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मानसून में तालाब बना मछलियों के लिए खतरा, जानें बचाव के आसान तरीकेव्यापार
25 जून 2026, 6:42 am (124 दिन पहले)· 3

मानसून में तालाब बना मछलियों के लिए खतरा, जानें बचाव के आसान तरीके

बारिश के दिनों में तालाब का पानी दूषित होने से मछलियों के मरने का खतरा बढ़ जाता है। विशेषज्ञों के मुताबिक मेड़ मजबूत करना, चूना और एयरेटर जैसे उपाय अपनाकर मत्स्य पालक अपना नुकसान रोक सकते हैं।

बहराइच में बारिश का मौसम शुरू होते ही मछली पालन करने वालों की मुश्किलें बढ़ जाती हैं। इस दौरान तालाब में बाहर का गंदा पानी घुसने और सही देखभाल न होने की वजह से मत्स्य पालकों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। ऐसे में सवाल यही है कि तालाब का ध्यान कैसे रखा जाए ताकि मछलियां सुरक्षित रहें और मेहनत पर पानी न फिरे।

दरअसल मानसून आते ही तालाबों पर खास नजर रखनी पड़ती है। इस मौसम में जल स्तर अचानक तेजी से बढ़ता है, पानी का पीएच मान गड़बड़ा जाता है और कीड़े-मकोड़ों का प्रकोप भी बढ़ जाता है। यही वह वक्त होता है जब लगातार खारा और गंदा पानी तालाब में जाता रहता है। कुछ समय बाद पूरा तालाब दूषित हो जाता है और मछलियां मरने लगती हैं। इसलिए इन दिनों बेहद सावधानी बरतने की जरूरत होती है।

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बारिश से पहले मजबूत करें तालाब की मेड़

मानसून में तालाब की सुरक्षा का सबसे पहला कदम है मेड़बंदी को मजबूत करना। अगर मेड़ नीची या कमजोर रह गई तो बाहर का पानी आसानी से तालाब में मिलकर पूरे सिस्टम को बिगाड़ देता है। इसके साथ ही तालाब के निकास पर जाली लगाना जरूरी है, इससे कचरा भी नियंत्रित रहता है। पानी का पीएच 7.5 से 8.5 के बीच बनाए रखने के लिए चूने का इस्तेमाल अनिवार्य माना जाता है।

ऑक्सीजन और बीमारी से बचाव

पानी में ऑक्सीजन की कमी रोकने के लिए एयरेटर का इस्तेमाल करना चाहिए। खास बात यह है कि सरकार इस पर अनुदान भी दे रही है। बीमारियों से बचाव के लिए डॉक्टर की सलाह लेकर पोटैशियम परमैंगनेट का छिड़काव जरूर करना चाहिए। विशेषज्ञ बताते हैं कि जब आसमान में घने बादल छाए हों, उस दौरान मछलियों को चारा देना कम कर देना चाहिए।

परेशानी बढ़े तो विभाग से लें मदद

अगर बारिश के सीजन में सब कुछ करने के बावजूद हालात समझ में न आएं और इन सभी तरकीबों को अपनाने के बाद भी नुकसान होता दिखे, तो देर न करें। ऐसी स्थिति में तुरंत मत्स्य पालन विभाग से संपर्क करके मदद लेनी चाहिए, ताकि समय रहते बचाव हो सके।

सवाल-जवाब

बरसात में मछलियां क्यों मरने लगती हैं?
इस मौसम में तालाब में लगातार खारा और गंदा पानी जाने से पूरा तालाब दूषित हो जाता है, जिससे मछलियां मरने लगती हैं।
तालाब के पानी का पीएच कितना होना चाहिए?
पानी का पीएच 7.5 से 8.5 के बीच बनाए रखना चाहिए, और इसके लिए चूने का इस्तेमाल जरूरी माना जाता है।
एयरेटर का क्या काम है और क्या इस पर मदद मिलती है?
एयरेटर पानी में ऑक्सीजन की कमी रोकता है, और सरकार इस पर अनुदान भी दे रही है।
घने बादल होने पर क्या करना चाहिए?
विशेषज्ञों के मुताबिक जब आसमान में घने बादल छाए हों तो मछलियों को चारा देना कम कर देना चाहिए।
बीमारियों से बचाव के लिए क्या करें?
बीमारियों से बचाव के लिए डॉक्टर की सलाह लेकर पोटैशियम परमैंगनेट का छिड़काव करना चाहिए।
नुकसान न रुके तो किससे संपर्क करें?
सभी उपाय अपनाने के बाद भी नुकसान दिखे तो तुरंत मत्स्य पालन विभाग से संपर्क करके मदद लेनी चाहिए।
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