कृषि के क्षेत्र में कम लागत लगाकर बेहतरीन कमाई कैसे की जा सकती है, इसका एक बेहतरीन उदाहरण बिहार के सारण जिले में देखने को मिला है। यहां के लहलादपुर प्रखंड अंतर्गत सारण गांव के रहने वाले किसान राजेश प्रसाद ने अपनी सूझबूझ और आधुनिक खेती के तरीकों से कृषि विशेषज्ञों को भी अचंभित कर दिया है। केवल 8वीं कक्षा तक की शिक्षा प्राप्त करने वाले राजेश अपनी व्यावहारिक सोच के बलबूते पर कम समय में तैयार होने वाली नकदी फसलों से शानदार मुनाफा अर्जित कर रहे हैं।
कम लागत में मूली की खेती से बंपर मुनाफा
राजेश प्रसाद का पूरा ध्यान ऐसी फसलों के उत्पादन पर रहता है जो बेहद कम समय में पककर तैयार हो जाएं और जिनकी बाजार में मांग हमेशा बनी रहे। उनकी इस सफलता की मुख्य वजह मूली की खेती है। उनके अनुसार एक कट्ठा जमीन में उन्नत किस्म के बीज और उर्वरक डालने पर कुल खर्च मात्र 300 से 500 रुपये तक ही आता है। बात करें अगर पैदावार की, तो एक कट्ठा खेत से करीब 4 से 5 क्विंटल तक मूली आसानी से मिल जाती है। वर्तमान समय में बाजार में मूली का भाव 40 से 50 रुपये प्रति किलोग्राम चल रहा है, जिसके चलते वे एक कट्ठे की फसल बेचकर लगभग 5000 रुपये तक का शुद्ध मुनाफा कमा लेते हैं।
मात्र 25 से 30 दिनों में तैयार हो जाती है फसल
राजेश प्रसाद का कहना है कि मूली के साथ-साथ पालक जैसी हरी सब्जियां केवल 25 से 30 दिनों के भीतर ही बाजार में बेचने के लिए पूरी तरह तैयार हो जाती हैं। इतने कम अंतराल में फसल चक्र पूरा हो जाने की वजह से खेत कभी खाली नहीं बैठता है। जैसे ही एक फसल की कटाई पूरी होती है, वे तुरंत उसी खेत में गोभी, टमाटर या बैंगन की बुवाई कर देते हैं, जिससे पूरे सीजन में उनकी आय लगातार बनी रहती है।
मल्टी-क्रॉपिंग तकनीक से होती है रोजाना कमाई
वे किसी एक ही फसल पर पूरी तरह निर्भर रहने के बजाय मल्टी-क्रॉपिंग यानी बहु-फसलीय तकनीक का इस्तेमाल करते हैं। अपने रोजमर्रा के खर्चों को पूरा करने और लगातार नगदी प्रवाह बनाए रखने के लिए उन्होंने अपने खेतों में हरी मिर्च, गोभी, बैंगन और टमाटर जैसी तमाम फसलें उगा रखी हैं। 8वीं तक पढ़े राजेश प्रसाद का यह सफल सफर यह साफ कर देता है कि यदि सही वक्त पर उचित बीजों का चयन किया जाए और सही फसलों की बुवाई हो, तो किसानी कभी भी घाटे का सौदा नहीं बल्कि हर रोज कमाई कराने वाला एक बेहतरीन व्यवसाय साबित हो सकती है।


















