घरेलू सर्राफा बाजार में आभूषण खरीदारों और वैवाहिक मांग की तैयारी में जुटे परिवारों को इस कारोबारी हफ्ते कीमतों में आई तेज सुस्ती से बड़ी सहूलियत मिली है। बहुमूल्य धातुओं के दामों में जारी यह गिरावट मुख्य रूप से विदेशी व्यापारिक दबाव और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बदलते आर्थिक हालात के कारण देखने को मिली है। खुदरा स्तर पर जेवरात बनवाने वालों के लिए यह राहत ऐसे समय में सामने आई है जब त्योहारी और वैवाहिक खरीदारी तेज होती है।
सोने के अलग-अलग कैरेट में देखने को मिली कमजोरी
इंडिया बुलियन ज्वेलर्स एसोसिएशन के हालिया आंकड़ों को देखें तो 24 कैरेट शुद्धता वाले सोने की कीमत में 1,576 रुपये की गिरावट दर्ज की गई। इस गिरावट के बाद यह स्तर 1,40,054 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया, जो कि इससे ठीक पहले 1,41,630 रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास चल रहा था। शुद्ध सोने के दाम टूटने का सीधा प्रभाव जेवराती सोने पर भी पड़ा है।
पारंपरिक आभूषणों के निर्माण में सबसे ज्यादा पसंद किए जाने वाले 22 कैरेट सोने का भाव 1,29,733 रुपये से लुढ़ककर 1,28,289 रुपये प्रति 10 ग्राम पर सिमट गया है। इसके साथ ही आधुनिक और हल्के डिजाइन के आभूषणों के लिए प्रचलित 18 कैरेट सोने का भाव 1,06,223 रुपये से घटकर 1,05,041 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ। इस प्रकार सभी श्रेणियों के खरीदारों को अपनी खरीदारी योजना में बजटीय राहत मिली है।
हफ्ते के दौरान सोने की चाल और उतार-चढ़ाव
व्यापारिक सत्रों के दौरान सोने के दाम एकसमान दायरे में नहीं रहे बल्कि भारी उतार-चढ़ाव देखा गया। 28 अक्टूबर के शुरुआती सत्र में पीली धातु अपने साप्ताहिक शिखर 1,42,300 रुपये प्रति 10 ग्राम तक उछल गई थी। हालांकि ऊंचे स्तरों पर मुनाफावसूली और बिकवाली का भारी दबाव बनने लगा। नतीजा यह हुआ कि 30 अक्टूबर के सांध्य सत्र तक आते-आते यह धातु हफ्ते के सबसे निचले पायदान यानी 1,40,054 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुई।
चांदी की कीमतों में आई भारी गिरावट
सफेद धातु के कारोबार में इस हफ्ते बेहद तीखा रुख देखने को मिला। एक किलोग्राम चांदी के भाव में 13,071 रुपये का भारी गोता लगा, जिससे इसका भाव 1,94,415 रुपये प्रति किलो से गिरकर 1,81,344 रुपये प्रति किलो के स्तर पर पहुंच गया। हाल के महीनों के रुझान को देखें तो एक ही हफ्ते के भीतर 13 हजार रुपये से अधिक का नुकसान एक बड़ा झटका माना जा रहा है।
चांदी के भावों की दिशा भी पूरे हफ्ते अस्थिर रही। 26 अक्टूबर के कारोबारी समय में चांदी अपने साप्ताहिक शीर्ष स्तर 1,95,050 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई थी। इसके बाद विदेशी बाजारों से कमजोर संकेत मिलने पर बिकवाली हावी हो गई और 30 अक्टूबर की शाम तक धातु टूटकर हफ्ते के न्यूनतम स्तर 1,81,344 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ टिकी।
विदेशी बाजारों का मिजाज और भू-राजनीतिक समीकरण
अंतरराष्ट्रीय व्यापार में भी सोने और चांदी की दरों में स्पष्ट नरमी देखी गई। विश्व बाजार में सोने के सौदे कमजोर होकर करीब 3,885 डॉलर प्रति औंस के आसपास होते दिखे, जबकि चांदी की दरें फिसलकर लगभग 49 डॉलर प्रति औंस पर आ गईं। विदेशी बेंचमार्क में आई यह सुस्ती भारतीय घरेलू दरों पर भी पूरी तरह असर डालती नजर आई।
कमोडिटी विश्लेषकों का मानना है कि इस उठापटक के केंद्र में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव है। अमेरिका की ओर से ईरान पर जारी हमलों ने वैश्विक वित्तीय व्यवस्था में भारी असमंजस पैदा किया है। इसके अलावा डॉलर इंडेक्स की मजबूती और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के 110 डॉलर प्रति बैरल के पार लगातार बने रहने से बाजार के तमाम समीकरण उलट गए हैं।
स्थानीय बिलिंग और टैक्स की गणना
इंडिया बुलियन ज्वेलर्स एसोसिएशन की ओर से कारोबारी दिवसों पर दिन में दो बार सुबह और शाम के समय आधिकारिक भाव जारी किए जाते हैं। ग्राहकों को यह ध्यान में रखना आवश्यक है कि संस्था द्वारा तय किए गए इन आधार मूल्यों में वस्तु एवं सेवा कर तथा आभूषण गढ़ाई की लागत शामिल नहीं होती। जब कोई ग्राहक अपने नजदीकी सर्राफा विक्रेता के पास जाता है, तो जीएसटी और मेकिंग चार्ज के जुड़ने के कारण अंतिम बिल की राशि में अंतर देखने को मिलता है।


















