नीट पीजी 2026 एडमिट कार्ड आज होंगे जारी, परीक्षा हॉल में तकनीकी खराबी आने पर लागू हैं खास नियमप्राइवेट कॉलेजों में मैनेजमेंट और एनआरआई कोटा: जानिए क्या है दोनों में अंतर और एडमिशन का तरीकाजयपुर के रामपुर कंवरपुरा में स्कूल निरीक्षण विवाद के बाद CJP नेताओं पर SC ST एक्ट दर्ज, जानिए कानून में सजा और बचाव के प्रावधानभरतपुर में भारी वाहन चालकों के लिए मुफ्त ड्राइविंग ट्रेनिंग शुरू, एनएसक्यूएफ लेवल-4 सर्टिफिकेट के साथ विदेश में भी मिलेंगे रोजगार के अवसरफर्जी सिम और साइबर ठगी पर लगाम, देश में कड़े हुए नए टेलीकॉम नियम और बायोमेट्रिक अनिवार्यतामौलाना फजलुर रहमान का आसिम मुनीर पर बड़ा हमला, कहा- 1971 के सरेंडर जैसा दोहराया जा रहा इतिहासजयपुर में पार्षद टिकट की मची होड़, 150 वार्डों पर 2500 से ज्यादा दावेदार उतरे मैदान मेंराजनाथ सिंह ने दी अरुण जेटली को श्रद्धांजलि, याद किए उनके प्रशासनिक योगदानमूलांक 7 राशिफल 24 अगस्त 2026: रिश्तों में बढ़ेगा अपनापन और मिलेगा अपनों का पूरा साथरक्षाबंधन पर बन रहे हैं 7 दुर्लभ शुभ संयोग, जानिए राखी बांधने का सबसे उत्तम मुहूर्त और भद्रा की स्थिति
कबाड़ बेचकर सरकार ने कमाए 6000 करोड़ रुपये, दिल्ली एयरपोर्ट के 21 टर्मिनल-3 जितनी जगह खालीव्यापार
24 अग॰ 2026, 9:27 am (1 घंटे पहले)· 4

कबाड़ बेचकर सरकार ने कमाए 6000 करोड़ रुपये, दिल्ली एयरपोर्ट के 21 टर्मिनल-3 जितनी जगह खाली

केंद्र सरकार ने पिछले छह वर्षों में विशेष स्वच्छता अभियानों के जरिए कबाड़ बेचकर 6,000 करोड़ रुपये जुटाए हैं और 1,233 लाख वर्ग फीट जगह खाली कराई है।

सरकारी कार्यालयों में लंबे समय से धूल फांक रहे बेकार सामान, खराब मशीनों और पुरानी फाइलों को जब संपत्ति के रूप में देखा गया, तो एक बड़ा आर्थिक लाभ सामने आया। पिछले छह वर्षों में चलाए गए विशेष स्वच्छता और कबाड़ निपटान अभियानों के माध्यम से केंद्र सरकार ने न केवल 6,000 करोड़ रुपये का भारी राजस्व प्राप्त किया, बल्कि 1,233 लाख वर्ग फीट की मूल्यवान जमीन भी मुक्त कराई। इस क्षेत्रफल के विशाल आकार का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि यह 12.33 करोड़ वर्ग फीट का खाली क्षेत्र लगभग 29 'भारत मंडपम' या दिल्ली एयरपोर्ट के 21 'टर्मिनल-3' के कुल निर्मित क्षेत्रफल के बराबर है। अनुपयोगी कबाड़ को हटाकर सरकारी विभागों ने न सिर्फ भारी आय अर्जित की है, बल्कि कार्यस्थलों को अधिक खुला, व्यवस्थित और आधुनिक स्वरूप भी प्रदान किया है।

कबाड़ से हुई बंपर कमाई और राजस्व सृजन

दूसरे शब्दों में कहा जाए तो सरकार ने इतनी अधिक जमीन खाली कर ली है कि उसमें देश की कई प्रमुख और बड़ी सरकारी इमारतें समा सकती हैं। इस सफाई अभियान के साथ एक मजबूत आर्थिक पहलू भी जुड़ा हुआ है। केंद्र सरकार ने पिछले छह वर्षों में इस अभियान के दौरान हटाए गए कबाड़ की बिक्री से कुल 6,000 करोड़ रुपये कमाए हैं। जिस सामग्री को आम तौर पर बेकार मानकर अनदेखा कर दिया जाता था, वह अब सरकारी खजाने के लिए कमाई का एक बड़ा और अहम जरिया बन चुकी है। सरकारी दफ्तरों और परिसरों में दशकों से अनावश्यक सामान जमा होता रहता है, जिसमें टूटे-फूटे फर्नीचर, पुरानी मशीनरी, वाहन, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, फाइलें और ऐसी ही अन्य चीजें शामिल होती हैं जिनका अब कोई उपयोग नहीं रह जाता है।

ये भी पढ़ें

एक साल के बजट के बराबर है यह राशि

छह हजार करोड़ रुपये की यह राशि यदि दूसरे परिप्रेक्ष्य में देखी जाए, तो यह संशोधित गगनयान कार्यक्रम के लिए निर्धारित 20,193 करोड़ रुपये के बजट का लगभग 30 प्रतिशत हिस्सा है। इसके अलावा, 6,000 करोड़ रुपये की यह रकम आयुष मंत्रालय जैसे किसी प्रमुख सरकारी विभाग के सालाना बजट के लगभग बराबर है, और यह पूरी राशि केवल बेकार हो चुके सामान को हटाकर जुटाई गई है। एक बार जब कोई वस्तु सरकारी स्टोर रूम, यार्ड या परिसर में पहुंच जाती है, तो वह कई बार वर्षों तक वहीं पड़ी रहती है। इस विशेष सफाई अभियान का मुख्य उद्देश्य इसी स्थिति को बदलना और कार्यसंस्कृति में सुधार लाना रहा है।

साफ-सफाई से खाली हुई कीमती जमीन

विभिन्न विभागों को यह निर्देश दिए गए कि वे ऐसे सामान की पहचान करें जो अब उपयोग में नहीं है, उसे निर्धारित नियमों और प्रक्रिया के तहत हटाएं और इस प्रकार सरकारी संपत्ति को अतिक्रमणमुक्त करें। इसका परिणाम एक ऐसा प्रभावशाली आंकड़ा है जिसे आसानी से नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है, यानी 12.33 करोड़ वर्ग फीट जगह का खाली होना। इस पूरी प्रक्रिया के दो मुख्य परिणाम सामने आए हैं, पहला जो वित्तीय खातों में दिखाई देता है और दूसरा जो धरातल पर नजर आता है। सरकार को 6,000 करोड़ रुपये की कमाई हुई और 12.33 करोड़ वर्ग फीट जमीन खाली हुई।

सरकारी परिसरों की सफाई का बड़ा असर

यह कहानी केवल कबाड़ बेचने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सरकारी कचरे में छिपी हुई छिपी हुई कीमत और संभावनाओं की कहानी है। ऐसा सामान जिसने वर्षों तक दफ्तरों में जगह घेर रखी थी, उसे हटाने पर न केवल आर्थिक लाभ मिला बल्कि इस्तेमाल योग्य कीमती रियल एस्टेट भी प्राप्त हुआ। सरकारी परिसरों में पिछले छह वर्षों से चल रहे इस स्वच्छता अभियान ने एक ऐसा अनूठा उदाहरण पेश किया है जिससे यह साबित होता है कि जिसे कभी केवल कबाड़ समझा जाता था, उसने हजारों करोड़ रुपये का खजाना और विशाल खाली जगह देश को सौंपी है।

सवाल-जवाब

कबाड़ निपटान अभियान से सरकार ने कुल कितना राजस्व जुटाया है?
केंद्र सरकार ने पिछले छह वर्षों में चलाए गए विशेष स्वच्छता अभियानों के दौरान कबाड़ बेचकर कुल 6,000 करोड़ रुपये का राजस्व जुटाया है।
अभियान के तहत कुल कितनी जगह खाली कराई गई है?
इस अभियान के माध्यम से कुल 1,233 लाख वर्ग फीट यानी लगभग 12.33 करोड़ वर्ग फीट की कीमती जगह खाली कराई गई है।
खाली कराई गई जगह का क्षेत्रफल किसके बराबर है?
खाली कराई गई यह 12.33 करोड़ वर्ग फीट जगह लगभग 29 भारत मंडपम या दिल्ली एयरपोर्ट के 21 टर्मिनल-3 के कुल निर्मित क्षेत्र के बराबर है।
6,000 करोड़ रुपये की यह राशि किस प्रमुख बजट के करीब है?
यह 6,000 करोड़ रुपये की राशि आयुष मंत्रालय के सालाना बजट के बराबर है और बढ़े हुए गगनयान प्रोग्राम के बजट का लगभग 30 प्रतिशत हिस्सा है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR