डिजिटल स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र की प्रमुख कंपनी हिम्स ने पुरुषों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए टेस्टोस्टेरोन रिप्लेसमेंट थेरेपी की शुरुआत कर दी है। इस नई पेशकश के तहत सिgender पुरुषों को घर बैठे ही कैपिलरी ब्लड टेस्ट की सुविधा दी जाएगी, जिसके बाद जरूरत पड़ने पर उन्हें ओरल गोलियां या दो प्रकार के इंजेक्शन वाले उपचार उपलब्ध कराए जाएंगे। कंपनी के पुरुषों के स्वास्थ्य प्रभाग के वरिष्ठ उपाध्यक्ष और मूत्र रोग विशेषज्ञ पीटर स्टाल का उद्देश्य ज्यादा से ज्यादा पुरुषों की हार्मोन संबंधी जांच करना है ताकि सही समय पर सही चिकित्सकीय सहायता पहुंचाई जा सके।
शुरुआती स्टार्टअप से लेकर हार्मोन थेरेपी तक का सफर
साल 2017 में जब हिम्स की शुरुआत हुई थी, तब कंपनी मुख्य रूप से इरेक्टाइल डिसफंक्शन की दवाओं की बिक्री पर केंद्रित थी। समय के साथ इसने महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़े उत्पादों तक अपना विस्तार किया और एक छोटे स्टार्टअप से आगे बढ़ते हुए सार्वजनिक रूप से सूचीबद्ध कंपनी बन गई। मौजूदा समय में हिम्स के 2.9 मिलियन यानी 29 लाख से अधिक ग्राहक हैं। टेस्टोस्टेरोन रिप्लेसमेंट थेरेपी की शुरुआत को कंपनी के विकास का एक परिपक्व चरण माना जा रहा है।
पीटर स्टाल के अनुसार, शुरुआती दिनों में कंपनी के पास टेस्टोस्टेरोन की कमी जैसी जटिल स्थिति का इलाज करने की चिकित्सकीय क्षमता नहीं थी, लेकिन अब वे इसके लिए पूरी तरह तैयार हैं। उनका मानना है कि यह स्थिति समाज में बेहद कम पहचानी जाती है और इसे लेकर कई तरह की गलतफहमियां फैली हुई हैं। वर्ष 1990 के एनाबॉलिक स्टेरॉयड कंट्रोल एक्ट के तहत टेस्टोस्टेरोन को एक नियंत्रित पदार्थ घोषित किया गया था, जिसके बाद से इसे केवल बॉडीबिल्डिंग और जिम जाने वालों से जोड़कर देखा जाने लगा। इसके कारण इस हार्मोन को लेकर एक सामाजिक संकोच पैदा हो गया था। हालांकि पुराने शोधों में इसे दिल की बीमारियों के जोखिम से जोड़ा गया था, लेकिन हाल के अध्ययनों ने साफ किया है कि उन आशंकाओं को जरूरत से ज्यादा बढ़ा-चढ़ाकर देखा गया था।
घर पर आसान ब्लड सैंपलिंग और 21 बायोमार्कर्स की जांच
हिम्स ने ब्लड सैंपल लेने की प्रक्रिया को बेहद सरल और दर्द रहित बनाने का प्रयास किया है। इसके लिए पारंपरिक रूप से नस से खून निकालने की जरूरत नहीं होगी। मरीजों को तासो नामक एक विशेष ब्लड कलेक्शन डिवाइस भेजा जाएगा। यह गोल आकार का सिंगल-यूज उपकरण मरीज की बांह के ऊपरी हिस्से पर चिपक जाता है और इसमें मौजूद माइक्रोनीडल्स की मदद से त्वचा पर हल्का सा छिद्र करके खून की बूंदें एकत्र कर लेता है।
इसके बाद मरीज उस सैंपल को प्रयोगशाला में भेज देता है, जहां व्यापक जांच की जाती है। इस परीक्षण में केवल टेस्टोस्टेरोन ही नहीं, बल्कि ट्राईग्लिसराइड्स और थायरॉइड हार्मोन सहित कुल 21 अलग-अलग बायोमार्कर्स की पड़ताल की जाती है। पीटर स्टाल का कहना है कि युवा पुरुषों को कोलेस्ट्रॉल जांचने के लिए प्रेरित करना कठिन होता है, लेकिन टेस्टोस्टेरोन जांच को लेकर वे काफी उत्साहित रहते हैं। इस जांच के जरिए पुरुषों को संपूर्ण स्वास्थ्य मूल्यांकन के लिए प्रेरित किया जा सकता है। कम टेस्टोस्टेरोन वाले पुरुषों में समग्र मृत्यु दर का जोखिम 35 प्रतिशत अधिक पाया गया है, इसलिए इसे स्वास्थ्य का एक महत्वपूर्ण बायोमार्कर माना जाता है।
कड़े नियम और अनिवार्य वीडियो परामर्श
टेस्टोस्टेरोन के एक नियंत्रित पदार्थ होने की वजह से डिजिटल क्लिनिक इसे सामान्य दवाओं की तरह आसानी से नहीं बांट सकते। उदाहरण के लिए, वजन घटाने वाली जीएलपी-1 दवाओं या महिलाओं के लिए एस्ट्रोजन आधारित हार्मोन थेरेपी के मामलों में मरीज अक्सर केवल एक साधारण ऑनलाइन प्रश्नावली भरकर डॉक्टर से पर्चा हासिल कर लेते हैं। टेस्टोस्टेरोन के मामले में ऐसा संभव नहीं है। यहां सिंक्रोनस केयर का नियम लागू होता है, जिसका अर्थ है कि मरीज को प्रिस्क्रिप्शन मिलने से पहले डॉक्टर के साथ अनिवार्य रूप से वीडियो कॉल पर बात करनी होगी। उपचार शुरू होने के बाद भी मरीज की निरंतर निगरानी इसी तरह की जाएगी।
मैकनेयर मेडिकल इंस्टीट्यूट में बेलर कॉलेज ऑफ मेडिसिन की लेबोरेटरी फॉर एंड्रोलॉजी रिसर्च के निदेशक और मूत्र रोग विशेषज्ञ मोहित खेरा ने इस थेरेपी को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी है। उनका कहना है कि टेस्टोस्टेरोन थेरेपी से बांझपन का खतरा हो सकता है, इसलिए परिवार नियोजन का प्रयास कर रहे पुरुषों को यह दवा कभी नहीं दी जानी चाहिए। उनके अनुसार जब तक इलाज की उचित निगरानी की जाती है, तब तक डिजिटल स्वास्थ्य सेवाएं मरीजों तक दवा की पहुंच बढ़ाने का एक बेहतर माध्यम साबित हो सकती हैं।
राजनीतिक चर्चा और ऑनलाइन बाजार की चुनौतियां
अमेरिका में टेस्टोस्टेरोन इन दिनों राजनीतिक चर्चाओं के केंद्र में भी आ चुका है। पेंटागन प्रमुख पेट हेगसेथ ने इस पतझड़ में अमेरिकी सशस्त्र बलों के अधिकांश पुरुष सैनिकों के लिए टेस्टोस्टेरोन की अनिवार्य जांच की घोषणा की थी। इसके अलावा, टेक्सास में सीनेट के मध्यावधि चुनाव के दौरान केन पैक्सटन और जेम्स टैलारिको के बीच चल रहे कड़े मुकाबले में भी नेताओं द्वारा पौरुष पर सवाल उठाने के लिए लो टी शब्द का इस्तेमाल किया गया।
इस बीच हिम्स द्वारा इस गर्मी में कराए गए 2,000 अमेरिकी पुरुषों के सर्वेक्षण से पता चला कि पुरुष अब आपस में इस विषय पर बात करने के लिए तैयार हैं, फिर भी इलाज कराने को लेकर संकोच पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। इसके अलावा ऑनलाइन बाजार में कई ऐसी डिजिटल क्लीनिक सामने आई हैं जो बिना सोचे-समझे यह दवाएं बांट रही हैं। वर्ष 2022 में यूरोलॉजी शोधकर्ताओं द्वारा किए गए एक गुप्त अध्ययन में पाया गया कि सात में से छह ऑनलाइन प्लेटफॉर्म सामान्य हार्मोन स्तर होने के बावजूद टेस्टोस्टेरोन थेरेपी की पेशकश कर रहे थे।
हालांकि हिम्स ने स्पष्ट किया है कि वे हर किसी को दवा नहीं देंगे। हाइपोगोनेडिज्म के सामान्य लक्षणों में यौन दुर्बलता और मांसपेशियों का कमजोर होना शामिल है। पीटर स्टाल का कहना है कि सिर्फ ब्लड टेस्ट के आधार पर दवा नहीं लिखी जाएगी। यदि किसी मरीज में इस बीमारी के कोई लक्षण नहीं हैं, तो चाहे उसका हार्मोन स्तर कुछ भी आए, उसे हिम्स के प्लेटफॉर्म पर उपचार नहीं दिया जाएगा।

















