गोंडा जिले के किसान अब पारंपरिक फसलों के दायरे से बाहर निकलकर धान की उन्नत और विशेष किस्मों की खेती पर विशेष ध्यान दे रहे हैं। इसी क्रम में जिले के एक प्रगतिशील किसान सिराज अहमद ने जीरा फूल धान की खेती में सफलता हासिल की है। यह खास किस्म अपनी बेहतरीन खुशबू, बेहद महीन दानों और लजीज स्वाद के लिए पहचानी जाती है। किसान के अनुसार, एक एकड़ के रकबे में इस फसल से लगभग 15 क्विंटल तक का उत्पादन मिल रहा है, जिसकी बाजार में बहुत अधिक मांग बनी हुई है।
छत्तीसगढ़ से जुड़ी है इस धान की मुख्य पहचान
सिराज अहमद ने इस फसल के बारे में जानकारी साझा करते हुए बताया कि जीरा फूल धान की मूल उत्पत्ति छत्तीसगढ़ के सरगुजा क्षेत्र से जुड़ी हुई है। इस प्रजाति के चावल के दाने आकार में बहुत छोटे और पतले होते हैं। जब यह पककर तैयार होता है, तो इससे एक भीनी-भीनी खुशबू महकती है और इसका स्वाद भी आम चावलों के मुकाबले काफी अलग और बेहतर होता है। यही खास विशेषता इसे ग्राहकों के बीच लोकप्रिय बनाती है और बाजार में इसकी लगातार अच्छी मांग बनी रहती है।
पहली बार की खेती और भविष्य की योजनाएं
सिराज अहमद ने इस खरीफ सीजन में पहली बार अपने खेतों में जीरा फूल धान की फसल उगाई है। उन्होंने शुरुआत में लगभग एक एकड़ भूमि पर इसकी रोपाई की थी। फसल की शुरुआती स्थिति और मिलने वाले उत्पादन को देखते हुए वह आने वाले समय में इसका दायरा और बढ़ाने की सोच रहे हैं। उनका मानना है कि यदि खेती में सही किस्म का चुनाव किया जाए और गुणवत्ता पर ध्यान दिया जाए, तो किसानों की आमदनी में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है.
लागत, उत्पादन और मुनाफे का पूरा गणित
जीरा फूल धान की खेती में आने वाले खर्च और मुनाफे का हिसाब भी काफी फायदेमंद साबित हो रहा है। सिराज अहमद के अनुसार, एक एकड़ जमीन में फसल तैयार करने पर लगभग 20 हजार रुपये की कुल लागत आती है। इसके बदले में करीब 15 क्विंटल तक धान की पैदावार मिल जाती है। बाजार में इस धान का दाम लगभग 7,000 रुपये प्रति क्विंटल तक मिलने की उम्मीद है। वहीं इसके परिष्कृत चावल की खुदरा कीमत बाजार में 100 से 200 रुपये प्रति किलोग्राम तक दर्ज की जा रही है, हालांकि यह भाव स्थानीय मांग और क्वालिटी पर भी निर्भर करता है.
कृषि क्षेत्र में नए प्रयोगों का बढ़ता दायरा
जीरा फूल धान अपनी अनोखी खुशबू और बारीक बनावट के कारण सामान्य धान की किस्मों से बिल्कुल अलग खड़ा नजर आता है। ऐसे में क्षेत्रीय किसानों के लिए यह कम लागत में बेहतर मुनाफा कमाने का एक दमदार जरिया बन सकता है। कृषि जानकारों का मानना है कि इस तरह के नए प्रयोग करने से पहले मिट्टी की जांच, स्थानीय जलवायु और बाजार की नब्ज को परख लेना बेहद जरूरी होता है। सिराज अहमद का यह सफल प्रयास आसपास के अन्य किसानों को भी लीक से हटकर खेती करने के लिए प्रेरित कर रहा है।


















