उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के रहने वाले युवा छात्र राजा निषाद ने पढ़ाई के साथ-साथ कृषि क्षेत्र में एक अनूठी मिसाल कायम की है। ग्रेजुएशन की डिग्री ले रहे राजा निषाद ने अपनी पढ़ाई से मिलने वाले खाली समय का सदुपयोग करने की ठानी और पारंपरिक खेती से हटकर व्यावसायिक सब्जी उत्पादन का रास्ता चुना। आसपास के अनुभवी किसानों के काम और उनकी पैदावार को देखकर उनके मन में बैंगन उगाने का विचार आया। इसके बाद उन्होंने करीब दो बीघे जमीन पर बैंगन की फसल तैयार की, जिससे वे अब अच्छी खासी कमाई की राह पर हैं।
कम लागत में व्यावसायिक खेती की शुरुआत
राजा निषाद के अनुसार, दो बीघे खेत में बैंगन की फसल तैयार करने के लिए कुल मिलाकर लगभग 20 हजार रुपये का शुरुआती खर्च आया। इस बजट में खेत की तैयारी, पौधे लगाने और जरूरी व्यवस्थाओं का प्रबंधन किया गया। खेती के तमाम आवश्यक कार्यों जैसे सिंचाई, निराई-गुड़ाई और पौधों की नियमित देखभाल की जिम्मेदारी वे खुद संभालते हैं। किसी बाहरी मजदूर पर अत्यधिक निर्भर रहने के बजाय खुद मेहनत करने से खेती की लागत सीमित रही और पौधों की देखरेख भी बेहतर तरीके से सुनिश्चित हो सकी।
स्थानीय जलवायु के अनुकूल श्रीनाथ किस्म का चयन
फसल की सफलता के लिए सही बीज और किस्म का चुनाव बेहद अहम माना जाता है। राजा निषाद ने अपने खेत में बैंगन की श्रीनाथ वैरायटी के पौधे रोपे हैं। उनके मुताबिक, गोंडा जिले के स्थानीय वातावरण और मौसम के मिजाज को देखते हुए यह किस्म बहुत उपयुक्त साबित होती है। इस किस्म की सबसे बड़ी खासियत इसका तेजी से तैयार होना है। खेत में पौधों की रोपाई किए जाने के तकरीबन 60 दिन बाद ही पौधों पर फल आने का सिलसिला शुरू हो जाता है, जिससे किसान को रोपाई के दो महीने के भीतर ही उत्पादन मिलने लगता है।
छह महीने तक लगातार पैदावार और हर चौथे दिन तुड़ाई
बैंगन की श्रीनाथ किस्म की एक प्रमुख विशेषता यह है कि इसमें एक बार फलन शुरू होने के बाद लंबे समय तक निरंतर फल आते रहते हैं। राजा निषाद बताते हैं कि उनके खेत से लगभग छह महीने तक बैंगन की ताजा फसल लगातार मिलती रहेगी। इस निरंतरता का सबसे बड़ा फायदा यह होता है कि किसान को पूरी फसल को एक साथ काटकर एक ही झटके में बेचने का दबाव नहीं झेलना पड़ता। खेत में नियमित अंतराल पर तुड़ाई की जाती है। एक बार फल तोड़ने के बाद लगभग चौथे दिन पौधे दोबारा नई तुड़ाई के लिए पूरी तरह तैयार हो जाते हैं। हर चौथे दिन होने वाली इस तुड़ाई से खेत से ताजा माल निकलता रहता है और किसान को बार-बार बाजार का रुख करने का अवसर मिलता है।
नवाबगंज सब्जी मंडी में सीधी आपूर्ति और आमदनी की उम्मीद
अपने दो बीघे खेत से तोड़े गए ताजे बैंगन को राजा निषाद बिक्री के लिए सीधे नवाबगंज सब्जी मंडी में ले जाते हैं। स्थानीय मंडी में हरी सब्जियों और खास तौर पर बैंगन की मांग साल भर लगातार बनी रहती है। मंडी में स्थिर मांग और खेत में पौधों से मिलने वाली शानदार पैदावार को देखते हुए उन्हें पूरा भरोसा है कि 20 हजार रुपये की सामान्य लागत से शुरू हुई यह फसल उन्हें लाखों रुपये की आमदनी दिलाएगी। पढ़ाई के साथ खेती का यह सफल तालमेल यह साबित करता है कि आधुनिक समझ और सही किस्म के चुनाव से कम रकबे में भी खेती को लाभ का जरिया बनाया जा सकता है।



















