दीपावली के शुभ अवसर पर धन और समृद्धि की देवी लक्ष्मी का स्वागत करने के लिए घरों में चरण चिह्न बनाने की पुरानी परंपरा रही है। आमतौर पर लोग अपने घरों के मुख्य द्वार और पूजा स्थल पर लाल रंग या सिंदूर से माता लक्ष्मी के पदचिह्न तैयार करते हैं। राजस्थान के बीकानेर शहर में इस लोक परंपरा को एक अनोखा और भव्य कलात्मक रूप दिया गया है। बीकानेर के प्रसिद्ध चित्रकार राम कुमार भदानी ने आम के पेड़ की लकड़ी पर सोने की कलम का उपयोग करके माता लक्ष्मी की बेहद खूबसूरत चरण पादुकाएं बनाई हैं, जो श्रद्धालुओं और कला प्रेमियों का ध्यान अपनी ओर खींच रही हैं।
परंपरा और आधुनिक कला का सुंदर संगम
चित्रकार राम कुमार भदानी बताते हैं कि दीपावली पर माता लक्ष्मी के पैरों के निशान अंकित करने की परंपरा युगों से चली आ रही है। सामान्यतः लोग कपड़े, कागज या फर्श पर लाल रंग से ये चिह्न उकेरते हैं। इसी मान्यता को ध्यान में रखते हुए उन्होंने इसे एक स्थायी और अलौकिक रूप देने का निर्णय लिया। उनका मुख्य उद्देश्य केवल एक कलात्मक वस्तु का निर्माण करना नहीं था, बल्कि नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति, पौराणिक मान्यताओं और सनातन अध्यात्म से जोड़ना भी था। सोने की कलम से की गई यह बारीक कलाकारी न केवल दिखने में भव्य लगती है, बल्कि लोगों को अपनी प्राचीन परंपराओं से जुड़ने की प्रेरणा भी देती है।
शुभ धार्मिक प्रतीकों का बारीक चित्रांकन
इन चरण पादुकाओं की सबसे बड़ी खासियत उन पर उकेरे गए अनेक पवित्र और धार्मिक प्रतीक हैं। राम कुमार भदानी के अनुसार, इन पादुकाओं पर कमल का फूल, त्रिशूल, शंख, चक्र, पद्म, स्वास्तिक, देवराज इंद्र का वज्र, तीर, धनुष, सूर्य, चंद्रमा तथा श्री यंत्र जैसे कुल 12 प्रमुख प्रतीकों को सूक्ष्मता से अंकित किया गया है। भारतीय संस्कृति में इन सभी प्रतीकों का अपना विशिष्ट आध्यात्मिक महत्व है। उदाहरण के लिए, कमल को पवित्रता और अपार समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। वहीं शंख और चक्र का सीधा संबंध भगवान विष्णु से है, जो सृष्टि के पालनहार हैं। इसके अतिरिक्त स्वास्तिक जीवन में शुभता लाता है, जबकि श्री यंत्र को माता लक्ष्मी की साधना और कृपा प्राप्ति का मुख्य केंद्र माना जाता है। इन सभी देव चिह्नों का समावेश पादुका को विशेष धार्मिक स्वरूप प्रदान करता है।
आम की लकड़ी पर मीनाकारी और सोने की कलम का कमाल
इन चरण पादुकाओं को बनाने की निर्माण प्रक्रिया काफी जटिल और धैर्य की मांग करने वाली है। इसके लिए सबसे पहले आम के पेड़ की लकड़ी का चयन करके उसे सुंदर आकार में ढाला जाता है। लकड़ी तैयार होने के बाद उस पर सोने की कलम से अत्यंत सूक्ष्म और बारीक चित्रकारी की जाती है। इस पर पारंपरिक मीनाकारी का काम भी किया जाता है, जिससे इसकी चमक और सौंदर्य कई गुना बढ़ जाता है। एक-एक प्रतीक को स्पष्ट और आकर्षक रूप देने के कारण इसे तैयार करने में काफी समय लगता है।
डेढ़ से दो महीने की मेहनत और सीमित उपलब्धता
चित्रकार भदानी के अनुसार, ऐसी एक जोड़ी चरण पादुका को तैयार करने में लगभग डेढ़ से दो महीने का लंबा समय लगता है। बारीक कारीगरी और विभिन्न प्रतीकों को शुद्धता के साथ उकेरना अत्यधिक एकाग्रता का काम है। दीपावली के पर्व को ध्यान में रखते हुए उन्होंने विशेष रूप से 100 जोड़ी चरण पादुकाएं तैयार की हैं। श्रद्धालुओं और संग्राहकों के लिए इन विशेष पादुकाओं की कीमत 1100 रुपये प्रति जोड़ी रखी गई है, ताकि लोग अपने घरों के पूजा स्थल परन्हें स्थापित कर सकें।

















