पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार मार्गों पर मंडराते अनिश्चितता के बादलों के बीच भारत की सबसे बड़ी सरकारी तेल रिफाइनरी कंपनी इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन ने एक बड़ा रणनीतिक फैसला लिया है। अपनी ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला को झटकों से बचाने और आयात लागत पर नियंत्रण बनाए रखने के लिए कंपनी अब खुद के कच्चे तेल और लिक्विड पेट्रोलियम गैस (LPG) ले जाने वाले मालवाहक जहाजों का बेड़ा खरीदने जा रही है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे अति-संवेदनशील समुद्री रास्तों में वाणिज्यिक जहाजों की आवाजाही पर पड़े प्रतिकूल असर और हाजिर बाजार में जहाजों के किराए में हुए अचानक इजाफे के कारण कंपनी को यह रक्षात्मक कदम उठाना पड़ रहा है।
बोर्ड की मंजूरी और टेंडर प्रक्रिया जारी
इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन के निदेशक (वित्त) अनुज जैन ने हाल ही में दूसरी तिमाही के वित्तीय आंकड़े जारी होने के बाद विश्लेषकों से बातचीत करते हुए इस योजना की विस्तृत जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने कुछ कार्गो शिप खरीदने के प्रस्ताव को पहले ही अपनी मंजूरी दे दी थी। इस खरीद प्रक्रिया को अमलीजामा पहनाने के लिए कई महीने पहले ही टेंडर भी आमंत्रित किए जा चुके हैं। अनुज जैन का कहना था कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में देश की ऊर्जा कंपनियों को अपने शिपिंग तंत्र को मजबूत करने और समुद्री परिवहन पर अधिक निर्भरता हासिल करने की सख्त जरूरत है।
'मेक इन इंडिया' के तहत घरेलू जहाज निर्माण की संभावनाएं
वैश्विक बाजार से जहाज खरीदने के साथ-साथ इंडियन ऑयल भारत में ही स्वदेशी जहाजों के निर्माण का विकल्प भी तलाश रही है। कंपनी सरकार के 'मेक इन इंडिया' अभियान के तहत भारतीय पोत कारखानों में नए मालवाहक जहाजों के निर्माण की व्यावहारिक संभावनाओं पर काम कर रही है। पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य व कूटनीतिक तनाव के चलते स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों के आवागमन में आई रुकावटों ने खुद की शिपिंग क्षमता बढ़ाने के महत्व को रेखांकित कर दिया है। वर्तमान में इंडियन ऑयल के पास दीर्घकालिक पट्टे पर लिए गए कच्चे तेल के 3 जहाज और LPG ढुलाई के लिए 9 जहाज परिचालन में हैं।
स्पॉट मार्केट की तुलना में चार्टर्ड जहाजों से भारी बचत
निश्चित अवधि के लिए किराए पर लिए गए जहाजों की वजह से कंपनी को हालिया वैश्विक शिपिंग संकट के दौरान मालभाड़े में बहुत बड़ी राहत मिली है। आंकड़ों के अनुसार, जहां हाजिर बाजार (स्पॉट मार्केट) में कच्चे तेल का समुद्री किराया बढ़कर 8 से 10 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल के ऊंचे स्तर पर पहुंच चुका है, वहीं इंडियन ऑयल के पहले से किराए पर तय जहाजों की लागत मात्र 2.00 से 2.50 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल आ रही है। इसी तरह LPG के मामले में, सामान्य परिस्थितियों में इसका मालभाड़ा लगभग 40 अमेरिकी डॉलर प्रति टन रहता था, जो वर्तमान में स्पॉट मार्केट में उछलकर 160 से 180 अमेरिकी डॉलर प्रति टन हो चुका है। इस चार गुना से अधिक की बढ़ोतरी से बचने के लिए ही इंडियन ऑयल अपने खुद के जहाजों का मालिकाना हक हासिल करने जा रही है।

















