भारतीय कॉर्पोरेट जगत में शीर्ष नेतृत्व को मिलने वाले मुआवजे को लेकर हमेशा से चर्चाएं होती रही हैं, और इस मामले में टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन का नाम सबसे ऊपर आता है। पिछले कुछ वर्षों में उनके नेतृत्व में समूह ने टेक्नोलॉजी, विमानन, डिजिटल स्पेस और इलेक्ट्रिक वाहनों जैसे क्षेत्रों में जबरदस्त विस्तार किया है। व्यावसायिक सफलता और बेहतर वित्तीय नतीजों के साथ उनके वार्षिक वेतन में भी लगातार इजाफा दर्ज किया गया है, जिसके ताजा आंकड़े सामने आए हैं।
पिछले पांच वित्तीय वर्षों के दौरान एन चंद्रशेखरन ने वेतन और भत्तों के रूप में कुल 685 करोड़ रुपये से अधिक की कमाई की है। भारतीय बिजनेस सेक्टर में किसी भी पेशेवर कार्यकारी अधिकारी या चेयरमैन को मिलने वाला यह सबसे बड़ा और भारी-भरकम पैकेज माना जाता है। इस बड़े मुआवजे की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसमें पारंपरिक फिक्स्ड वेतन की तुलना में कंपनी के मुनाफे से मिलने वाले हिस्से यानी कमीशन की राशि सबसे ज्यादा है, जो उनके नेतृत्व की क्षमता और व्यावसायिक फैसलों को साफ तौर पर दर्शाती है।
वर्ष-दर-वर्ष वेतन में बढ़ोतरी का ग्राफ
अगर पिछले पांच वित्तीय वर्षों के आंकड़ों पर बारीकी से गौर करें तो एन चंद्रशेखरन के कुल पैकेज में लगातार भारी उछाल देखने को मिला है। वित्त वर्ष 2021-22 के दौरान उनका कुल वार्षिक पैकेज 109 करोड़ रुपये रिकॉर्ड किया गया था। इसके तुरंत बाद के वर्ष यानी वित्त वर्ष 2022-23 में यह बढ़कर 113 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया।
यह सिलसिला यहीं नहीं रुका और वित्त वर्ष 2023-24 में उनके मुआवजे में बड़ा उछाल आया, जिसके तहत उन्हें कुल 135.32 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। आने वाले वर्षों में कंपनी के प्रदर्शन के साथ यह आंकड़ा और तेजी से ऊपर गया। वित्त वर्ष 2024-25 में उनका वेतन बढ़कर 155.81 करोड़ रुपये तक पहुंच गया और ताजा आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 में यह पैकेज बढ़कर रिकॉर्ड 158.6 करोड़ रुपये के स्तर को छू गया।
वेतन की बनावट और प्रॉफिट कमीशन की भूमिका
टाटा संस में कार्यकारी चेयरमैन के पद पर मिलने वाले वेतन ढांचे को मुख्य रूप से दो हिस्सों में बांटा जाता है। इसमें पहला भाग नियमित मूल वेतन और मिलने वाली सुविधाएं या एलाउंस होते हैं, जबकि दूसरा और सबसे बड़ा हिस्सा कंपनी के मुनाफे पर मिलने वाला कमीशन होता है।
इसका एक बेहतरीन उदाहरण वित्त वर्ष 2024-25 के आंकड़े से मिलता है, जब कुल 155.81 करोड़ रुपये के पैकेज में से बेस सैलरी और भत्ते केवल 15.12 करोड़ रुपये के आसपास थे। इसके मुकाबले 140.69 करोड़ रुपये की विशाल राशि सीधे तौर पर प्रॉफिट कमीशन के रूप में दी गई थी। सरल शब्दों में कहें तो उनके कुल वेतन का 90 प्रतिशत से अधिक हिस्सा कंपनी के लाभ के साथ सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है।
टाटा समूह का रणनीतिक विस्तार और लाभ
एन चंद्रशेखरन के कार्यकाल के दौरान टाटा समूह ने कई बड़े और ऐतिहासिक रणनीतिक बदलाव किए हैं। एयर इंडिया की घर वापसी, टाटा डिजिटल का बड़ा विस्तार और देश में सेमीकंडक्टर निर्माण जैसे महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट्स उनके नेतृत्व में ही शुरू या फिर मजबूती के साथ आगे बढ़ाए गए हैं।
होल्डिंग कंपनी के रूप में टाटा संस को अपनी समूह की अन्य कंपनियों से मिलने वाले डिविडेंड और मुनाफे में हुई बढ़ोतरी का सीधा फायदा चेयरमैन के कमीशन में बढ़ोतरी के रूप में भी मिला है। मजबूत व्यावसायिक रणनीतियों के कारण समूह लगातार नए मुकाम हासिल कर रहा है।
टाटा संस के शानदार वित्तीय नतीजे
टाटा समूह की मुख्य होल्डिंग कंपनी टाटा संस ने वित्त वर्ष 2025-26 यानी FY26 के दौरान बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए अपने स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट में पूरे 22 प्रतिशत की शानदार वृद्धि दर्ज की है। इस अवधि में कंपनी का शुद्ध लाभ बढ़कर 31,961 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया, जबकि इसके पिछले साल यह आंकड़ा 26,232 करोड़ रुपये था।
इस पूरे दौर में कंपनी का कुल रेवेन्यू भी 9.1 प्रतिशत की बढ़त के साथ 42,367 करोड़ रुपये दर्ज किया गया। इस वित्तीय सफलता में टाटा कैपिटल की बाजार में हुई लिस्टिंग के जरिए जुटाए गए लगभग 7,500 करोड़ रुपये का भी अहम योगदान रहा है। इन मजबूत वित्तीय परिणामों को देखते हुए कंपनी के बोर्ड ने अपने शेयरधारकों के लिए प्रति शेयर 1,10,717 रुपये यानी कुल 4,475 करोड़ रुपये का भारी डिविडेंड देने की सिफारिश की है।



















