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मुरादाबाद मंडल के पांच किसानों ने पेश की नई मिसाल: रसायनों को छोड़ प्राकृतिक खेती से कमा रहे बंपर मुनाफाव्यापार
23 जुल॰ 2026, 1:10 pm (46 दिन पहले)· 0

मुरादाबाद मंडल के पांच किसानों ने पेश की नई मिसाल: रसायनों को छोड़ प्राकृतिक खेती से कमा रहे बंपर मुनाफा

अमरोहा क्षेत्र के पांच प्रगतिशील किसानों ने रासायनिक खेती छोड़कर प्राकृतिक तरीकों को अपनाया है। 7 फीट लंबी लौकी उगाने से लेकर शुद्ध हल्दी और शहद के उत्पादन तक, इनका यह सफल कृषि मॉडल दूसरों के लिए एक बड़ी प्रेरणा बन रहा है।

मुरादाबाद और उससे सटे अमरोहा जिले में कृषि के क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। रासायनिक खेती के नुकसान को समझते हुए, यहां के कुछ प्रगतिशील किसानों ने प्राकृतिक और जैविक खेती का ऐसा शानदार मॉडल पेश किया है, जो पर्यावरण के अनुकूल होने के साथ-साथ बेहद मुनाफे वाला भी है। अमरोहा के पांच किसान—अमित देवल, सुरेंद्र कुमार त्यागी, रवि धारीवाल, विमल चौहान और सुनील चौहान—आज जैविक खेती के पर्याय बन चुके हैं। कोई दुर्लभ और लंबी सब्जियां उगाने में माहिर है, तो कोई शुद्ध शहद, जैविक मसाले और पारंपरिक खाद्य पदार्थ तैयार कर रहा है। इन पांचों ने साबित कर दिया है कि रसायनों के बिना भी बंपर पैदावार और शानदार आमदनी हासिल की जा सकती है।

प्राकृतिक संसाधनों से खेती की लागत घटाना

अमरोहा के रहने वाले अमित देवल ने प्राकृतिक खेती के जरिए एक बेहद सफल और अनुकरणीय मॉडल तैयार किया है। उन्होंने अपने खेतों से महंगी रासायनिक खादों और जहरीले कीटनाशकों को पूरी तरह से बाहर कर दिया है। इसके बजाय, वह पूरी तरह से प्राकृतिक संसाधनों पर निर्भर हैं। अमित अपनी फसलों के लिए जीवामृत, घनजीवामृत, गोमूत्र और गोबर की खाद जैसे जैविक तत्वों का खुद निर्माण करते हैं और उनका इस्तेमाल करते हैं। इन प्राकृतिक उपायों के लगातार प्रयोग से उनके खेतों की मिट्टी की उर्वरता में जबरदस्त सुधार आया है। बाजार से खाद और दवाइयां न खरीदने के कारण उनकी उत्पादन लागत में भारी कमी आई है, जबकि रसायन मुक्त और शुद्ध उपज होने के चलते उन्हें बाजार में फसलों के बहुत अच्छे दाम मिलते हैं। उपभोक्ता भी उनके स्वास्थ्यवर्धक उत्पादों को हाथों-हाथ लेते हैं। अमित देवल केवल अपने तक सीमित नहीं हैं; वह समय-समय पर विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करते हैं। इन कार्यक्रमों में वह अन्य किसानों को कम खर्च में बेहतर आय देने वाली प्राकृतिक खेती की बारीकियां सिखाते हैं। उनकी इस निस्वार्थ प्रेरणा से अब तक कई स्थानीय किसान जैविक खेती अपना चुके हैं।

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जैविक हल्दी का अंतरराज्यीय व्यापार

इसी कड़ी में अमरोहा के एक अन्य प्रगतिशील किसान सुरेंद्र कुमार त्यागी ने जैविक हल्दी के उत्पादन में पूरे उत्तर प्रदेश के भीतर अपनी एक अलग और मजबूत पहचान कायम की है। त्यागी ने कई साल पहले प्राकृतिक तरीकों से हल्दी की खेती की शुरुआत की थी, जिसे आज उन्होंने एक बेहद सफल कृषि उद्यम में बदल दिया है। वह अपनी फसल में किसी भी तरह के कृत्रिम रसायनों का इस्तेमाल नहीं करते। उनकी हल्दी की शुद्धता और गुणवत्ता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कई सरकारी विद्यालयों में बच्चों को दिए जाने वाले मध्याह्न भोजन के लिए उनकी हल्दी की आपूर्ति की जाती है। उत्तर प्रदेश के अलावा आज दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड और राजस्थान के बाजारों में त्यागी की जैविक हल्दी की भारी मांग है। प्राकृतिक खेती और कृषि नवाचार के क्षेत्र में उनके इस उत्कृष्ट और सराहनीय योगदान को देखते हुए, वर्ष 2025 में उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने उन्हें राजभवन में विशेष रूप से सम्मानित किया था। सुरेंद्र कुमार त्यागी आज प्रदेश भर के किसानों के लिए एक बड़ी प्रेरणा बन चुके हैं और उन्हें वैज्ञानिक तरीके से हल्दी उगाने का प्रशिक्षण भी दे रहे हैं।

पारंपरिक खाद्य उत्पादों का मूल्य संवर्धन

खेती को केवल फसल उगाने तक सीमित न रखते हुए, अमरोहा के रवि धारीवाल ने कृषि उत्पादों के मूल्य संवर्धन में महारत हासिल की है। उन्होंने समझा कि कच्चा माल बेचने से ज्यादा मुनाफा उसे प्रसंस्कृत करके बेचने में है। रवि अपने खेतों में उगने वाले प्राकृतिक फलों, सब्जियों और औषधीय पौधों का इस्तेमाल करके पारंपरिक खाद्य उत्पाद तैयार करते हैं। उनके द्वारा बनाए गए प्राकृतिक मुरब्बे, चटनी और अचार लोगों के बीच खासे लोकप्रिय हैं। रवि की सबसे बड़ी खासियत यह है कि वह अपने उत्पादों में किसी भी तरह के रासायनिक परिरक्षकों या मिलावट का इस्तेमाल नहीं करते, जिससे भोजन का पारंपरिक स्वाद और उसकी पौष्टिकता पूरी तरह बरकरार रहती है। शुद्धता के कारण उनके उत्पादों को बाजार में शानदार प्रतिक्रिया मिलती है। इसके साथ ही, वह स्थानीय किसानों को भी जागरूक कर रहे हैं कि वे अपनी उपज को सीधे बेचने के बजाय उससे ऐसे प्राकृतिक उत्पाद तैयार करें, ताकि उन्हें अपनी मेहनत का कहीं अधिक और बेहतर मूल्य मिल सके।

दुर्लभ और विशाल सब्जियों की खेती

अमरोहा के ही विमल चौहान ने प्राकृतिक खेती को एक अलग और रोमांचक मुकाम पर पहुंचा दिया है। वह न्यूनतम रसायनों और पूरी तरह से प्राकृतिक विधियों का उपयोग करके खेती करते हैं। उनकी विशेष पहचान कई दुर्लभ, अनोखी और बेहद आकर्षक सब्जियां उगाने वाले किसान के तौर पर बनी है। विमल चौहान के खेतों में उगने वाली सात फीट तक लंबी लौकी पूरे इलाके में चर्चा का विषय बनी रहती है। इस अद्भुत पैदावार और उनकी उन्नत कृषि तकनीकों को देखने के लिए दूर-दूर से किसान और कृषि प्रेमी उनके खेतों का दौरा करते हैं। वह मौसम के चक्र के अनुसार तरह-तरह की नई किस्मों वाली सब्जियां उगाते हैं और वहां आने वाले किसानों को आधुनिक खेती के गुर सिखाते हैं। विमल चौहान का स्पष्ट मानना है कि प्राकृतिक खेती की ओर लौटना ही आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत है। इससे मिट्टी की उपजाऊ शक्ति हमेशा बनी रहती है, खेती का खर्च घटता है और आम जनता को खाने के लिए पूरी तरह से सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध होता है।

वैज्ञानिक तरीके से शहद उत्पादन

शहद उत्पादन के क्षेत्र में अमरोहा के सुनील चौहान ने अपनी मेहनत और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से एक अलग मुकाम हासिल किया है। वह वैज्ञानिक तरीके से मधुमक्खी पालन करते हैं और पूरी तरह से शुद्ध और प्राकृतिक शहद का उत्पादन करते हैं। आज के समय में जब बाजार में मिलावटी शहद की भरमार है, सुनील का शहद अपने असली प्राकृतिक स्वाद, उच्च गुणवत्ता और बिना किसी मिलावट के कारण ग्राहकों की पहली पसंद बन गया है। उनके शहद की आपूर्ति कई अलग-अलग जिलों में की जाती है और इसकी हमेशा भारी मांग रहती है। एक सफल व्यवसायी होने के साथ-साथ, सुनील चौहान अन्य किसानों के लिए एक बेहतरीन मार्गदर्शक भी हैं। वह साथी किसानों को सिखाते हैं कि कैसे कम लागत में मधुमक्खी पालन शुरू करके शहद उत्पादन के जरिए अपनी नियमित खेती के साथ-साथ एक शानदार अतिरिक्त आय प्राप्त की जा सकती है।

किसानों के लिए एक नया दृष्टिकोण

मुरादाबाद और अमरोहा के इन पांच किसानों की सफलता की कहानियां इस बात का पुख्ता प्रमाण हैं कि कृषि का भविष्य प्राकृतिक और जैविक खेती में ही छिपा है। इन्होंने अपनी कड़ी मेहनत से यह साबित किया है कि खेती घाटे का सौदा नहीं है, बशर्ते इसे सही और प्राकृतिक तरीकों से किया जाए। रसायनों के मकड़जाल से बाहर निकलकर, इन किसानों ने न केवल अपनी जमीन को बंजर होने से बचाया है, बल्कि उपभोक्ताओं को शुद्ध आहार और साथी किसानों को आत्मनिर्भरता का रास्ता भी दिखाया है।

सवाल-जवाब

मुरादाबाद और अमरोहा के किन पांच किसानों को प्राकृतिक खेती के लिए जाना जाता है?
अमरोहा क्षेत्र के अमित देवल, सुरेंद्र कुमार त्यागी, रवि धारीवाल, विमल चौहान और सुनील चौहान ने प्राकृतिक और जैविक खेती में अपनी अलग पहचान बनाई है।
अमित देवल अपनी खेती में किन प्राकृतिक चीजों का उपयोग करते हैं?
अमित देवल रासायनिक खाद के बजाय जीवामृत, घनजीवामृत, गोमूत्र और गोबर की खाद जैसे प्राकृतिक तत्वों का इस्तेमाल करते हैं।
सुरेंद्र कुमार त्यागी की जैविक हल्दी किन राज्यों में भेजी जाती है?
सुरेंद्र त्यागी की जैविक हल्दी उत्तर प्रदेश के अलावा दिल्ली, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में भेजी जाती है। गुणवत्ता के कारण इसे सरकारी स्कूलों के मध्याह्न भोजन में भी इस्तेमाल किया जा चुका है।
विमल चौहान किस अनोखी सब्जी के उत्पादन के लिए मशहूर हैं?
विमल चौहान प्राकृतिक खेती के माध्यम से सात फीट तक लंबी लौकी सहित कई दुर्लभ और आकर्षक सब्जियों के उत्पादन के लिए जाने जाते हैं।
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने वर्ष 2025 में किस किसान को सम्मानित किया?
उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने प्राकृतिक खेती में उत्कृष्ट कार्य के लिए साल 2025 में सुरेंद्र कुमार त्यागी को राजभवन में सम्मानित किया।
सुनील चौहान खेती के साथ-साथ कौन सा व्यवसाय करते हैं?
सुनील चौहान वैज्ञानिक तरीके से मधुमक्खी पालन करते हैं और उच्च गुणवत्ता वाले शुद्ध प्राकृतिक शहद का उत्पादन करते हैं।
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