भारतीय क्रिकेट टीम ने 1 नवंबर 2026 को समाप्त हुई पांच मैचों की घरेलू टी20 अंतरराष्ट्रीय श्रृंखला में न्यूजीलैंड को 3-2 के अंतर से मात देकर ट्रॉफी पर कब्जा जमाया. इस पूरी प्रतियोगिता में टीम इंडिया का दबदबा शुरुआती चरण में पूरी तरह देखने को मिला, जब उसने शुरुआती तीनों मैच लगातार जीतकर सीरीज में अजेय बढ़त हासिल कर ली थी. इसके बाद अंतिम दो मुकाबलों में कीवी टीम ने पलटवार करते हुए जीत दर्ज की और स्कोरलाइन के अंतर को कम करने में सफलता पाई. अब भारतीय दल का ध्यान 22 दिसंबर 2026 से श्रीलंका के खिलाफ शुरू होने वाली तीन मैचों की अगली टी20 अंतरराष्ट्रीय श्रृंखला पर केंद्रित हो चुका है, जिसके लिए चयन समिति और टीम प्रबंधन कमजोर कड़ियों की समीक्षा में जुटे हैं.
शुरुआती जीत के बावजूद श्रीलंका सीरीज के लिए मंथन तेज
न्यूजीलैंड के खिलाफ श्रृंखला अपने नाम करने के बाद भी टीम प्रबंधन कई पहलुओं को लेकर सतर्क नजर आ रहा है. श्रीलंका के खिलाफ आगामी घरेलू मुकाबले 22 दिसंबर 2026 से शुरू होंगे, जिससे पहले चयनकर्ता उन खिलाड़ियों की भूमिका और हालिया फॉर्म की बारीकी से पड़ताल कर रहे हैं जो हालिया मौकों को भुनाने में असफल रहे. कई रणनीतिकारों का मानना है कि टी20 प्रारूप में निरंतरता बनाए रखने के लिए प्रदर्शन में गिरावट झेल रहे खिलाड़ियों की जगह नए विकल्पों को अवसर दिया जाना आवश्यक हो चुका है. विशेषकर गेंदबाजी विभाग में अत्यधिक रन लुटाने की समस्या ने चयनकर्ताओं के सामने सवाल खड़े कर दिए हैं.
भुवनेश्वर कुमार की लय और महंगे स्पेल ने बढ़ाई परेशानी
इस संभावित छंटनी में सबसे प्रमुख नाम वरिष्ठ तेज गेंदबाज भुवनेश्वर कुमार का सामने आ रहा है. चार साल के लंबे अंतराल के बाद राष्ट्रीय जर्सी में वापसी करने वाले भुवनेश्वर के लिए यह द्विपक्षीय सीरीज व्यक्तिगत रूप से निराशाजनक साबित हुई. पहले तीन मैचों के दौरान उनकी गेंदबाजी में वह चिरपरिचित नियंत्रण और सटीक लाइन-लेंथ गायब दिखी जिसके लिए वह जाने जाते हैं. न्यूजीलैंड के आक्रामक बल्लेबाजों ने उनकी गेंदों पर आसानी से बड़े प्रहार किए, जिसके कारण वह विपक्षी खेमे पर शुरुआती दबाव बनाने में नाकाम रहे.
आंकड़ों की समीक्षा करें तो पहले तीन मुकाबलों में भुवनेश्वर कुमार ने कुल 12 ओवर फेंके और इन ओवरों में 139 रन लुटा दिए, जबकि उन्हें केवल 1 विकेट ही मिल सका. इस दौरान उनका इकॉनमी रेट 11.58 का रहा, जो आधुनिक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में किसी भी अनुभवी गेंदबाज के लिए अत्यधिक महंगा माना जाता है. इस कमजोर प्रदर्शन के कारण उन्हें ऑकलैंड में आयोजित चौथे मुकाबले की अंतिम एकादश से बाहर बैठना पड़ा था. हालांकि हैमिल्टन में खेले गए पांचवें मैच में उन्हें दोबारा मैदान पर उतारा गया, परंतु वहां भी वह अपनी छाप नहीं छोड़ सके और 10.25 के इकॉनमी रेट से रन देकर प्रभावित करने से चूक गए.
अक्षर पटेल की ऑलराउंड भूमिका पर उठते सवाल
टीम के प्रमुख ऑलराउंडर अक्षर पटेल भी चयनकर्ताओं की समीक्षा के दायरे में आ गए हैं. अक्षर ने इस पांच मैचों की सीरीज के पहले चार मैचों में भाग लिया, जबकि पांचवें मुकाबले के लिए उन्हें आराम दिया गया था. बल्लेबाजी के दृष्टिकोण से उन्होंने पहले मैच में 14 गेंदों में 24 रनों का तेज योगदान देकर सकारात्मक शुरुआत की थी, किंतु वह इस फॉर्म को आगे की पारियों में निरंतर बनाए रखने में विफल रहे. उन्होंने पूरी प्रतियोगिता की तीन पारियों में कुल मिलाकर केवल 42 रन जुटाए, जिसमें उनका स्ट्राइक रेट 131.25 दर्ज हुआ.
बल्लेबाजी से इतर गेंदबाजी में उनकी फॉर्म टीम के लिए अधिक चिंताजनक पहलू बनकर उभरी. अक्षर ने पहले टी20 मैच में अपने चार ओवरों के कोटे में 51 रन दे डाले, जबकि ऑकलैंड में खेले गए चौथे टी20 मुकाबले में भी उन्होंने तीन ओवरों में 43 रन खर्च किए. कुल मिलाकर चार पारियों में उन्होंने 10.53 के महंगे इकॉनमी रेट से रन देते हुए मात्र 3 विकेट अपने खाते में जोड़े. निचले क्रम में बल्ले से मजबूती देने और मध्य ओवरों में रनों पर अंकुश लगाने की उनकी पारंपरिक क्षमता इस सीरीज में कमजोर नजर आई, जिसके चलते श्रीलंका दौरे की टीम में उनके स्थान पर तलवार लटक रही है.
वरुण चक्रवर्ती को मिले सीमित मौके और महंगा आखिरी ओवर
चोटों के लंबे दौर से उबरकर राष्ट्रीय दल में लौटे मिस्ट्री स्पिनर वरुण चक्रवर्ती के लिए भी यह शृंखला उम्मीद के मुताबिक साबित नहीं हो सकी. पांच मैचों की इस लंबी सीरीज के दौरान उन्हें अधिकांश समय बेंच पर ही बैठना पड़ा और टीम प्रबंधन ने उन्हें केवल हैमिल्टन में खेले गए पांचवें तथा अंतिम मुकाबले में ही आजमाने का फैसला किया.
इस एकमात्र मौके में वरुण चक्रवर्ती ने न्यूजीलैंड के बल्लेबाज डेरिल मिचेल का अहम विकेट जरूर चटकाया, किंतु पारी के डेथ ओवरों में वह रन गति पर लगाम कसने में सफल नहीं हो पाए. उन्होंने अपने निर्धारित चार ओवरों के कोटे में 45 रन दिए. केवल एक मैच खेलने और उसमें भी महंगे साबित होने के कारण आगामी श्रीलंका सीरीज के लिए उनके चयन को लेकर क्रिकेट विशेषज्ञों और चयनकर्ताओं के बीच संशय की स्थिति उत्पन्न हो गई है.



















