खाड़ी क्षेत्र में एक और बड़े सैन्य टकराव की आशंकाओं के बीच कूटनीतिक प्रयासों को तेज कर दिया गया है। दोहा में कतर के नेतृत्व में जारी विचार-विमर्श के दौरान संयुक्त अरब अमीरात ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका और ईरान के बीच किसी भी संभावित नए युद्ध को रोकने के लिए केवल कूटनीति ही एकमात्र व्यावहारिक रास्ता है। बहरीन की राजधानी में आयोजित सालाना सुरक्षा सम्मेलन मनामा डायलॉग में भाग लेते हुए क्षेत्रीय नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि दोनों पक्षों के बीच के मतभेदों को जल्द नहीं सुलझाया गया तो स्थिति बेहद गंभीर रूप ले सकती है।
कतर वार्ता और हॉर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने का प्रस्ताव
ईरानी वार्ताकार इस समय कतर में मौजूद हैं जहां एक नए प्रस्ताव पर बातचीत की जा रही है। इस प्रस्ताव के तहत रणनीतिक रूप से अहम हॉर्मुज जलडमरूमध्य को जल्द से जल्द दोबारा खोलने की योजना पर विचार हो रहा है। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने टेलीग्राम पर दिए एक साक्षात्कार में इन वार्ताओं की स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने बताया कि अमेरिका के साथ सीधे तौर पर कोई आमने-सामने की बातचीत नहीं हो रही है। अराघची के अनुसार किसी भी समझौते का परिणाम पूरी तरह से इस बात पर निर्भर करता है कि वॉशिंगटन ईरानी सवालों का क्या जवाब देता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि ईरान दोनों ही परिस्थितियों के लिए तैयार है, चाहे वह रक्षा का मार्ग हो या कूटनीति का, लेकिन उम्मीद यही है कि अमेरिका बुद्धिमानी दिखाते हुए राजनीतिक समाधान को चुनेगा।
मनामा डायलॉग में यूएई की दो टूक चेतावनी
इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रैटेजिक स्टडीज (IISS) द्वारा आयोजित सुरक्षा सम्मेलन में संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति के सलाहकार अनवर गरगाश ने क्षेत्रीय हालातों पर अपनी बात रखी। गरगाश ने स्पष्ट कहा कि क्षेत्र में कोई भी नया टकराव नहीं देखना चाहता। उन्होंने सम्मेलन में शामिल वैश्विक और क्षेत्रीय सुरक्षा विशेषज्ञों को संबोधित करते हुए कहा कि मौजूदा संकट को सुलझाने के लिए गहरी राजनीतिक समझ और कूटनीतिक तरीकों की आवश्यकता है। सैन्य कार्रवाई से पहले से ही जटिल स्थिति और अधिक बिगड़ जाएगी।
गरगाश ने यह भी आगाह किया कि अमेरिका और ईरान के रुख में अब भी बहुत बड़ा फासला है। उन्होंने कहा कि अगर इन दोनों विरोधी पक्षों के रुख के बीच का अंतर कम नहीं किया गया, तो सबसे बुरे हालात का सामना करने की चिंता बढ़ जाएगी। गरगाश ने दोहराया कि न तो ईरान के हित में दोबारा युद्ध में उतरना है और न ही खाड़ी क्षेत्र के हित में, लेकिन संभावित तनाव को देखते हुए यूएई और अन्य खाड़ी देश हर तरह की स्थिति से निपटने की तैयारियां भी कर रहे हैं।
फरवरी से शुरू हुआ संघर्ष और खाड़ी देशों पर व्यापक असर
मौजूदा संकट की जड़ें 28 फरवरी को शुरू हुए युद्ध से जुड़ी हैं। इसकी शुरुआत अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमलों से हुई थी, जिसके जवाब में ईरान ने खाड़ी देशों को निशाना बनाकर जवाबी हमले किए थे। अप्रैल में लागू हुए संघर्ष विराम से पहले, यूएई को ईरान की ओर से सबसे ज्यादा हवाई हमलों का सामना करना पड़ा था। सुरक्षा शोध संस्थान IISS के आंकड़ों के अनुसार, उस दौरान हवाई अड्डों, सैन्य ठिकानों और तेल सुविधाओं को निशाना बनाकर 3,000 से अधिक ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइलें दागी गई थीं। हालांकि इनमें से अधिकांश हमलों को सुरक्षा प्रणालियों ने हवा में ही नष्ट कर दिया था। इस संघर्ष विराम के बाद से ही खाड़ी देशों ने अपनी रक्षा प्रणालियों को मजबूत करने के लिए अरबों डॉलर खर्च किए हैं। गरगाश ने बताया कि इस युद्ध ने यूएई और अमेरिका के सुरक्षा संबंधों को और गहरा किया है, जो यूएई की अपनी रक्षा क्षमता के केंद्र में स्थित है।
बहरीन पर हमले और अहम बुनियादी ढांचे को खतरा
बहरीन भी इस संघर्ष की सीधी चपेट में आया था, जहां अमेरिकी नौसेना का 5वां बेड़ा तैनात है। IISS के ब्योरे के मुताबिक, ईरान ने बहरीन की दिशा में 500 ड्रोन और लगभग 200 बैलिस्टिक मिसाइलें दागी थीं। इन हमलों का असर केवल नौसैनिक अड्डे तक सीमित नहीं रहा, बल्कि रिहायशी इमारतों, वित्तीय जिले और पानी को पीने योग्य बनाने वाले डीसेलिनेशन प्लांट पर भी पड़ा। इससे नागरिक सुविधाओं को पहुंचे नुकसान को लेकर चिंताएं काफी बढ़ गई थीं।
मनामा में बहरीन के विदेश मंत्री अब्दुललतीफ बिन राशिद अल ज़यानी ने कहा कि बहरीन तनाव को कम करने वाले हर कदम का समर्थन करता है और संवाद का दायरा बढ़ाने के पक्ष में है। साथ ही उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि ईरान के हमलों और धमकियों का एक निरंतर पैटर्न दिखाई देता रहा है। उनके मुताबिक ईरान के निशाने पर समुद्री मार्ग, हवाई क्षेत्र और डेटा सुविधाएं रही हैं। ज़यानी ने बताया कि संघर्ष विराम के बाद भी इस तरह का आचरण बंद नहीं हुआ है और पिछले महीने ही पानी के नीचे मौजूद डेटा केबल्स को खतरा पहुंचाया गया था।
सऊदी अरब में हूती हमलों से बढ़ा भू-राजनीतिक दबाव
बहरीन के विदेश मंत्री ने सऊदी अरब पर ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के हमलों का भी उल्लेख किया। इस गर्मी में हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के तेल ठिकानों और हवाई अड्डों पर अपने हमलों की तीव्रता बढ़ा दी थी। हूती गुट ने इन हमलों को सना हवाई अड्डे पर सऊदी हवाई हमलों का जवाब बताया था। इन हमलों के कारण सऊदी अरब की महत्वपूर्ण तेल पाइपलाइनों को नुकसान पहुंचा और हवाई यातायात बाधित हुआ। सुरक्षा सम्मेलन में शामिल अधिकारियों ने माना कि इन तमाम जमीनी दबावों और सुरक्षा जोखिमों के कारण खाड़ी में स्थिति बेहद नाजुक बनी हुई है, जिससे कतर में चल रही कूटनीतिक वार्ताओं का महत्व और अधिक बढ़ गया है।



















