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दो भैंस से सालभर में दो लाख रुपये, जानिए डेयरी फार्म में कौन सी नस्ल बनाएगी मालामालव्यापार
25 जून 2026, 7:36 am (45 दिन पहले)· 3

दो भैंस से सालभर में दो लाख रुपये, जानिए डेयरी फार्म में कौन सी नस्ल बनाएगी मालामाल

कम लागत में शुरू होने वाली डेयरी फार्मिंग सही नस्ल और स्मार्ट प्लानिंग के साथ हर महीने मोटी कमाई दे सकती है। जानिए कौन सी गाय और भैंस की नस्ल आपको लखपति बना सकती है।

नौकरी की भागदौड़ छोड़कर खुद का मालिक बनना चाहते हैं और चाहते हैं कि हर महीने जेब नोटों से भरी रहे, तो डेयरी फार्मिंग एक ऐसा रास्ता है जो कम पूंजी में भी शानदार रिटर्न दे सकता है। विंध्य की मिट्टी और यहां की आबोहवा पशुपालन के लिए बेहद अनुकूल मानी जाती है। बस जरूरत है सही जानकारी, सही नस्ल और थोड़ी समझदारी भरी प्लानिंग की। अगर शुरुआत सोच समझकर की जाए, तो यह कारोबार आपको जल्दी ही लखपति बना सकता है।

नस्ल का चुनाव ही पहली शर्त

डेयरी को मुनाफे का सौदा बनाना है तो सबसे पहला फैसला नस्ल को लेकर लेना होता है। सतना के नकैला मझगवां ब्लॉक के पशु चिकित्सक डॉ बालेंद्र सिंह बताते हैं कि यहां के मौसम और चारे के लिहाज से भैंसों में मुर्रा और भदावरी सबसे बढ़िया रहती हैं। मुर्रा भैंस को पशुपालन की दुनिया में ‘काला सोना’ कहा जाता है, जो एक ब्यात में 2000 से 2500 लीटर तक दूध देती है। वहीं अगर आपका मकसद खोया और घी का धंधा है, तो भदावरी भैंस सबसे फिट बैठती है, क्योंकि इसके दूध में सबसे ज्यादा 8 से 13 फीसदी तक फैट पाया जाता है।

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गायों की बात करें तो विंध्य की चिलचिलाती गर्मी को आसानी से झेल लेने वाली देसी साहीवाल गाय बेहतरीन है, जो रोजाना 15 से 25 लीटर दूध देती है। प्रीमियम A2 दूध चाहिए तो गीर गाय एक उम्दा विकल्प है। और अगर आप हाईटेक तरीके से बड़े पैमाने पर काम करना चाहते हैं, तो जर्सी या एचएफ क्रॉस गायें भी पाली जा सकती हैं।

दूध बढ़ाने के पांच असली कारक

सिर्फ पशु खरीद लेना काफी नहीं है। दूध की मात्रा और उसकी क्वालिटी मुख्य रूप से पांच बातों पर टिकी होती है। सबसे पहली है नस्ल, क्योंकि मुर्रा या साहीवाल जैसी उन्नत नस्लें आनुवंशिक रूप से ही ज्यादा दूध देने वाली होती हैं। दूसरी अहम बात है संतुलित आहार। सिर्फ सूखे भूसे से काम नहीं चलेगा, पशु को हरा चारा और मिनरल मिक्सचर से भरपूर खुराक देनी होगी, जो सीधे दूध की मात्रा और फैट दोनों बढ़ाती है।

तीसरा बड़ा कारण मौसम है। तेज गर्मी या उमस में पशु तनाव में आ जाते हैं और दूध का उत्पादन 15 से 20 फीसदी तक गिर जाता है। इससे बचने के लिए गर्मियों में शेड के अंदर और बाहर का तापमान सही रखने के लिए कूलिंग पैड या पंखे लगाने चाहिए। चौथा कारक है पशु की उम्र और ब्यात। तीसरी या चौथी बार मां बनी भैंस या गाय ज्यादा दूध देती है। और पांचवां, स्वास्थ्य प्रबंधन, यानी थनैला बीमारी से बचाव, समय पर कीड़े मारने की दवा और दूध निकालने का तय समय भी उत्पादन को पूरी तरह तय करते हैं।

लागत घटाने और सरकारी मदद का गणित

डेयरी का सारा खेल लागत घटाने और मुनाफा बढ़ाने पर टिका है। इसके लिए साइलेज तकनीक अपनानी चाहिए, जिससे चारे को सुरक्षित रखा जा सके और सालभर हरे चारे की कमी न खले। अपने फार्म की बछड़ियों और कटियों की नस्ल सुधारने के लिए हमेशा अच्छी क्वालिटी के सीमेन से कृत्रिम गर्भाधान करवाएं।

सबसे राहत की बात यह है कि इस सबके लिए पूरा पैसा अपनी जेब से लगाने की जरूरत नहीं है। मध्य प्रदेश सरकार की मुख्यमंत्री पशुपालन विकास योजना या नाबार्ड की सब्सिडी योजनाओं का फायदा उठाकर बेहद कम लागत और आर्थिक मदद के साथ अपना डेयरी फार्म खड़ा किया जा सकता है।

अब बात कमाई की

अब उस सवाल पर आते हैं जिसका सबको इंतजार रहता है, यानी कमाई। डेयरी फार्मिंग में औसतन एक उन्नत नस्ल के पशु से चारा, दाना और दवाई का सारा खर्च निकालने के बाद सालाना एक से डेढ़ लाख रुपये तक का शुद्ध मुनाफा कमाया जा सकता है। अगर आप छोटे स्तर पर सिर्फ दो पशुओं से शुरुआत करते हैं, तो हर महीने 15 से 20 हजार रुपये यानी साल में करीब दो लाख रुपये का नेट प्रॉफिट मिलेगा।

पांच अच्छे पशुओं का छोटा फार्म बनाते हैं तो महीने की कमाई सीधे 40 से 50 हजार रुपये, यानी सालाना 5 से 6 लाख रुपये तक पहुंच जाती है। वहीं इसे बड़े बिजनेस मॉडल की तरह 10 पशुओं के कमर्शियल फार्म से शुरू करें, तो सारे खर्चे काटकर हर महीने 80 हजार से एक लाख रुपये यानी सालाना 10 से 12 लाख रुपये की मोटी कमाई आपकी मुट्ठी में होगी।

रोज की कमाई और एक जरूरी ट्रिक

रोजाना के हिसाब से देखें तो 65 से 70 रुपये लीटर बिकने वाले हाई फैट दूध की वजह से एक मुर्रा भैंस हर दिन करीब 550 रुपये का शुद्ध मुनाफा देती है। वहीं कम फीडिंग लागत और 45 से 50 रुपये लीटर बिकने वाले दूध के चलते साहीवाल गाय रोजाना करीब 400 रुपये का नेट प्रॉफिट दे देती है।

इस मुनाफे को लगातार बनाए रखने के लिए एक छोटी सी ट्रिक काम आती है। अपने फार्म के लिए सारे पशु एक साथ कभी न खरीदें, बल्कि उन्हें 6-6 महीने के अंतराल पर किश्तों में खरीदें। इसका फायदा यह होगा कि फार्म पर सालभर दूध का उत्पादन कभी ठप नहीं पड़ेगा, बाजार में आपकी साख बनी रहेगी और आपकी तिजोरी में पैसों की आवक बिना रुके चलती रहेगी।

सवाल-जवाब

सबसे ज्यादा दूध देने वाली भैंस कौन सी है?
मुर्रा भैंस, जिसे ‘काला सोना’ कहा जाता है, एक ब्यात में 2000 से 2500 लीटर तक दूध देती है।
खोया और घी के बिजनेस के लिए कौन सी भैंस सबसे अच्छी है?
भदावरी भैंस, क्योंकि इसके दूध में सबसे ज्यादा 8 से 13 फीसदी तक फैट होता है।
दो पशुओं से कितनी कमाई हो सकती है?
दो पशुओं से हर महीने 15 से 20 हजार रुपये, यानी साल में करीब दो लाख रुपये का शुद्ध मुनाफा हो सकता है।
10 पशुओं के कमर्शियल फार्म से कितनी कमाई होती है?
सारे खर्चे काटकर हर महीने 80 हजार से एक लाख रुपये, यानी सालाना 10 से 12 लाख रुपये तक की कमाई हो सकती है।
डेयरी फार्म के लिए सब्सिडी कहां से मिलेगी?
मध्य प्रदेश सरकार की मुख्यमंत्री पशुपालन विकास योजना और नाबार्ड की सब्सिडी योजनाओं से आर्थिक मदद ली जा सकती है।
गर्मी में दूध उत्पादन कितना घट जाता है?
तेज गर्मी या उमस में पशु तनाव में आ जाते हैं और दूध का उत्पादन 15 से 20 फीसदी तक गिर जाता है।
क्या सभी पशु एक साथ खरीदने चाहिए?
नहीं, पशुओं को 6-6 महीने के अंतराल पर किश्तों में खरीदना चाहिए ताकि सालभर दूध उत्पादन ठप न हो।
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