मिर्जापुर जनपद में अर्नब तूफान के साथ आई तेज हवाओं और बारिश ने किसानों की मेहनत पर भारी असर डाला है। खेतों में खड़ी फसलें मौसम की इस मार से बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। सबसे व्यापक नुकसान धान की खेती में दर्ज किया गया है, जबकि बाजरा और मक्का की फसलें भी तेज आंधी तथा लगातार बारिश की जद में आकर जमीन पर बिछ गई हैं। कई इलाकों में खेतों के भीतर जलभराव हो जाने के कारण बालियां पानी में डूब चुकी हैं, जिससे आगामी पैदावार में भारी गिरावट की आशंका जताई जा रही है।
धान की पैदावार और गुणवत्ता पर गंभीर संकट
जिले में आए इस मौसमी बदलाव के असर को स्पष्ट करते हुए मिर्जापुर के कृषि उप निदेशक विकेश सिंह पटेल ने बताया कि अर्नब तूफान के चलते धान की लगभग 30 से 40 प्रतिशत उपज नष्ट हो गई है। खेतों में गिरी हुई धान की बालियां लगातार नमी और कीचड़ के संपर्क में रहने के कारण काली पड़ सकती हैं। इस स्थिति से चावल के दानों की प्राकृतिक चमक और गुणवत्ता खत्म हो जाएगी तथा कुटाई के दौरान दाने टूटने लगेंगे। गुणवत्ता बिगड़ने की वजह से किसानों को तैयार उपज को खुले बाजार या मंडियों में उचित दामों पर बेचने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।
बिना बीमा वाले किसान कैसे करें आवेदन
फसल सुरक्षा योजना के दायरे से बाहर रह गए किसानों को भी आर्थिक संकट से उबारने के लिए सरकारी स्तर पर व्यवस्था की गई है। जिन काश्तकारों ने अपनी फसल का बीमा नहीं करवाया था, वे भी सरकारी क्षतिपूर्ति योजना के तहत राहत पाने के पात्र हैं। ऐसे किसानों को अपनी कृषि भूमि का ब्योरा, बोई गई फसल का नाम और तूफान से हुए वास्तविक नुकसान का पूरा विवरण दर्ज करते हुए एक औपचारिक लिखित आवेदन पत्र तैयार करना होगा। यह प्रार्थना पत्र किसान को अपने संबंधित तहसील कार्यालय में जाकर व्यक्तिगत रूप से जमा करना होगा।
कृषि उप निदेशक के अनुसार, गैर-बीमित किसानों के लिए समय सीमा बेहद महत्वपूर्ण है। फसल को नुकसान पहुंचने के ठीक 48 घंटे के भीतर किसानों को अपनी शिकायत तहसील प्रशासन के समक्ष दर्ज करानी होगी। प्रार्थना पत्र प्राप्त होने के उपरांत राजस्व विभाग की फील्ड टीमें सीधे प्रभावित खेतों का स्थलीय निरीक्षण करेंगी। राजस्व कर्मी नुकसान का सटीक तकनीकी आकलन कर अपनी विस्तृत रिपोर्ट शासन को प्रेषित करेंगे, जिसके आधार पर पात्र काश्तकारों के बैंक खातों में आर्थिक सहायता राशि मंजूर की जाएगी।
बीमित किसानों के लिए 72 घंटे की समय सीमा
दूसरी तरफ, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना या अन्य माध्यमों से अपनी फसल का बीमा कराने वाले किसानों के लिए प्रक्रिया को और सुगम बनाया गया है। ऐसे किसान नुकसान की सूचना देने के लिए विशेष टोल फ्री हेल्पलाइन नंबर 14447 पर सीधे संपर्क कर सकते हैं। बीमित किसानों को प्राकृतिक आपदा से क्षति होने के 72 घंटे के भीतर अपनी शिकायत दर्ज कराना अनिवार्य किया गया है।
हेल्पलाइन पर सूचना पंजीकृत होने के तुरंत बाद कृषि विभाग और संबंधित बीमा कंपनी के संयुक्त प्रतिनिधि खेतों का दौरा करेंगे। यह संयुक्त टीम खेतों में पहुंचकर फसल क्षति का वैज्ञानिक सर्वे करेगी और संयुक्त निरीक्षण आख्या तैयार करेगी। जिन किसानों के खेतों में व्यापक खराबी आई है, उन्हें स्थानीय कृषि विभाग और राजस्व कर्मियों के साथ लगातार संपर्क बनाए रखने की सलाह दी गई है, ताकि सर्वे कार्य में कोई भी प्रभावित रकबा छूटने न पाए और पात्र किसानों को शासन से निर्धारित राहत राशि मिल सके।

















