मुरादाबाद में पारंपरिक खेती के झंझट से दूर अब किसान बागवानी का रुख कर रहे हैं। कृषि क्षेत्र से जुड़े जानकारों का मानना है कि अगर किसान पारंपरिक फसलों के साथ बागवानी और व्यावसायिक पेड़ों की खेती को अपनाएं, तो वे अपनी आमदनी को कई गुना बढ़ा सकते हैं। अमरूद, पपीता, नींबू, अनार और सहजन जैसे फलदार पेड़ों की खेती आज के समय में काफी लाभकारी साबित हो रही है। बागवानी की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसमें बार-बार फसल बोने की मेहनत से राहत मिलती है। शुरुआत में पौधों के रोपण और उनकी शुरुआती देखभाल पर थोड़ा निवेश करने के बाद किसान लंबे समय तक लगातार बंपर पैदावार और मुनाफा हासिल कर सकते हैं। बशर्ते किसान सही किस्म का चुनाव करें, पौधों के बीच उचित दूरी रखें, समय पर सिंचाई करें और खाद के साथ-साथ समय-समय पर कटाई-छंटाई का विशेष ध्यान रखें, जिससे कम जमीन में भी बंपर कमाई संभव हो पाती है।
कृषि वैज्ञानिकों की राय और बेहतर किस्मों का चुनाव
कृषि वैज्ञानिक डॉक्टर दीपक मेहंदी रत्ता के अनुसार, बागवानी के क्षेत्र में किसानों के पास कई बेहतरीन विकल्प मौजूद हैं। उद्यानिकी के लिहाज से कई ऐसे फल हैं जिनकी खेती करके बंपर मुनाफा कमाया जा सकता है, जिनमें अमरूद और ड्रैगन फ्रूट प्रमुख हैं जो काफी कम समय में फल देना शुरू कर देते हैं। अमरूद की खेती में उसकी उन्नत किस्मों को सबसे बेहतरीन माना जाता है, जिनमें गोल्डन वैरायटी और ताइवान पिंक वैरायटी शामिल हैं। इन किस्मों का चयन करके किसान अपनी आय बढ़ा सकते हैं। इसके अलावा फसल का चयन हमेशा खेत की मिट्टी की प्रकृति को ध्यान में रखकर ही करना चाहिए। हालांकि ड्रैगन फ्रूट की खूबी यह है कि इसे किसी भी प्रकार की जमीन में आसानी से उगाया जा सकता है, जो किसानों के लिए बेहद फायदेमंद सौदा साबित होता है।
मिट्टी की उपयुक्तता और कम समय में फल देने वाली फसलें
बागवानी शुरू करने से पहले खेत की स्थिति का आकलन करना बेहद जरूरी है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि बागवानी की फसलें हमेशा उसी खेत में लगानी चाहिए जहां जलभराव की समस्या न हो और पानी बिल्कुल भी खड़ा न रहता हो। जिन खेतों की मिट्टी बलुई दोमट या साधारण दोमट होती है, वहां लगभग सभी प्रकार के फल आसानी से पनप जाते हैं। यदि किसानों को फसल से जल्द से जल्द मुनाफा कमाना है, तो वे अमरूद और ड्रैगन फ्रूट की खेती को प्राथमिकता दे सकते हैं। अमरूद का पौधा लगाने के महज एक से डेढ़ साल के भीतर ही फल देना शुरू कर देता है, जबकि ड्रैगन फ्रूट की फसल भी डेढ़ से दो साल के अंदर फल देने के लिए तैयार हो जाती है। ड्रैगन फ्रूट को मुख्य रूप से दो अलग-अलग विधियों से लगाया जा सकता है, जिसमें पहला तरीका पोल लगाकर खेती करना है और दूसरा तरीका पोल के ऊपर तने या ढांचा तैयार कर पौधे को आगे बढ़ाना है।
ड्रैगन फ्रूट की खेती का सही समय और तरीका
ड्रैगन फ्रूट की आधुनिक और वैज्ञानिक तरीके से खेती करने पर किसानों का अनावश्यक खर्च काफी हद तक बच जाता है और फसल की गुणवत्ता भी बेहतरीन होती है। इस फल को लगाने का सबसे उपयुक्त समय फरवरी और मार्च का महीना माना जाता है। सही समय पर रोपण करने के बाद यह फसल डेढ़ साल की अवधि में फल देना शुरू कर देती है और फिर पोल के सहारे पौधे पर फल बनने की प्रक्रिया तेज हो जाती है। इसी प्रकार अन्य कई फलदार फसलें हैं जिन्हें किसान थोड़ी सी सूझबूझ के साथ आसानी से उगा सकते हैं। हालांकि, इन सभी की सफलता के लिए सबसे पहली और जरूरी शर्त यह है कि जमीन का चुनाव बेहद सावधानी से किया जाए। खेत ऐसा होना चाहिए जहां बारिश या सिंचाई का पानी बिल्कुल भी जमा न हो, क्योंकि जलभराव इन पौधों को नुकसान पहुंचा सकता है। ऐसी उपयुक्त जमीन पर किसान अलग-अलग प्रकार के फलों की बागवानी करके आर्थिक रूप से मजबूत बन सकते हैं।

















