बढ़ते अस्पतालों के बिल और महंगे इलाज के दौर में आज के समय में हेल्थ इंश्योरेंस लेना बेहद आम हो चुका है। पॉलिसी खरीदते समय लोगों के मन में कई तरह के सवाल होते हैं कि कौन सी बीमारियां कवर होंगी और कौन सी नहीं। खासकर जब दिल्ली-एनसीआर जैसे महानगरों में प्रदूषण का स्तर खतरनाक स्तर पर पहुंचने लगता है, तो यह सवाल और भी अहम हो जाता है कि क्या जहरीली हवा से पैदा होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं के लिए बीमा क्लेम मिल पाएगा या नहीं। यदि आप भी ऐसा कोई क्लेम करने की योजना बना रहे हैं, तो जरूरी है कि आप इसके नियमों और दावों की सच्चाई को पहले ही अच्छी तरह समझ लें।
प्रदूषण से होने वाली स्वास्थ्य समस्याएं
विशेष तौर पर दिवाली के बाद देश के कई हिस्सों में वायु प्रदूषण का स्तर तेजी से ऊपर जाने लगता है। ऐसे खराब माहौल में अस्थमा, ब्रोंकाइटिस, क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज यानी सीओपीडी और श्वसन तंत्र से जुड़ी अन्य गंभीर दिक्कतें होना बेहद आम बात बन जाती है। ऐसे समय में अपनी सेहत की देखभाल करने के साथ-साथ यह चिंता भी सताने लगती है कि यदि स्थिति बिगड़ने पर मरीज को अस्पताल में भर्ती कराना पड़े, तो बीमा कंपनियां इस तरह की बीमारियों के इलाज का खर्च उठाएंगी या नहीं।
बीमा विशेषज्ञों की राय और नियम
एसबीआई जनरल इंश्योरेंस के चीफ बिजनेस ऑफिसर श्रीश महूली के अनुसार, इस मौसम में सांस की बीमारियों से जुड़े मामलों और क्लेम की संख्या में बढ़ोतरी देखने को मिलने लगती है। बीमा का दावा इस बात पर पूरी तरह निर्भर करता है कि संबंधित व्यक्ति की मेडिकल हिस्ट्री कैसी है, पॉलिसी का वेटिंग पीरियड कितना है और बीमा अनुबंध में क्या प्रावधान तय किए गए हैं। क्लेम फाइल करने से पहले बीमाधारक को इन सभी बिंदुओं की जांच कर लेनी चाहिए। आमतौर पर लगभग सभी स्वास्थ्य पॉलिसियों में अस्थमा, ब्रोंकाइटिस और सांस से जुड़ी अन्य परेशानियों का कवरेज शामिल होता है, लेकिन कुछ पॉलिसियों में खास शर्तें भी जुड़ी हो सकती हैं जिनका ध्यान रखना आवश्यक है।
अस्पताल में भर्ती होने पर मिलने वाले खर्च
मनिपालसिग्ना हेल्थ इंश्योरेंस के प्रोडक्ट हेड विनीत गुप्ता का कहना है कि बीमा कंपनियों के लिए प्रदूषण से ज्यादा मरीज की बीमारी की गंभीरता मायने रखती है। यदि मरीज की स्थिति ऐसी है कि उसे अस्पताल में भर्ती कराना जरूरी हो जाए, तो इस पर बीमा का कवरेज निश्चित रूप से दिया जाता है। केयर हेल्थ इंश्योरेंस के एमडी-सीईओ अजय शाह का भी यही कहना है कि जिन बीमाधारकों को प्रदूषण के कारण अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत पड़ती है, उन्हें रूम रेंट, आईसीयू चार्ज, डॉक्टरों की फीस, दवाइयों, मेडिकल टेस्ट, एम्बुलेंस सेवाओं के साथ-साथ अस्पताल में भर्ती होने से पहले और बाद के खर्चों का पूरा कवर मिलता है।

















