राजस्थान के भरतपुर इलाके में घटित पूर्व विधायक अतर सिंह भड़ाना हत्याकांड की तफ्तीश में जांचकर्ताओं के हाथ बेहद चौंकाने वाले तथ्य लगे हैं। पुलिस रिमांड के दौरान मुख्य साजिशकर्ता के रूप में चिन्हित मुकेश से हुई गहन पूछताछ ने इस पूरे खूनी घटनाक्रम की पूर्व नियोजित पटकथा को बेनकाब कर दिया है। सामने आए विवरण के अनुसार, पूर्व जन प्रतिनिधि की जान लेने के लिए बेहद सोची समझी रणनीति के तहत गांव में जानबूझकर दहशत और आक्रोश का माहौल बनाया गया था। मामले की कड़ियों को जोड़ते हुए पुलिस अब उन तमाम लोगों की शिनाख्त में जुटी है, जिन्होंने इस घातक योजना को धरातल पर उतारने में सक्रिय भूमिका निभाई थी।
झूठी गोलीबारी की खबर फैलाकर तैयार की गई हिंसक भीड़
जांच अधिकारियों द्वारा जुटाए गए ब्योरे के मुताबिक, षड्यंत्र के सूत्रधार मुकेश को जैसे ही इस बात की भनक लगी कि पूर्व विधायक अतर सिंह भड़ाना स्थानीय खदान क्षेत्र में मौजूद हैं, उसने तुरंत ग्रामीणों को भड़काने का ताना-बाना बुनना शुरू कर दिया। ग्रामीणों को तत्काल उद्वेलित करने के उद्देश्य से उसने इलाके में यह मनगढ़ंत अफवाह फैला दी कि खदान स्थल पर भारी गोलीबारी हो रही है। इतना ही नहीं, लोगों की भावनाओं को भड़काने के लिए यह झूठी सूचना भी प्रसारित की गई कि फायरिंग के दौरान गांव के कई स्थानीय निवासियों को गोलियां लग चुकी हैं और वे गंभीर रूप से लहूलुहान हैं।
अपने ही गांव के लोगों पर हमला होने और उन्हें गोलियां लगने की खबर सुनते ही इलाके के आम ग्रामीण उग्र हो उठे। बिना सच्चाई की पड़ताल किए भारी संख्या में लोग अत्यंत उत्तेजित होकर लाठी-डंडों के साथ खदान की तरफ दौड़ पड़े। जांचकर्ताओं का स्पष्ट मानना है कि यदि यह मनगढ़ंत अफवाह न फैलाई जाती, तो इतनी बड़ी तादाद में उग्र लोगों का अचानक इकट्ठा होना संभव नहीं था। भीड़ की इस अंधाधुंध नाराजगी और उन्माद का फायदा उठाकर ही पूर्व विधायक पर जानलेवा हमला बोला गया, जिसका अंत उनके दर्दनाक कत्ल के रूप में हुआ।
पहाड़ी पर स्थित भैरव मंदिर के पुजारी की भूमिका संदेह के घेरे में
इस हत्याकांड की जांच का दायरा अब केवल मुख्य षड्यंत्रकारी तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसमें एक स्थानीय धर्मस्थल के सेवक की संलिप्तता का कोण भी सामने आ रहा है। पूछताछ के क्रम में यह जानकारी भी उभरकर आई है कि पहाड़ी पर बने भैरव मंदिर के पुजारी को भी इस पूरी साजिश में किसी न किसी स्तर पर साझीदार बनाया गया था। जांच एजेंसियां अब इस संवेदनशील पहलू की गहराई से पड़ताल कर रही हैं कि क्या मंदिर के परिसर अथवा वहां लगे संसाधनों का इस्तेमाल लोगों को इकट्ठा करने या संदेश प्रसारित करने के लिए किया गया था।
पुजारी की वास्तविक संलिप्तता, उसके द्वारा निभाई गई संदिग्ध भूमिका तथा इस प्रकरण में उसके खिलाफ बनने वाले कानूनी आधार की विस्तृत समीक्षा की जा रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जब तक पूरे साक्ष्य पुख्ता नहीं हो जाते, तब तक किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी, हालांकि मंदिर के पुजारी से जुड़े हर संपर्क सूत्र को बहुत बारीकी से खंगाला जा रहा है।
आरोपियों की तलाश और कानूनी पुष्टि की प्रक्रिया
इस सनसनीखेज वारदात में शामिल अन्य फरार अभियुक्तों पर शिकंजा कसने के लिए पुलिस प्रशासन पहले ही कड़े कदम उठा चुका है। मामले में वांछित चल रहे आठ प्रमुख आरोपियों की गिरफ्तारी सुनिश्चित करने के लिए उन पर पांच-पांच हजार रुपये का नकद इनाम घोषित किया गया है। स्पेशल टीमें लगातार संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं ताकि इस जघन्य कृत्य में सीधे तौर पर शामिल हमलावरों को सलाखों के पीछे भेजा जा सके।
पुलिस के सामने इस वक्त सबसे बड़ी कानूनी चुनौती पूछताछ में मिले इन बयानों को दस्तावेजी और वैज्ञानिक साक्ष्यों के जरिए प्रमाणित करने की है। अफवाह फैलाने के माध्यम, संदेश पहुंचाने वाले व्यक्तियों की श्रृंखला और घटनास्थल पर भीड़ के जमावड़े की पूरी टाइमलाइन तैयार की जा रही है। जांच अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि हिरासत में दिए गए बयानों की अदालत में पुख्ता साक्ष्यों के साथ पुष्टि कराई जाएगी, जिसके बाद ही इस हत्याकांड के मूल कारणों और अंतिम षड्यंत्र का औपचारिक खुलासा संभव हो सकेगा।



















