग सेंटर के भारी किराए, इंटरनेट सुविधाओं के खर्च, उपकरणों के रख-रखाव, प्रिंटर कार्ट्रिज, बिजली के बिल और कर्मचारियों के वेतन समेत तमाम अन्य ऑपरेशनल खर्चों में लगातार हुई वृद्धि का हवाला दिया था। इन सभी आर्थिक दबावों के चलते संचालकों के लिए पुरानी दरों पर काम चलाना मुश्किल हो रहा था, जिसके बाद वहां भी शुल्क बढ़ाने का फैसला लिया गया।



















