घरेलू कमोडिटी बाजार में त्योहारी खरीद की हलचल शुरू होते ही कीमती धातुओं के भाव में तेज उछाल दर्ज किया गया है. मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी एमसीएक्स पर नए कारोबारी सप्ताह की शुरुआत मजबूती के साथ हुई, जहां सोना और चांदी दोनों ही हरे निशान में कारोबार करते दिखाई दिए. हालिया हफ्तों में आई तीव्र गिरावट के बाद निचले स्तरों पर लौटी खरीदारी ने बुलियन बाजार को नई ऊर्जा दी है, जिसके चलते वायदा के साथ-साथ हाजिर बाजार में भी दाम चढ़ गए हैं.
घरेलू वायदा में चांदी ने भरी 3,500 रुपये से ज्यादा की उड़ान
सप्ताह के पहले कारोबारी दिन चांदी में सबसे अधिक हलचल देखी गई. एमसीएक्स पर दिसंबर अनुबंध वाली चांदी 1,81,094 रुपये के स्तर पर खुली, जो इसके पिछले बंद भाव 1,79,132 रुपये से 1,962 रुपये अथवा 1.09 फीसदी अधिक रही. जैसे-जैसे ट्रेडिंग सत्र आगे बढ़ा, लिवाली का दायरा विस्तृत हुआ और चांदी 3,569 रुपये की छलांग लगाते हुए 1,82,701 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर को छू गई. इस व्यापक बढ़त ने बाजार में निचले स्तरों पर मजबूत मांग का संकेत दिया है.
सोने के भाव में भी मजबूती, हाजिर कीमतें 1.39 लाख के पार
पीली धातु में भी शुरुआती सत्र से ही तेजी का रुख बना रहा. दिसंबर डिलीवरी वाला सोना पिछले सत्र के 1,38,485 रुपये के बंद स्तर के मुकाबले 518 रुपये की मजबूती लेकर 1,39,003 रुपये प्रति 10 ग्राम पर खुला. दिन के दौरान इसमें लिवाली का जोर बढ़ा और यह 694 रुपये या 0.50 प्रतिशत चढ़कर 1,39,179 रुपये प्रति 10 ग्राम के उच्चतम स्तर तक पहुंच गया. वायदा बाजार की इस तेजी का असर भौतिक बाजार पर भी साफ दिखाई दिया, जहां हाजिर स्तर पर सोना 1.39 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के आंकड़े को छू गया.
विदेशी बाजारों से मिला मजबूत सहारा
घरेलू तेजी को अंतरराष्ट्रीय संकेतों से सीधा समर्थन मिला. कॉमेक्स पर सोना 0.33 फीसदी की मजबूती के साथ 3,911.60 डॉलर प्रति औंस पर दर्ज किया गया. वहीं वैश्विक स्तर पर चांदी में और भी जोरदार प्रदर्शन देखने को मिला, जहां यह 2.24 फीसदी की बढ़त बनाते हुए 50.380 डॉलर प्रति औंस के पार निकल गई. विदेशी एक्सचेंजों पर निवेशकों द्वारा की गई व्यापक लिवाली ने भारतीय बाजारों में कीमतों को ऊपर धकेलने में मुख्य भूमिका निभाई.
रिकॉर्ड स्तरों से अब भी भारी छूट पर धातुएं
सोमवार को दर्ज की गई इस सशक्त रिकवरी के बावजूद दोनों कीमती धातुएं अपने सर्वकालिक उच्च स्तरों की तुलना में काफी सस्ती मिल रही हैं. मौजूदा दरों के विश्लेषण से स्पष्ट होता है कि सोना अपने ऐतिहासिक रिकॉर्ड से लगभग 28 फीसदी नीचे बना हुआ है. वहीं चांदी की स्थिति देखें तो यह अपने उच्चतम शिखर से करीब 40 फीसदी की गिरावट पर कारोबार कर रही है. यही वजह है कि हालिया बिकवाली के बाद बड़े निवेश फंड्स तथा आम खरीदारों ने मौजूदा भावों को संचय का अनुकूल अवसर माना.
भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल का दबाव
बुलियन विशेषज्ञों के मुताबिक, मौजूदा तेजी केवल त्योहारी खरीदारी तक सीमित नहीं है बल्कि इसके पीछे गहरे वैश्विक कारक भी सक्रिय हैं. पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव और अनिश्चितता ने वित्तीय पूंजी को सुरक्षित ठिकानों की ओर मोड़ा है. इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की लगातार मजबूत कीमतें वैश्विक महंगाई के खतरे को बनाए हुए हैं, जिससे कीमती धातुओं को मुद्रास्फीति के खिलाफ बचाव के रूप में समर्थन मिल रहा है.
अमेरिकी चुनाव और डॉलर की चाल पर टिकी नजर
अमेरिका में प्रस्तावित महत्वपूर्ण मध्यावधि चुनावों के मद्देनजर वैश्विक वित्तीय बाजारों में सतर्कता का माहौल छाया हुआ है. चुनावी परिणामों और भविष्य के नीतिगत बदलावों की आशंका के कारण कई संस्थागत निवेशक जोखिम भरी इक्विटी से पूंजी निकालकर सुरक्षित बुलियन परिसंपत्तियों में स्थानांतरित कर रहे हैं. आने वाले समय में सोने और चांदी की दिशा अमेरिकी फेडरल रिजर्व के नीतिगत रुख, डॉलर सूचकांक की मजबूती तथा ट्रेजरी यील्ड में होने वाले उतार-चढ़ाव से निर्धारित होगी.

















