राजस्थान के उच्च शिक्षा विभाग द्वारा चलाई जा रही लोकप्रिय 'कालीबाई भील मेधावी छात्रा स्कूटी योजना' और 'देवनारायण छात्रा स्कूटी योजना' के अंतर्गत वाहन वितरण के तौर-तरीकों में एक बार फिर बड़ा संशोधन किया गया है। नियमों में बार-बार हो रहे इन बदलावों के कारण पिछले तीन वर्षों से दोपहिया वाहन मिलने का इंतजार कर रही प्रतिभावान बालिकाओं को अब सीधे बैंक खातों में राशि भेजने यानी डीबीटी (DBT) के स्थान पर ई-वाउचर (E-Voucher) उपलब्ध कराए जाएंगे। इस नए निर्णय के अमल में आने से राज्य भर की लगभग 88 हजार छात्राओं के लिए वाहन प्राप्त करने का मार्ग प्रशस्त हो गया है।
पुरानी प्रणालियों में बदलाव और नए नियम की पृष्ठभूमि
आपको याद दिला दें कि शुरुआती दौर में विभाग खुद ही टेंडर प्रक्रिया पूरी करके वाहन खरीदता था और छात्राओं के बीच उनका वितरण करता था। हालांकि, पिछले तीन साल से अटकी पड़ी स्कूटी के बै बैकलॉग को निपटाने के उद्देश्य से मई 2026 में यह योजना बनाई गई थी कि बालिकाओं के बैंक खातों में सीधे 70 हजार रुपये ट्रांसफर कर दिए जाएं। उस समय विभागीय अधिकारियों का सोचना था कि इस कदम से खरीद, टेंडर, स्टोरेज और डिस्ट्रीब्यूशन जैसी तमाम लंबी प्रक्रियाओं से निजात मिल जाएगी। मगर अब राज्य सरकार और उच्च शिक्षा विभाग ने अपने उस फैसले को बदलते हुए डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के प्रावधान में संशोधन कर दिया है और इसके बजाय ई-वाउचर सिस्टम को अपनाने का पक्का फैसला लिया है।
किस तरह काम करेगा ई-वाउचर और क्या होंगे इसके लाभ
इस नई कार्यप्रणाली के तहत योग्य पाई गई छात्राओं को विभाग की तरफ से एक ई-वाउचर या विशेष क्यूआर (QR) कोड मुहैया कराया जाएगा। छात्राएं अपनी पसंद के किसी भी अधिकृत ऑटोमोबाइल शोरूम या वेंडर के पास जाकर इस ई-वाउचर को दिखाएंगी और अपनी पसंद का वाहन आसानी से घर ले जा सकेंगी। इस पूरी व्यवस्था को अमलीजामा पहनाने के लिए विभाग की ओर से जल्द ही नए सिरे से निविदाएं आमंत्रित की जाएंगी। यदि पिछले सत्रों की बात करें तो वर्ष 2024, 2025 और चालू शैक्षणिक सत्र 2026-27 को मिलाकर आगामी एक साल के भीतर लगभग 88 हजार बालिकाओं को ये वाहन वितरित किए जाने हैं। इनमें से चालू सत्र 2026-27 के लिए चयनित 35 हजार पात्र छात्राओं की फाइनल लिस्ट पहले ही जारी की जा चुकी है और संबंधित कॉलेजों द्वारा उनके दस्तावेजों की जांच का काम भी पूरी तरह संपन्न हो चुका है।
क्या है कालीबाई भील मेधावी छात्रा स्कूटी योजना का इतिहास
वर्ष 2020 में शुरू की गई इस कल्याणकारी योजना का नाम डूंगरपुर की महान वीरांगना कालीबाई भील के नाम पर रखा गया है, जिन्होंने शिक्षा के प्रसार के लिए अपने प्राणों का बलिदान दे दिया था। इस योजना का मूल उद्देश्य बालिकाओं को उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए प्रेरित करना और उन्हें कॉलेज आने-जाने में आवागमन की सुगम सुविधा मुहैया कराना है। इस योजना के दायरे में केवल वाहन ही नहीं आता, बल्कि इसके साथ वाहन के रजिस्ट्रेशन से जुड़े दस्तावेज, एक साल का कॉम्प्रिहेंसिव इंश्योरेंस, पांच साल का थर्ड पार्टी बीमा, दो लीटर पेट्रोल एक बार के लिए और एक आईएसआई (ISI) मार्क्ड हेलमेट भी पूरी तरह निशुल्क प्रदान किया जाता है।
पात्रता के नियम और शर्तें
इस योजना का फायदा उन्हीं छात्राओं को मिलता है जिन्होंने राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (RBSE) की 12वीं की परीक्षा में कम से कम 65 प्रतिशत अंक हासिल किए हों या फिर केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) से 75 प्रतिशत अंक प्राप्त किए हों, बशर्ते वे राज्य के किसी भी सरकारी या निजी कॉलेज में नियमित तौर पर स्नातक की डिग्री ले रही हों। इसके अलावा शर्त यह भी है कि छात्रा के माता-पिता की कुल वार्षिक आय 2.5 लाख रुपये से ज्यादा न हो। यदि किसी बालिका को पहले कभी 10वीं कक्षा के प्राप्तांकों के आधार पर स्कूटी मिल चुकी है, तो उसे दोबारा 12वीं के आधार पर स्कूटी नहीं दी जाएगी, बल्कि उसकी जगह 40,000 रुपये की आर्थिक सहायता राशि दी जाती है।



















