उत्तर प्रदेश के प्रसिद्ध पीतल नगरी के रूप में मशहूर मुरादाबाद में दिवाली का पर्व पास आते ही पीतल से बनी गणेश और लक्ष्मी की मूर्तियों की मांग तेजी से बढ़ने लगी है। इस शहर के कुशल कारीगर इस बार बेहद आकर्षक डिजाइनों और बारीक नक्काशी के साथ इन धार्मिक मूर्तियों को तैयार करने में जुटे हुए हैं। इन कलाकृतियों की अद्भुत सुंदरता ग्राहकों को अपनी तरफ खींच रही है और सबसे खास बात यह है कि इनकी लोकप्रियता केवल देश की सीमाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि विदेशों से भी बड़े पैमाने पर ऑर्डर मिल रहे हैं। इन उत्पादों की आधुनिक शैली, बेहतरीन पॉलिश और शानदार नक्काशी इन्हें बाजार में उपलब्ध अन्य विकल्पों से बिल्कुल अलग और खास बनाती है।
विदेशी बाजारों तक है मुरादाबाद के पीतल उत्पादों की धूम
शहर के जाने-माने पीतल व्यापारी नितिन खन्ना के अनुसार, दीपावली के इस पावन अवसर पर उनके व्यापार प्रतिष्ठान में देश के कोने-कोने से खरीदार पहुंचते हैं। इसके अलावा विदेशों से भी खरीदार विशेष रूप से पीतल की इन कलात्मक वस्तुओं की खरीदारी के लिए आते हैं। हमारे देश के अलग-अलग राज्यों में विभिन्न सांस्कृतिक पर्व मनाए जाते हैं, जैसे कि बिहार में छठ महापर्व, महाराष्ट्र में गणेशोत्सव और दक्षिण भारत के तमाम राज्यों में पोंगल का त्योहार, और इन सभी अवसरों पर पीतल के बर्तनों तथा उत्पादों की अच्छी खासी मांग बनी रहती है। चूंकि भगवान गणेश और माता लक्ष्मी की पूजा लगभग हर भारतीय घर में अनिवार्य रूप से की जाती है, इसलिए व्यापारियों द्वारा ग्राहकों की जेब और बजट को ध्यान में रखते हुए छोटे से लेकर बड़े आकार तक की मूर्तियां बनाई जा रही हैं। वर्तमान समय में बाजार में एक फीट से लेकर दो फीट तक की ऊंचाई वाली मूर्तियां आसानी से मिल जाती हैं, जिनकी कीमतें उनके कुल वजन, डिजाइन, फिनिशिंग और की गई नक्काशी के आधार पर तय की जाती हैं।
कीमतें बढ़ने के बावजूद ग्राहकों के सिर चढ़कर बोल रहा है नक्काशी का क्रेज
व्यापारियों का कहना है कि पिछले साल की तुलना में इस बार कच्चे माल यानी पीतल के दामों में काफी अधिक बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसके बावजूद ग्राहकों के उत्साह में कोई कमी नहीं आई है। सामान्य स्तर की गुणवत्ता वाली मूर्तियों का दाम लगभग 1,300 रुपये से लेकर 1,600 रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास चल रहा है। वहीं दूसरी ओर, बेहद बारीक नक्काशी और उच्च श्रेणी की फिनिशिंग वाली प्रीमियम क्वालिटी की मूर्तियों का भाव करीब 4,000 रुपये से लेकर 5,000 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच जाता है। कारोबारियों का यह भी कहना है कि आज का ग्राहक केवल बड़े आकार की मूर्तियों की तलाश में नहीं रहता, बल्कि वह छोटे आकार में भी उतनी ही बारीकी और शानदार फिनिशिंग वाली मूर्तियां खरीदना पसंद कर रहा है।
सालों-साल टिकाऊ होने के कारण बढ़ रहा है लोगों का रुझान
पीतल से तैयार इन मूर्तियों की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इनकी प्रकृति बेहद टिकाऊ होती है। जो लोग पारंपरिक रूप से मिट्टी की मूर्तियां खरीदते हैं, उन्हें हर साल दिवाली पर नई मूर्ति लानी पड़ती है, जबकि पीतल की इन खूबसूरत मूर्तियों को एक बार खरीदने के बाद लंबे समय तक सुरक्षित संभालकर रखा जा सकता है। यही मुख्य वजह है कि आज बहुत से परिवार हर साल मिट्टी के बजाय दिवाली की पूजा के लिए पीतल की लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियां चुनना पसंद कर रहे हैं। मुरादाबाद के स्थानीय कारीगरों की बेहतरीन कारीगरी, नए-नए डिजाइन और आकर्षक चमक इन मूर्तियों को बाजार में विशेष दर्जा दिला रही है। दिवाली के इस बड़े त्योहार के चलते बाजार में आई तेजी से स्थानीय पीतल उद्योग को जबरदस्त रफ्तार मिल रही है और मुरादाबाद की यह पारंपरिक पहचान देश की सीमाओं को लांघकर सात समंदर पार तक अपनी चमक बिखेर रही है।



















