कमोडिटी बाजार में 3 नवंबर के कारोबारी सत्र के दौरान बुलियन कीमतों में अचानक भारी दबाव देखा गया। वायदा कारोबार में सोने का भाव ₹1286 टूटकर ₹1,38,900 प्रति 10 ग्राम के स्तर पर आ गया। इसी तरह चांदी के अनुबंधों में भी भारी बिकवाली दर्ज हुई, जिसके चलते इसकी कीमत ₹4,279 फिसलकर ₹1,79,500 प्रति किलोग्राम रह गई। घरेलू बाजार में आए इस तेज उतार-चढ़ाव ने खरीदारों और निवेशकों दोनों का ध्यान खींचा है।
वैश्विक बाजारों में भी नरम पड़े भाव
विदेशी एक्सचेंजों पर भी बुलियन में कमजोरी का असर साफ दिखाई दे रहा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोने का रेट 0.77 प्रतिशत टूटकर 3,939 डॉलर प्रति औंस पर आ गया। वहीं बीते 24 घंटों की अवधि में चांदी की कीमतों में 2.23 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जिससे यह घटकर 49.76 डॉलर प्रति औंस रह गई। इसके अतिरिक्त, अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स का कारोबार 3,956 डॉलर प्रति औंस पर दर्ज किया गया।
प्रमुख शहरों में हाजिर भाव की स्थिति
खुदरा सर्राफा बाजारों में भी दरों में बदलाव देखने को मिला। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में 24 कैरेट शुद्धता वाले सोने की कीमत ₹1,39,530 प्रति 10 ग्राम दर्ज की गई। वहीं 22 कैरेट आभूषण धातु का भाव ₹1,27,910 प्रति 10 ग्राम और 18 कैरेट का मूल्य ₹1,04,690 प्रति 10 ग्राम रहा।
चेन्नई और मुंबई के बाजारों में 24 कैरेट धातु ₹1,39,380 प्रति 10 ग्राम पर उपलब्ध रही, जबकि 22 कैरेट श्रेणी का स्तर ₹1,27,760 प्रति 10 ग्राम दर्ज हुआ। यही मूल्य ढांचा कोलकाता, बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे और केरल के बाजारों में भी लागू रहा, जहां 24 कैरेट वर्ग ₹1,39,380 प्रति 10 ग्राम पर बिका।
गुजरात के प्रमुख केंद्रों अहमदाबाद और वडोदरा में 24 कैरेट सोने का भाव ₹1,39,430 प्रति 10 ग्राम पर रहा। इन दोनों शहरों में 22 कैरेट सोना ₹1,27,810 प्रति 10 ग्राम और 18 कैरेट सोना ₹1,04,590 प्रति 10 ग्राम पर दर्ज किया गया।
बाजार विश्लेषकों का नजरिया
एलकेपी सिक्योरिटीज में वाइस प्रेसिडेंट और रिसर्च एनालिस्ट जतिन त्रिवेदी के अनुसार, मौद्रिक नीतियों के अनिश्चित परिदृश्य को देखते हुए निवेशक फिलहाल बेहद सतर्कता बरत रहे हैं। उन्होंने रेखांकित किया कि आगामी अमेरिकी रोजगार आंकड़ों से ब्याज दरों के रास्ते और फेडरल रिजर्व के रुख पर स्थिति अधिक स्पष्ट होगी।
दूसरी ओर, वीएसआरके कैपिटल के डायरेक्टर स्वप्निल अग्रवाल ने स्पष्ट किया कि जब तक अमेरिका में उधारी की लागत ऊंची बनी रहती है, तब तक चांदी पर दबाव बना रहेगा। उन्होंने संकेत दिया कि मौजूदा परिस्थितियों में वर्ष 2026 के अंत तक चांदी में किसी बड़ी तेजी की गुंजाइश सीमित दिखती है।


















