उत्तर प्रदेश का मुरादाबाद शहर दुनियाभर में पीतल नगरी के नाम से जाना जाता है, और आजकल यहां के कारीगर पूजा में इस्तेमाल होने वाली नक्काशीदार पीतल की चौकियों को नए-नए डिजाइनों में ढाल रहे हैं. भगवान की मूर्ति रखने के लिए बनने वाली इन छोटी पीतल की चौकियों पर अब खास नक्काशी की जा रही है, और बाजार में खरीदार इन्हें हाथोंहाथ पसंद कर रहे हैं, जिससे यह सीजन की सबसे मांग वाली चीजों में शुमार हो गई है.
सावन में क्यों बढ़ी पीतल की चौकी की मांग
सावन के महीने में वैसे भी पीतल से बने पूजा के सामान की बिक्री हर साल बढ़ जाती है, और इस बार यही रुझान पीतल की इस नक्काशीदार चौकी पर भी दिख रहा है. घरों और मंदिरों में भगवान शिव सहित अन्य देवी-देवताओं की मूर्ति टिकाने के लिए एक मजबूत और सजावटी आधार चाहिए होता है, और लोग इसी वजह से यह चौकी खरीदना पसंद कर रहे हैं, क्योंकि सावन में पीतल के सामान को पूजा-पाठ में खास माना जाता है. दुकानदारों का कहना है कि सावन बढ़ने के साथ-साथ पीतल के पूजा सामान की खरीदारी भी लगातार बढ़ती जा रही है.
कारोबारी बोले, हाथ से नक्काशी कर बनाई जा रही है यह चौकी
पीतल कारोबारी किशन खन्ना ने बताया, "हमारे यहां पीतल की यह चौकी नए डिजाइनों में नकाशी से उकेरकर तैयार की जा रही है." उन्होंने आगे बताया कि यह चौकी 4 इंच से लेकर 10 इंच तक अलग-अलग साइज में तैयार की जा रही है, ताकि ग्राहक अपने घर में रखी मूर्ति के हिसाब से सही साइज चुन सकें. हर एक चौकी पर बारीक और महीन नक्काशी करके डिजाइन उकेरा जाता है, जिससे यह आम पीतल के सामान से कहीं ज्यादा खूबसूरत और आकर्षक दिखाई देती है. उनका कहना है कि यही बारीक कारीगरी और नया लुक है, जिसकी वजह से खरीदारों की भीड़ लगातार बढ़ती जा रही है.
मुरादाबाद से मथुरा, वृंदावन, हरिद्वार और काशी तक दीवानगी
पीतल की इस नई डिजाइन वाली चौकी को सिर्फ मुरादाबाद में ही नहीं, बल्कि आसपास के धार्मिक शहरों जैसे मथुरा, वृंदावन, हरिद्वार और काशी में भी उतनी ही पसंद किया जा रहा है, जहां घरों में रोजाना पूजा के लिए पीतल का सामान खरीदा जाता है. वैसे तो इस चौकी की मांग साल भर बनी रहती है, लेकिन सावन के दौरान यह मांग और भी ज्यादा बढ़ जाती है, क्योंकि इन शहरों के मंदिरों और घरों में इस महीने पूजा-अर्चना करने वालों की भीड़ सबसे ज्यादा रहती है.
1100 रुपये से शुरू कीमत, पसंद के मुताबिक ऑर्डर पर भी बनवा सकते हैं
कीमत की बात करें तो यह पीतल की चौकी 1100 रुपये से शुरू होकर साइज और नक्काशी के हिसाब से हजारों रुपये तक में मिलती है, और जिन ग्राहकों को कुछ खास डिजाइन चाहिए, वे इसे अपनी पसंद के मुताबिक ऑर्डर पर भी बनवा सकते हैं. बाजार में मिलने वाली आम चौकियों से यह इसी वजह से अलग दिखती है कि इस पर हाथ से खास नक्काशी की गई होती है. फिलहाल इस नए डिजाइन की चौकी की सबसे ज्यादा मांग देश के भीतर ही देखने को मिल रही है, और कारोबारियों का कहना है कि पूरे भारत के अलग-अलग शहरों में इसकी अच्छी खासी बिक्री हो रही है.
मुरादाबाद वैसे भी पीतल के उत्पादों को देश ही नहीं बल्कि विदेशों तक भेजने के लिए जाना जाता रहा है, और अब पीतल की यह नई नक्काशीदार चौकी शहर के कारीगरों के हुनर की एक और मिसाल बनकर उभर रही है, जो हर बदलते सीजन और ट्रेंड के साथ मुरादाबाद की पीतल नगरी वाली पहचान को और मजबूत कर रही है.


















