केंद्र सरकार ने प्याज की खेती करने वाले किसानों के हितों को सामने रखते हुए खरीद मूल्य में बदलाव करने का फैसला किया है। केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रह्लाद जोशी ने इस निर्णय की जानकारी देते हुए बताया कि सरकार किसानों को उनकी मेहनत का सही दाम दिलाने के लिए निरंतर कोशिश कर रही है। बीते कुछ समय से अलग-अलग इलाकों के किसान बेहतर कीमत की मांग उठा रहे थे। इसी पृष्ठभूमि में सरकार ने पूरी खरीद व्यवस्था की समीक्षा की और नई दरों पर मुहर लगाई। इस कदम को किसानों की कमाई बढ़ाने और कृषि क्षेत्र को मजबूती देने की दिशा में एक अहम पहल के तौर पर देखा जा रहा है।
13 जून से 1,650 रुपये प्रति क्विंटल पर होगी खरीद
सरकार द्वारा किए गए इस संशोधन के मुताबिक अब भंडारण के लायक गुणवत्ता वाले प्याज की खरीद 1,650 रुपये प्रति क्विंटल की न्यूनतम सुनिश्चित कीमत पर की जाएगी। यह नई दर 13 जून से प्रभावी मानी जाएगी। खरीद मूल्य तय करते वक्त मौजूदा मंडी भाव और बाजार के मौजूदा हालात को भी आधार बनाया गया है। सरकार चाहती है कि कीमतों के घटने-बढ़ने का बोझ किसानों पर ज्यादा न पड़े। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह फैसला ऐसे समय आया है जब बड़ी संख्या में किसान अपनी फसल के लिए ऊंचे दाम की आस लगाए बैठे थे।
अधिकारियों के साथ बैठक में हुई गहन चर्चा
इस निर्णय से पहले केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने उपभोक्ता मामले विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक अहम बैठक की। बैठक में प्याज की खरीद प्रक्रिया को और कारगर बनाने तथा इसका फायदा सीधे किसानों तक पहुंचाने के तौर-तरीकों पर विस्तार से बातचीत हुई। सरकार ने खुद को केवल खरीद मूल्य बढ़ाने तक सीमित नहीं रखा, बल्कि कीमत तय करने की समूची प्रक्रिया को अधिक व्यावहारिक और बाजार से जुड़ी बनाने पर भी बल दिया। अधिकारियों ने विभिन्न राज्यों के हालात, उत्पादन के स्तर और मंडियों में चल रहे भावों का बारीकी से आकलन किया, जिसके बाद यह फैसला लिया गया।
एमएसपी नहीं, पर किसानों के लिए सुरक्षा कवच जैसी है यह व्यवस्था
प्याज एक ऐसी फसल है जिसके भाव अक्सर तेजी से ऊपर-नीचे होते रहते हैं। साथ ही यह जल्दी खराब हो जाने वाली कृषि उपज भी मानी जाती है। यही वजह है कि केंद्र सरकार प्याज के लिए गेहूं और धान की तरह आधिकारिक न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी एमएसपी की घोषणा नहीं करती। इसके बदले किसानों को सहारा देने के लिए मूल्य स्थिरीकरण कोष (पीएसएफ) के तहत न्यूनतम सुनिश्चित खरीद मूल्य की व्यवस्था अपनाई जाती है। इस प्रणाली के जरिए सरकार जरूरत के मुताबिक किसानों से सीधी खरीद कर उन्हें बाजार में गिरते दामों से बचाने की कोशिश करती है। नई दरों में किया गया यह बदलाव भी इसी व्यवस्था का एक हिस्सा है।
किसानों की आय और बाजार संतुलन दोनों पर रहेगा जोर
सरकार का मानना है कि खरीद मूल्य बढ़ने से किसानों को बेहतर आमदनी होगी और वे अपनी उपज बेचने को लेकर ज्यादा निश्चिंत महसूस करेंगे। इसके साथ ही यह कदम बाजार में कीमतों का संतुलन बनाए रखने में भी मददगार साबित हो सकता है। जब सरकार उचित दर पर खरीद करती है, तो किसानों को मजबूरी में सस्ते में फसल बेचने की नौबत नहीं आती। इससे कृषि क्षेत्र में स्थिरता आती है और उत्पादन को भी बढ़ावा मिलता है। जानकारों का कहना है कि अगर किसानों को लगातार अच्छे दाम मिलते रहे तो वे आगे भी प्याज की खेती को तरजीह दे सकते हैं।
प्रमुख उत्पादक राज्यों के किसानों को सीधा फायदा
नई खरीद कीमत लागू होने के बाद देश के बड़े प्याज उत्पादक राज्यों के किसानों को इसका सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है। बाजार विशेषज्ञ मानते हैं कि इससे किसानों का भरोसा और मजबूत होगा तथा कृषि क्षेत्र में सकारात्मक संदेश जाएगा। 13 जून से शुरू हो रही नई व्यवस्था के तहत 1,650 रुपये प्रति क्विंटल की न्यूनतम सुनिश्चित खरीद कीमत किसानों को एक भरोसेमंद सुरक्षा कवच देगी। सरकार की यह पहल सिर्फ तात्कालिक राहत तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका मकसद किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करना और कृषि क्षेत्र को अधिक स्थिर बनाना भी है। ऐसे में इस फैसले को प्याज उत्पादकों के लिए एक अहम राहत पैकेज के रूप में देखा जा रहा है।













