लाइव: मुंबई के कुर्ला में भूस्खलन से 4 लोगों की मौत, कई दबे; राहत व बचाव कार्य जारीलाइव: संसद के मानसून सत्र का 18वां दिन: हंगामे के बाद लोकसभा 2 बजे तक स्थगित, राज्यसभा में नारेबाजी जारीमूलांक 7 अंकराशि 12 अगस्त 2026: केतु की सूक्ष्म दृष्टि से दूर होंगी गलतियां और मजबूत होंगे रिश्तेडॉ. विक्रम साराभाई की जयंती पर राजनाथ सिंह ने दी श्रद्धांजलि, कहा- वैज्ञानिक सोच ने भारत को दी नई दिशामूलांक 9 अंकराशि 12 अगस्त 2026: मंगल और अंक 3 का योग बढ़ाएगा उत्साह, जानिए करियर और सेहत का हालमूलांक 8 अंकराशि 12 अगस्त 2026: शनि के अनुशासन और अंक 3 की ऊर्जा से मिलेगी कार्य में सफलता12 अगस्त 2026 का राशिफल: सूर्य ग्रहण के प्रभाव से चमकेगी इन राशियों की किस्मत, जानें मेष से मीन तक सभी 12 राशियों का सटीक भविष्यफलडोनाल्ड ट्रंप के निर्देश पर नाबालिगों के जेंडर ट्रांजिशन के लिए मेडिकेयड फंडिंग बंदआवारापन 2 रिव्यू (2026): 19 साल पुरानी डिजास्टर फिल्म का सीक्वल, इमरान हाशमी की वापसी और मेकर्स का बड़ा दांवगोरखपुर के महान क्रांतिकारी बाबू बंधू सिंह के बलिदान दिवस पर योगी आदित्यनाथ ने दी श्रद्धांजलि, जानिए तरकुलहा देवी से जुड़ा 7 बार फांसी का अद्भुत इतिहास
पालक की खेती: कम निवेश में बंपर मुनाफे का आधुनिक तरीकाव्यापार
28 जून 2026, 7:33 am (45 दिन पहले)· 3

पालक की खेती: कम निवेश में बंपर मुनाफे का आधुनिक तरीका

पालक की खेती बहुत कम समय में तैयार होने वाली और सालभर बाजार में डिमांड वाली फसल है, जिससे किसान अच्छी कमाई कर सकते हैं। सही तकनीकी अपनाकर इसकी पैदावार को कई गुना तक बढ़ाया जा सकता है।

पालक एक ऐसी पत्तेदार सब्जी है जिसकी मांग बाजार में पूरे साल बनी रहती है। यह फसल इतनी तेजी से बढ़ती है कि बुवाई के महज 25 से 40 दिनों के बीच पहली फसल कटाई के लिए पूरी तरह तैयार हो जाती है। खेती से जुड़े जानकारों का मानना है कि कम लागत में अधिक उत्पादन देने के कारण यह किसानों के लिए एक भरोसेमंद विकल्प है। कम समय में तैयार होने के कारण किसान इससे लगातार और जल्दी आय अर्जित कर सकते हैं, जिससे यह आर्थिक रूप से काफी फायदेमंद साबित होता है।

मिट्टी का चुनाव और बुवाई की तैयारी

पालक की भरपूर फसल लेने के लिए खेत की मिट्टी का चयन महत्वपूर्ण है। भुरभुरी, उपजाऊ और ऐसी मिट्टी जिसमें पानी का निकास उत्तम हो, इसके लिए सबसे बेहतर मानी जाती है। बुवाई से पहले खेत की अच्छी तरह जुताई करके उसमें पर्याप्त मात्रा में जैविक खाद या पुरानी गोबर की खाद मिलाना चाहिए। यह प्रक्रिया पौधों की शुरुआती बढ़त के लिए बेहद आवश्यक पोषण प्रदान करती है। पालक की बुवाई सीधे बीज के जरिए की जाती है, जिसमें बीजों को सही गहराई पर डालना और दो पौधों के बीच उचित दूरी रखना जरूरी है, ताकि उन्हें फैलने के लिए पर्याप्त स्थान मिल सके और कुल उत्पादन प्रभावित न हो।

ये भी पढ़ें

सिंचाई और पोषण प्रबंधन

पालक की फसल में सिंचाई का संतुलन बहुत महत्वपूर्ण है। मिट्टी में हमेशा नमी होनी चाहिए, लेकिन जलभराव से बचना अनिवार्य है, क्योंकि अत्यधिक पानी से पौधों की जड़ें सड़ सकती हैं और पूरी फसल बर्बाद हो सकती है। अच्छी और हरी-भरी पत्तियां प्राप्त करने के लिए शुरुआत में नाइट्रोजन युक्त उर्वरक या जैविक खाद का उपयोग करना चाहिए। यह पोषण पौधों को तेजी से बढ़ने में मदद करता है और पत्तियों की गुणवत्ता में सुधार लाता है।

रोग नियंत्रण और देखभाल

फसल को कीटों और बीमारियों से सुरक्षित रखने के लिए नियमित निगरानी बहुत जरूरी है। खेत को हमेशा साफ रखना चाहिए और समय-समय पर फसलों का निरीक्षण करते रहना चाहिए। यदि किसी पत्ती में संक्रमण दिखे, तो उसे तुरंत हटा देना चाहिए ताकि बीमारी पूरे खेत में न फैले। चूंकि पालक एक जल्दी तैयार होने वाली फसल है, इसलिए शुरुआती चरणों में सही प्रबंधन करने से आप बेहतर उपज और उच्च गुणवत्ता वाली पत्तियां पा सकते हैं।

कटाई की तकनीक और मुनाफा

पालक की कटाई सही समय पर करना बहुत मायने रखता है। पत्तियों को तभी तोड़ें जब वे कोमल, हरी और ताजी हों। आजकल कई प्रगतिशील किसान 'कट एंड कम अगेन' तकनीक का उपयोग कर रहे हैं। इस विधि में पत्तियों को इस प्रकार तोड़ा जाता है कि जड़ से दोबारा नई पत्तियां निकल सकें। इस तरह एक बार फसल बोने पर कई बार कटाई की जा सकती है, जिससे कुल उत्पादन बढ़ जाता है और मुनाफा भी कई गुना हो जाता है। सही देखभाल और बाजार के बेहतर प्रबंधन के साथ यह खेती एक लाभदायक व्यवसाय है।

सवाल-जवाब

पालक की पहली कटाई कितने दिनों में की जा सकती है?
पालक बुवाई के लगभग 25 से 40 दिनों के भीतर पहली कटाई के लिए तैयार हो जाता है।
पालक की खेती के लिए कैसी मिट्टी अच्छी होती है?
उपजाऊ, भुरभुरी और अच्छी जल निकासी वाली मिट्टी पालक की खेती के लिए सबसे उपयुक्त मानी जाती है।
कट एंड कम अगेन तकनीक क्या है?
यह एक ऐसी तकनीक है जिसमें फसल की कटाई इस तरह की जाती है कि जड़ सुरक्षित रहे और दोबारा नई पत्तियां उग सकें, जिससे एक ही फसल से कई बार उत्पादन लिया जा सके।
पालक में जलभराव से क्या नुकसान हो सकता है?
खेत में जलभराव होने से पौधों की जड़ें सड़ने लगती हैं और पूरी फसल खराब होने का खतरा बढ़ जाता है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR