हिमाचल प्रदेश के ऊंचे पर्वतीय इलाकों में घूमने जाने वाले सैलानियों के लिए शून्य डिग्री तापमान के बीच गर्म नाश्ता हमेशा सबसे पहली पसंद रहता है। मनाली के नजदीक रोहतांग दर्रे पर बेहद ठंडे मौसम में आजीविका चला रहे एक छोटे खोखे वाले ने जब अपने दैनिक कारोबार के आंकड़े साझा किए, तो इंटरनेट की दुनिया में हलचल मच गई। समुद्र तल से 13,050 फीट की ऊंचाई पर बर्फ के चारों ओर बनी इस साधारण सी दुकान पर मंदी के दिनों में भी हर रोज लगभग 14,000 रुपये का सामान बिक जाता है।
कंटेंट क्रिएटर हर्ष चौहान ने इस पहाड़ी इलाके का दौरा करते समय उक्त स्टॉल संचालक से उसके काम और आमदनी पर विस्तार से चर्चा की। शुरुआत में अपनी बिक्री की जानकारी साझा करने में थोड़ा संकोच दिखाने के बाद दुकानदार ने पूरी स्थिति स्पष्ट की। बातचीत के दौरान उसने मुस्कुराते हुए अपनी स्थिति बताई कि अभी ऑफ-सीजन चलने की वजह से काम हल्का है और आमदनी सामान्य से काफी घट चुकी है।
प्रतिदिन 200 प्याली चाय और दर्जनों प्लेट नूडल्स का हिसाब
पर्यटकों की आवाजाही कम होने के बावजूद इस अस्थायी दुकान पर ग्राहकों का तांता लगा रहता है। संचालक ने अपने दैनिक कामकाज का विवरण देते हुए बताया कि इन शांत दिनों में भी 60 से 70 प्लेट नूडल्स की खपत आसानी से हो जाती है। इसके साथ ही करीब 200 कप गर्म चाय हर रोज बिकती है। भूख मिटाने के लिए कई यात्री इनके अलावा उबले अंडे और ऑमलेट की मांग भी करते हैं।
दुकानदार ग्राहकों से एक प्लेट नूडल्स के एवज में 100 रुपये लेता है, जिससे रोजाना 6,000 से 7,000 रुपये का संग्रह सीधे नूडल्स के जरिए हो जाता है। वहीं चाय की प्रति प्याली दर 40 रुपये रखी गई है, जिससे दिन भर में 8,000 रुपये की अतिरिक्त नकदी जुटती है। दोनों उत्पादों की इस कुल बिक्री को जोड़ें तो प्रतिदिन का सकल आंकड़ा 14,000 रुपये पर पहुंचता है, जो महीने भर में 4 लाख रुपये से ज्यादा का ग्रॉस टर्नओवर तैयार करता है। जब ग्रीष्मकालीन छुट्टियों में सैलानियों की भारी भीड़ उमड़ती होगी, तब इस जगह का व्यापार कई गुना अधिक बढ़ जाता होगा।
कड़ी भौगोलिक परिस्थितियां और भारी परिचालन लागत
सोशल मीडिया मंच इंस्टाग्राम पर हर्ष चौहान द्वारा इस संवाद का वीडियो साझा करने के बाद लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आईं। कई लोगों को लगा कि बुनियादी खानपान की छोटी दुकान भी अगर सही मुकाम पर हो तो बड़ा कारोबार दे सकती है। सड़क किनारे स्टॉल लगाने को लेकर हिचकिचाने वाले युवाओं के लिए यह मिसाल बनी कि महंगे कैफे सेटअप के बगैर भी उपभोक्ता की जरूरत पूरी करके तगड़ा राजस्व हासिल किया जा सकता है।
दूसरी ओर, कई जानकारों ने इस कमाई के पीछे छिपी जमीनी चुनौतियों और वास्तविक खर्चे की हकीकत बयां की। उपयोगकर्ताओं ने स्पष्ट किया कि सामने दिखने वाला 14,000 रुपये का आंकड़ा केवल कुल राजस्व है, शुद्ध मुनाफा नहीं। 13,050 फीट की ऊंचाई पर शून्य से नीचे गिरते पारे में दुकान संचालित करना भारी जोखिम भरा काम है। मनाली की घाटी से रोहतांग की चोटी तक पीने का पानी, कच्ची खाद्य सामग्री और एलपीजी सिलेंडर ढोने में ही भारी परिवहन लागत लग जाती है। तेज सर्द हवाओं के थपेड़ों के कारण गैस की खपत सामान्य से दोगुनी हो जाती है, जबकि बर्फीले वातावरण में सुबह-सुबह पानी पिघलाना और पर्यटकों के लिए भोजन तैयार करना बेहद थकाऊ संघर्ष है।


















