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सूखे की मार से बेफिक्र खेती: कम सिंचाई वाली जमीन के लिए धान की ये दो किस्में किसानों के लिए वरदानव्यापार
14 जून 2026, 6:10 am (45 दिन पहले)· 0

सूखे की मार से बेफिक्र खेती: कम सिंचाई वाली जमीन के लिए धान की ये दो किस्में किसानों के लिए वरदान

छत्तीसगढ़ में खरीफ की तैयारी के बीच कृषि विशेषज्ञों ने कम पानी और ऊपरी-भर्री जमीन वाले किसानों के लिए इंदिरा बरानी और पूर्णिमा धान को सबसे मुफीद बताया है, जो 100 से 130 दिनों में तैयार होकर 20 से 25 क्विंटल प्रति एकड़ तक उपज दे सकती हैं।

छत्तीसगढ़ में खरीफ का मौसम दस्तक देने को तैयार है और खेतों में हलचल तेज हो गई है। आने वाले कुछ ही दिनों में धान की बुआई का सिलसिला शुरू हो जाएगा, इसलिए प्रदेश भर के किसान अभी खेत तैयार करने, सही बीज चुनने और खाद की व्यवस्था जुटाने में लगे हैं। इसी मोड़ पर कृषि विशेषज्ञों की एक नसीहत किसानों के लिए बेहद काम की साबित हो सकती है — बीज वही चुनिए जो आपकी जमीन और पानी की उपलब्धता से मेल खाता हो।

जहां पानी कम, वहीं असली चुनौती

राज्य के बड़े हिस्से में ऐसे खेत हैं जहां सिंचाई का पुख्ता इंतजाम नहीं है, और बारिश होने पर भी पानी ज्यादा देर खेत में टिक नहीं पाता। ऊपरी और भर्री जमीन वाले इलाकों में हालत और भी मुश्किल रहती है, जहां हर साल किसान उपज को लेकर चिंता में रहते हैं। ऐसी जमीन पर अगर किस्म का चुनाव गलत हो गया, तो किसान की मेहनत और उसकी लागत — दोनों पर सीधी चोट पड़ती है। यही वजह है कि विशेषज्ञ बुआई से पहले जमीन की प्रकृति को परखने पर जोर दे रहे हैं।

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दो किस्में जो कम पानी में भी टिकी रहती हैं

कृषि विज्ञान केंद्र, बालोद के विशेषज्ञ एआर गौर ने TrendKia को बताया कि ऐसे खेतों के लिए इंदिरा बरानी और पूर्णिमा धान सबसे उपयुक्त किस्में मानी जाती हैं। उनके मुताबिक ये दोनों किस्में पानी की कमी के बावजूद अच्छी बढ़वार लेती हैं और संतोषजनक उपज देती हैं। खासकर अपलैंड और भर्री जमीन वाले क्षेत्रों में इनका प्रदर्शन बाकी किस्मों के मुकाबले बेहतर देखा गया है।

कितने दिन में तैयार, कितनी उपज

समय और पैदावार के मामले में दोनों किस्में किसानों की जरूरत पर खरी उतरती हैं। इंदिरा बरानी किस्म करीब 120 से 130 दिनों में पककर तैयार हो जाती है, जबकि पूर्णिमा किस्म इससे जल्दी, यानी 100 से 110 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है। दोनों की औसत उत्पादकता 20 से 25 क्विंटल प्रति एकड़ तक आंकी गई है। सबसे राहत देने वाली बात यह है कि अगर कुछ दिन बारिश रुक भी जाए, तब भी इनकी बढ़वार पूरी तरह नहीं रुकती और पौधे सामान्य ढंग से विकसित होते रहते हैं — यही गुण इन्हें अनिश्चित मानसून वाले इलाकों के लिए भरोसेमंद बनाता है।

बुआई से पहले यह जरूर ध्यान रखें

कृषि विभाग और कृषि विज्ञान केंद्र किसानों से बार-बार अपील कर रहे हैं कि बोनी शुरू करने से पहले खेत की प्रकृति, मिट्टी में मौजूद नमी और मौसम के पूर्वानुमान — तीनों को मिलाकर ही बीज का फैसला करें। सही वैरायटी का चुनाव सिर्फ उपज नहीं बढ़ाता, बल्कि कम पानी वाले क्षेत्रों में खेती को ज्यादा सुरक्षित और मुनाफे वाली भी बना देता है। खरीफ की शुरुआत से ठीक पहले मिली यह सलाह किसानों के लिए इस साल फायदे का सौदा साबित हो सकती है।

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