उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर जिले में किसानों की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करने और पारंपरिक खेती के स्थान पर व्यावसायिक बागवानी को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री राज्य औद्यानिक विकास योजना का प्रभावी संचालन किया जा रहा है। उद्यान विभाग की इस पहल के माध्यम से कृषकों को फलदार पौधों के रोपण, विदेशी फसलों की खेती, सब्जियों के उन्नत बीजों का निशुल्क वितरण, औषधीय पौधों के उत्पादन और आधुनिक कृषि यंत्रों की खरीद पर भारी वित्तीय सहायता दी जा रही है। इस योजना का मुख्य ध्येय किसानों को आधुनिक तकनीकों से जोड़कर उनकी उपज और मुनाफा दोनों बढ़ाना है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार, पात्र अभ्यर्थियों को इस योजना का लाभ पूरी पारदर्शिता के साथ पहले आओ, पहले पाओ के नियम के तहत प्रदान किया जाएगा।
फलदार बागवानी और ड्रैगन फ्रूट की खेती पर बंपर अनुदान
मुख्यमंत्री राज्य औद्यानिक विकास योजना के अंतर्गत शाहजहांपुर जिले में नए फलदार बाग स्थापित करने वाले कृषकों को विशेष प्रोत्साहन दिया जा रहा है। आम, अमरूद और पपीता जैसे पार पारंपरिक और वाणिज्यिक फलदार पौधों का बाग लगाने वाले किसानों को 50 हजार रुपए प्रति हेक्टेयर की दर से आर्थिक सहायता दी जा रही है। यह अनुदान राशि किसानों के खाते में दो अलग-अलग किश्तों में हस्तांतरित की जाएगी। इसके अलावा, बाजार में उच्च मांग वाली एग्जोटिक यानी विदेशी फसल ड्रैगन फ्रूट की खेती को बढ़ावा देने के लिए शासन स्तर से 2 लाख 70 हजार रुपए प्रति हेक्टेयर की विशाल सब्सिडी निर्धारित की गई है। इस बड़ी धनराशि से किसान कम लागत में उच्च गुणवत्ता वाले ड्रैगन फ्रूट का उत्पादन कर अपनी वार्षिक आय में उल्लेखनीय वृद्धि कर सकते हैं।
मुफ्त बीज वितरण, मचान विधि और औषधीय पौधे
सब्जी और मसाला उत्पादन के क्षेत्र में जिले को आत्मनिर्भर बनाने के लिए संकर शाक-भाजी कार्यक्रम के तहत किसानों को विभिन्न सब्जियों के उन्नत और निशुल्क बीज उपलब्ध कराए जा रहे हैं। साथ ही कटाई के बाद उपज के सुरक्षित रखरखाव के लिए प्लास्टिक क्रेट का वितरण भी किया जा रहा है। मसाला फसलों के अंतर्गत प्याज और लहसुन की खेती करने वाले कृषकों को निशुल्क बीज दिए जाने का प्रावधान है। खरीफ सत्र के दौरान कद्दूवर्गीय सब्जियों की गुणवत्ता में सुधार लाने और उत्पादन बढ़ाने के लिए मचान विधि से खेती करने वाले किसानों को 10 हजार रुपए प्रति हेक्टेयर की दर से अनुदान दिया जाएगा। इसके अतिरिक्त, औषधीय खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किसानों को शतावर की पौध भी उद्यान विभाग की ओर से मुहैया कराई जाएगी।
कृषि यंत्रीकरण, मशरूम उत्पादन और फसल सुरक्षा तकनीक
उद्यान विभाग बागवानी कार्यों में शारीरिक श्रम को कम करने और दक्षता बढ़ाने के लिए मैकेनाइजेशन पर विशेष ध्यान केंद्रित कर रहा है। योजना के तहत पावर टिलर, स्प्रेयर और मिनी ट्रैक्टर जैसी महत्वपूर्ण मशीनों की खरीद पर किसानों को भारी छूट दी जा रही है। फसलों को कीटों और मौसम के प्रभाव से बचाने के लिए फ्रूट बैग बिना किसी शुल्क के वितरित किए जाएंगे। मशरूम उत्पादन को प्रोत्साहन देने के लिए कम लागत वाली लो-कॉस्ट प्रोडक्शन यूनिट स्थापित करने हेतु वित्तीय सहायता का प्रावधान है। वहीं, मिट्टी में नमी बनाए रखने, खरपतवार पर नियंत्रण पाने और फसल की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्लास्टिक मल्चिंग की तकनीक पर भी विशेष आर्थिक मदद दी जा रही है।
पारदर्शी आवेदन प्रक्रिया और आवश्यक दस्तावेज
जिला उद्यान अधिकारी डॉ. पुनीत कुमार पाठक ने योजना की रूपरेखा साझा करते हुए बताया कि योजना का क्रियान्वयन पूर्णतः पारदर्शी व्यवस्था के तहत किया जाएगा। लाभ प्राप्त करने के लिए किसानों को पहले आओ, पहले पाओ के सिद्धांत का पालन करना होगा। इच्छुक किसानों को अपनी जमीन के दस्तावेज यानी खतौनी, आधार कार्ड, बैंक पासबुक की छायाप्रति और दो पासपोर्ट साइज फोटो के साथ शीघ्र अति शीघ्र जिला उद्यान विभाग के कार्यालय में संपर्क करके अपना पंजीकरण कराना होगा। आवेदनों की जांच के पश्चात पात्र किसानों को योजना का सीधा लाभ हस्तांतरित कर दिया जाएगा।



















