कम लागत में स्वरोजगार तलाश रहे युवाओं और महिलाओं के लिए मशरूम उत्पादन एक व्यावहारिक और टिकाऊ विकल्प बनकर उभर रहा है। समस्तीपुर जिले के ताजपुर प्रखंड की निवासी रीता स्थानीय स्तर पर लोगों को यह हुनर सिखाकर आत्मनिर्भर बनने की राह दिखा रही हैं। उनका स्पष्ट मानना है कि यदि योजनाबद्ध तरीके से काम किया जाए, तो बेहद सीमित पूंजी के साथ घर के एक छोटे कोने से भी इस कृषि कार्य को शुरू किया जा सकता है। महज 120 रुपये के मशरूम बीज से तैयार फसल की उचित देखभाल की जाए, तो उससे 800 से 1000 रुपये तक की उपज प्राप्त की जा सकती है, हालांकि अंतिम मुनाफा बाजार भाव और उत्पादन क्षमता पर टिका होता है।
बीज और भूसे के बुनियादी खर्च का सटीक गणित
इस पूरे उद्यम की बुनियादी लागत को समझना बेहद सरल है। रीता स्वयं अपने केंद्र पर मशरूम का गुणवत्तापूर्ण बीज तैयार करती हैं और इसे जरूरतमंद उत्पादकों को 120 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से मुहैया कराती हैं। इस खेती के लिए किसी बड़े कृषि भूखंड अथवा भारी मशीनरी की कतई आवश्यकता नहीं होती। सामान्य तौर पर एक किलोग्राम बीज के रोपण के लिए लगभग 10 किलोग्राम सूखे भूसे की आवश्यकता पड़ती है।
समस्तीपुर के स्थानीय बाजार में भूसे का मौजूदा भाव लगभग 8 से 10 रुपये प्रति किलोग्राम चल रहा है। इस हिसाब से 10 किलोग्राम भूसा जुटाने में लगभग 80 से 100 रुपये की लागत आती है। भूसे की सफाई, उसे पानी में उबालकर कीटाणुरहित करने और बैगिंग जैसी अन्य प्रारंभिक प्रक्रियाओं के खर्च को जोड़ने के बाद भी कुल शुरुआती पूंजी लगभग 400 रुपये के आसपास बैठती है। स्थानीय स्तर पर सामग्रियों के दाम में मामूली उतार-चढ़ाव होने पर लागत और मुनाफे के आंकड़ों में थोड़ा अंतर आ सकता है।
झोपड़ी और खाली कमरों में ऑयस्टर मशरूम का उत्पादन
ऑयस्टर मशरूम की खासियत यह है कि इसके लिए किसी पक्के वातानुकूलित ढांचे की जरूरत नहीं होती। ग्रामीण परिवेश में घर के पास खाली पड़ी झोपड़ी, कच्चा कमरा या किसी भी छायादार बंद जगह का उपयोग करके किसान इसकी पैदावार ले सकते हैं। बीजारोपण से लेकर फसल की पहली तुड़ाई तक में सामान्य तौर पर लगभग 30 दिनों का समय लगता है। सीमित समय चक्र के कारण यह मॉडल बिना किसी स्थायी रोजगार वाले ग्रामीणों के लिए नकदी प्रवाह का बेहतरीन माध्यम साबित होता है।
रीता केवल बीज बिक्री तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि वे शुरुआती उत्पादकों को तापमान प्रबंधन, नमी और कीट नियंत्रण का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी देती हैं। इच्छुक उत्पादक मार्गदर्शन और बीज प्राप्ति के लिए ताजपुर प्रखंड के कोटिया स्थित उनके केंद्र पर पहुंच सकते हैं। इसके अलावा तैयार मशरूम की थोक या खुदरा बिक्री के लिए ताजपुर प्रखंड के मोतीपुर सब्जी मंडी का बाजार भी उपलब्ध है, जहां से उपज का क्रय-विक्रय सुगमता से किया जाता है।
















